Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ الذِّلَّةُ: उन पर अपमान और ज़िल्लत थोप दी गई।
- أَيْنَ مَا ثُقِفُوا: जहाँ कहीं भी वे पाए जाएँ।
- بِحَبْلٍ مِّنَ اللَّهِ: अल्लाह की ओर से अमन और सुरक्षा का वादा (इस्लाम या ज़िम्मा)।
- وَبَاءُوا: वे लौटे (अर्थात उन्होंने कमाया)।
- الْمَسْكَنَةُ: दरिद्रता, फ़क़ीरी और बेचारगी।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने बनी इसराईल (यहूदियों) की हालत बयान करते हुए फ़रमाया कि उन पर ज़िल्लत और रुसवाई का सिलसिला ऐसा लगा दिया गया कि वे जहाँ भी मिलें, वहीं अपमानित और दबे-कुचले हों। उनके पास कोई इज़्ज़त और ताक़त नहीं, सिवाय उस हालत के जब वे अल्लाह के वादे (इस्लाम क़बूल करने) या लोगों (मुसलमानों) की ओर से दी गई अमान (जज़िया या सुरक्षा) के सहारे किसी तरह से जीने की इजाज़त पा लें। यानी उनकी सुरक्षा का एकमात्र ज़रिया यही है कि वे मुसलमानों के संरक्षण में आ जाएँ, वरना उनकी कोई हैसियत नहीं।
इसके अलावा, वे अल्लाह के ग़ज़ब के भी हक़दार बने और उन पर मुसीबत और दरिद्रता भी मुसल्लत कर दी गई। यह सब कुछ उनके अपने कर्मों का नतीजा था, क्योंकि वे अल्लाह की आयतों (निशानियों और किताबों) का इनकार करते रहे और नबियों को नाहक़ क़त्ल करते रहे। यह सब उनकी नाफ़रमानी और हद से गुज़रने की वजह से हुआ। उन्होंने छोटे-छोटे गुनाहों पर अड़े रहकर बड़े जुर्म किए, यहाँ तक कि अल्लाह के प्यारे नबियों के क़त्ल तक पहुँच गए।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें सिखाती है कि इज़्ज़त और सरबुलंदी सिर्फ़ अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में है। जो लोग अल्लाह के हुक्मों से मुँह मोड़ते हैं और उसकी निशानियों का मज़ाक उड़ाते हैं, वे दुनिया में भी ज़िल्लत उठाते हैं और आख़िरत में भी रुसवा होंगे। इसके विपरीत, जो लोग अल्लाह के धागे (क़ुरआन और सुन्नत) को मज़बूती से थाम लेते हैं, अल्लाह उन्हें इज़्ज़त देता है, चाहे दुनिया उनके ख़िलाफ़ ही क्यों न हो। प्यारे भाइयो! आज हम देखते हैं कि जो उम्मतें क़ुरआन से दूर हुईं, उन पर ज़िल्लत और मुसीबतें आईं। हमें चाहिए कि हम इस सबक़ से सीखें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अल्लाह की रस्सी (इस्लाम) को मज़बूती से पकड़ें। अल्लाह का वादा है कि जो लोग उसकी राह में एक-दूसरे के साथ जुड़े रहेंगे, वे कभी ज़िल्लत का शिकार नहीं होंगे। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 110-114 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 112
सूरा आल-इमरान आयत 112 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जहॉ कहीं हत्ते चढ़े उनपर रूसवाई की मार पड़ी…सूरा आयत 112/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 110–114. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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