अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَن يَضُرُّوكُمْ – वे तुम्हें हानि नहीं पहुँचा सकेंगे
- إِلَّا أَذًى – सिवाय तकलीफ़ देने के (यानी सिर्फ़ ज़ुबानी आज़ाद)
- يُوَلُّوكُمُ الْأَدْبَارَ – वे पीठ दिखाकर भाग जाएँगे (पराजित होकर)
- لَا يُنصَرُونَ – उन्हें सहायता नहीं मिलेगी
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालों! अल्लाह तआला तुम्हें यक़ीन दिला रहा है कि अहले-किताब के ये फ़ासिक़ (दुष्ट) लोग—चाहे वे यहूदी हों या ईसाई—तुम्हें कोई बड़ा नुक़सान नहीं पहुँचा सकते। उनकी सारी कोशिशें, सारी साज़िशें और सारे हथकंडे इसके सिवा कुछ नहीं कि वे तुम्हें ज़ुबानी तकलीफ़ दे सकते हैं—तुम्हारे कानों तक बुरी बातें पहुँचा सकते हैं, तुम्हारे दीन का मज़ाक़ उड़ाते हैं, तुम्हें बुरा-भला कहते हैं, और तुम्हारे ख़िलाफ़ झूठे प्रचार करते हैं। लेकिन यह सब उनकी मजबूरी है, उनकी कमज़ोरी की निशानी है, क्योंकि सच्ची ताक़त तो अल्लाह और उसके ईमानवाले बंदों के साथ है।
और अगर वे कभी तुमसे जंग करने की जुर्रत भी करें, तो अल्लाह का वादा है कि वे मैदान-ए-जंग से भाग खड़े होंगे, पीठ दिखाकर मैदान छोड़ देंगे। उन्हें कभी भी तुम पर ग़लबा नहीं मिलेगा, और न ही अल्लाह की तरफ़ से उन्हें कोई मदद पहुँचेगी। यह अल्लाह का क़ानून है जो उसने अपने नबी और ईमानवालों के हक़ में लिख दिया है।
याद रखो कि यह सिर्फ़ एक ऐतिहासिक घटना का ज़िक्र नहीं, बल्कि हर ज़माने के मुसलमानों के लिए एक बशारत (खुशख़बरी) और तसल्ली है। जब भी दुश्मन तुम्हें डराने की कोशिश करें, जब भी वे तुम्हारे दिलों में ख़ौफ़ डालने की साज़िश करें, तो याद करो कि अल्लाह ने अपने बंदों से वादा किया है—सच्चाई और ईमान हमेशा बुलंद रहेगा। तुम्हारा नुक़सान करने की उनकी तमाम कोशिशें उनकी अपनी ज़िल्लत का सबब बनेंगी।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि ईमानवालों को कभी दुश्मनों की धमकियों से डरना नहीं चाहिए। उनकी ज़ुबानी हरकतों से दिल पर असर न होने दें, क्योंकि असली फ़तह अल्लाह की तरफ़ से है। और जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, अल्लाह उनके लिए काफ़ी है। यही वह ताक़त है जो मुसलमानों को हर दौर में बुलंदियों पर ले गई—जब उन्होंने अल्लाह के वादे पर पूरा यक़ीन रखा और सब्र के साथ डटे रहे।
📜 आयत 109-113 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 111
सूरा आल-इमरान आयत 111 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुसलमानों) ये लोग मामूली अज़ीयत के सिवा तुम्हें हरगिज़ ज़रर…सूरा आयत 111/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 109–113. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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