आल-इमरान · 111/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
لَن يَضُرُّوكُمْ إِلَّا أَذًى ۖ وَإِن يُقَاتِلُوكُمْ يُوَلُّوكُمُ الْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ ۝١١١
Lai yadurrookum `illaaa azanw wa ai yuqaatilookum yuwallookumul adbaara summa laa yunsaroon
📖 हिंदी अर्थ
(मुसलमानों) ये लोग मामूली अज़ीयत के सिवा तुम्हें हरगिज़ ज़रर नहीं पहुंचा सकते और अगर तुमसे लड़ेंगे तो उन्हें तुम्हारी तरफ़ पीठ ही करनी होगी और फिर उनकी कहीं से मदद भी नहीं पहुंचेगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَن يَضُرُّوكُمْ – वे तुम्हें हानि नहीं पहुँचा सकेंगे
  • إِلَّا أَذًى – सिवाय तकलीफ़ देने के (यानी सिर्फ़ ज़ुबानी आज़ाद)
  • يُوَلُّوكُمُ الْأَدْبَارَ – वे पीठ दिखाकर भाग जाएँगे (पराजित होकर)
  • لَا يُنصَرُونَ – उन्हें सहायता नहीं मिलेगी

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमानवालों! अल्लाह तआला तुम्हें यक़ीन दिला रहा है कि अहले-किताब के ये फ़ासिक़ (दुष्ट) लोग—चाहे वे यहूदी हों या ईसाई—तुम्हें कोई बड़ा नुक़सान नहीं पहुँचा सकते। उनकी सारी कोशिशें, सारी साज़िशें और सारे हथकंडे इसके सिवा कुछ नहीं कि वे तुम्हें ज़ुबानी तकलीफ़ दे सकते हैं—तुम्हारे कानों तक बुरी बातें पहुँचा सकते हैं, तुम्हारे दीन का मज़ाक़ उड़ाते हैं, तुम्हें बुरा-भला कहते हैं, और तुम्हारे ख़िलाफ़ झूठे प्रचार करते हैं। लेकिन यह सब उनकी मजबूरी है, उनकी कमज़ोरी की निशानी है, क्योंकि सच्ची ताक़त तो अल्लाह और उसके ईमानवाले बंदों के साथ है।

और अगर वे कभी तुमसे जंग करने की जुर्रत भी करें, तो अल्लाह का वादा है कि वे मैदान-ए-जंग से भाग खड़े होंगे, पीठ दिखाकर मैदान छोड़ देंगे। उन्हें कभी भी तुम पर ग़लबा नहीं मिलेगा, और न ही अल्लाह की तरफ़ से उन्हें कोई मदद पहुँचेगी। यह अल्लाह का क़ानून है जो उसने अपने नबी और ईमानवालों के हक़ में लिख दिया है।

याद रखो कि यह सिर्फ़ एक ऐतिहासिक घटना का ज़िक्र नहीं, बल्कि हर ज़माने के मुसलमानों के लिए एक बशारत (खुशख़बरी) और तसल्ली है। जब भी दुश्मन तुम्हें डराने की कोशिश करें, जब भी वे तुम्हारे दिलों में ख़ौफ़ डालने की साज़िश करें, तो याद करो कि अल्लाह ने अपने बंदों से वादा किया है—सच्चाई और ईमान हमेशा बुलंद रहेगा। तुम्हारा नुक़सान करने की उनकी तमाम कोशिशें उनकी अपनी ज़िल्लत का सबब बनेंगी।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि ईमानवालों को कभी दुश्मनों की धमकियों से डरना नहीं चाहिए। उनकी ज़ुबानी हरकतों से दिल पर असर न होने दें, क्योंकि असली फ़तह अल्लाह की तरफ़ से है। और जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, अल्लाह उनके लिए काफ़ी है। यही वह ताक़त है जो मुसलमानों को हर दौर में बुलंदियों पर ले गई—जब उन्होंने अल्लाह के वादे पर पूरा यक़ीन रखा और सब्र के साथ डटे रहे।



📜 आयत 109-113 — आल-इमरान

109وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा ही का है और (आख़िर) सब कामों की रूज़ु ख़ुदा ही की तरफ़ है
110كُنتُمْ خَيْرَ أُمَّةٍ أُخْرِجَتْ لِلنَّاسِ تَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَتَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنكَرِ وَتُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ ۗ وَلَوْ آمَنَ أَهْلُ الْكِتَابِ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُم ۚ مِّنْهُمُ الْمُؤْمِنُونَ وَأَكْثَرُهُمُ الْفَاسِقُونَ
तुम क्या अच्छे गिरोह हो कि (लोगों की) हिदायत के वास्ते पैदा किये गए हो तुम (लोगों को) अच्छे काम का हुक्म करते हो और बुरे कामों से रोकते हो और ख़ुदा पर ईमान रखते हो और अगर अहले किताब भी (इसी तरह) ईमान लाते तो उनके हक़ में बहुत अच्छा होता उनमें से कुछ ही तो ईमानदार हैं और अक्सर बदकार
111لَن يَضُرُّوكُمْ إِلَّا أَذًى ۖ وَإِن يُقَاتِلُوكُمْ يُوَلُّوكُمُ الْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ
(मुसलमानों) ये लोग मामूली अज़ीयत के सिवा तुम्हें हरगिज़ ज़रर नहीं पहुंचा सकते और अगर तुमसे लड़ेंगे तो उन्हें तुम्हारी तरफ़ पीठ ही करनी होगी और फिर उनकी कहीं से मदद भी नहीं पहुंचेगी
112ضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ الذِّلَّةُ أَيْنَ مَا ثُقِفُوا إِلَّا بِحَبْلٍ مِّنَ اللَّهِ وَحَبْلٍ مِّنَ النَّاسِ وَبَاءُوا بِغَضَبٍ مِّنَ اللَّهِ وَضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ الْمَسْكَنَةُ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَانُوا يَكْفُرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ وَيَقْتُلُونَ الْأَنبِيَاءَ بِغَيْرِ حَقٍّ ۚ ذَٰلِكَ بِمَا عَصَوا وَّكَانُوا يَعْتَدُونَ
और जहॉ कहीं हत्ते चढ़े उनपर रूसवाई की मार पड़ी मगर ख़ुदा के एहद (या) और लोगों के एहद के ज़रिये से (उनको कहीं पनाह मिल गयी) और फिर हेरफेर के खुदा के गज़ब में पड़ गए और उनपर मोहताजी की मार (अलग) पड़ी ये (क्यों) इस सबब से कि वह ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते थे और पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल करते थे ये सज़ा उसकी है कि उन्होंने नाफ़रमानी की और हद से गुज़र गए थे
113۞ لَيْسُوا سَوَاءً ۗ مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ أُمَّةٌ قَائِمَةٌ يَتْلُونَ آيَاتِ اللَّهِ آنَاءَ اللَّيْلِ وَهُمْ يَسْجُدُونَ
और ये लोग भी सबके सब यकसॉ नहीं हैं (बल्कि) अहले किताब से कुछ लोग तो ऐसे हैं कि (ख़ुदा के दीन पर) इस तरह साबित क़दम हैं कि रातों को ख़ुदा की आयतें पढ़ा करते हैं और वह बराबर सजदे किया करते हैं
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अनुवाद — आल-इमरान 111

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Tuesday, August 18, 2026

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