Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَيْسُوا سَوَاءً: ये सब बराबर नहीं हैं, अर्थात सभी आह्ले-किताब एक जैसे नहीं हैं।
- أُمَّةٌ قَائِمَةٌ: एक सीधी (स्थिर) जमात, जो दीन पर क़ायम है।
- يَتْلُونَ: पढ़ते हैं (तिलावत करते हैं)।
- آنَاءَ اللَّيْلِ: रात के घंटों में (रात की सभी सاعات)।
- يَسْجُدُونَ: सजदा करते हैं, यानी नमाज़ पढ़ते हैं।
तफ़सीर:
ये सारे आह्ले-किताब (यहूदी और ईसाई) एक जैसे नहीं हैं। उनमें से कुछ ऐसे भी हैं जो सीधे रास्ते पर हैं, अल्लाह के दीन पर क़ायम हैं, और उसके आदेशों का पालन करते हैं। ये लोग रात के घंटों में अल्लाह की आयतें पढ़ते हैं, उसके कलाम पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं, और सजदे में झुककर अल्लाह की इबादत करते हैं। ये वो लोग थे जो अपने दीन पर सच्चे दिल से क़ायम थे, और जब उन्हें नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पैग़म्बरी की ख़बर मिली, तो उन्होंने ईमान लाकर इस्लाम क़बूल कर लिया। उनमें अब्दुल्लाह बिन सलाम (रज़ियल्लाहु अन्हु) और उनके साथी जैसे लोग शामिल थे, जिन्होंने सच्चाई को पहचाना और उस पर अमल किया। ये वो लोग हैं जो अल्लाह की रात की इबादत, तिलावत और सजदों की वजह से दूसरों से अलग और बेहतर हैं।
फ़ायदे:
- ये आयत हमें सिखाती है कि किसी भी क़ौम या गिरोह के सभी लोग एक जैसे नहीं होते; हर गिरोह में नेक और बुरे लोग होते हैं। इसलिए हमें किसी भी गिरोह के बारे में सामान्यीकरण (generalization) नहीं करना चाहिए, बल्कि हर इंसान का मूल्यांकन उसके अमल और ईमान के आधार पर करना चाहिए।
- रात की इबादत और तिलावत-ए-क़ुरआन की बहुत बड़ी फ़ज़ीलत है। रात के सन्नाटे में अल्लाह से जुड़ना, उसकी आयतें पढ़ना और नमाज़ पढ़ना दिल को सुकून देता है और ईमान को मज़बूत करता है।
- सच्चाई को क़बूल करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। जिन आह्ले-किताब ने सच्चाई पहचानी, उन्होंने फ़ौरन ईस्लाम क़बूल किया और अल्लाह ने उनकी तारीफ़ की। ये हमारे लिए सबक़ है कि हक़ (सच्चाई) को मानने में देर न करें।
- ये आयत हमें ये भी सिखाती है कि अल्लाह के हुक्म पर क़ायम रहना और उसकी इबादत में मशग़ूल रहना ही असली कामयाबी है, चाहे इंसान किसी भी क़ौम या मज़हब से ताल्लुक़ रखता हो।
📜 आयत 111-115 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 113
सूरा आल-इमरान आयत 113 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये लोग भी सबके सब यकसॉ नहीं हैं (बल्कि)…सूरा आयत 113/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 111–115. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


