Laisoo sawaaa`a; min Ahlil Kitaabi ummatun qaaa`imatuny yatloona Aayaatil laahi aanaaa`al laili wa hum yasjudoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग भी सबके सब यकसॉ नहीं हैं (बल्कि) अहले किताब से कुछ लोग तो ऐसे हैं कि (ख़ुदा के दीन पर) इस तरह साबित क़दम हैं कि रातों को ख़ुदा की आयतें पढ़ा करते हैं और वह बराबर सजदे किया करते हैं
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
یہ بھی سب ایک جیسے نہیں ہیں ان اہلِ کتاب میں کچھ لوگ (حکمِ خدا پر) قائم بھی ہیں جو رات کے وقت خدا کی آیتیں پڑھتے اور (اس کے آگے) سجدہ کرتے ہیں
لَيْسُوا سَوَاءً: ये सब बराबर नहीं हैं, अर्थात सभी आह्ले-किताब एक जैसे नहीं हैं।
أُمَّةٌ قَائِمَةٌ: एक सीधी (स्थिर) जमात, जो दीन पर क़ायम है।
يَتْلُونَ: पढ़ते हैं (तिलावत करते हैं)।
آنَاءَ اللَّيْلِ: रात के घंटों में (रात की सभी सاعات)।
يَسْجُدُونَ: सजदा करते हैं, यानी नमाज़ पढ़ते हैं।
तफ़सीर:
ये सारे आह्ले-किताब (यहूदी और ईसाई) एक जैसे नहीं हैं। उनमें से कुछ ऐसे भी हैं जो सीधे रास्ते पर हैं, अल्लाह के दीन पर क़ायम हैं, और उसके आदेशों का पालन करते हैं। ये लोग रात के घंटों में अल्लाह की आयतें पढ़ते हैं, उसके कलाम पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं, और सजदे में झुककर अल्लाह की इबादत करते हैं। ये वो लोग थे जो अपने दीन पर सच्चे दिल से क़ायम थे, और जब उन्हें नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पैग़म्बरी की ख़बर मिली, तो उन्होंने ईमान लाकर इस्लाम क़बूल कर लिया। उनमें अब्दुल्लाह बिन सलाम (रज़ियल्लाहु अन्हु) और उनके साथी जैसे लोग शामिल थे, जिन्होंने सच्चाई को पहचाना और उस पर अमल किया। ये वो लोग हैं जो अल्लाह की रात की इबादत, तिलावत और सजदों की वजह से दूसरों से अलग और बेहतर हैं।
फ़ायदे:
ये आयत हमें सिखाती है कि किसी भी क़ौम या गिरोह के सभी लोग एक जैसे नहीं होते; हर गिरोह में नेक और बुरे लोग होते हैं। इसलिए हमें किसी भी गिरोह के बारे में सामान्यीकरण (generalization) नहीं करना चाहिए, बल्कि हर इंसान का मूल्यांकन उसके अमल और ईमान के आधार पर करना चाहिए।
रात की इबादत और तिलावत-ए-क़ुरआन की बहुत बड़ी फ़ज़ीलत है। रात के सन्नाटे में अल्लाह से जुड़ना, उसकी आयतें पढ़ना और नमाज़ पढ़ना दिल को सुकून देता है और ईमान को मज़बूत करता है।
सच्चाई को क़बूल करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। जिन आह्ले-किताब ने सच्चाई पहचानी, उन्होंने फ़ौरन ईस्लाम क़बूल किया और अल्लाह ने उनकी तारीफ़ की। ये हमारे लिए सबक़ है कि हक़ (सच्चाई) को मानने में देर न करें।
ये आयत हमें ये भी सिखाती है कि अल्लाह के हुक्म पर क़ायम रहना और उसकी इबादत में मशग़ूल रहना ही असली कामयाबी है, चाहे इंसान किसी भी क़ौम या मज़हब से ताल्लुक़ रखता हो।
और ये लोग भी सबके सब यकसॉ नहीं हैं (बल्कि) अहले किताब से कुछ लोग तो ऐसे हैं कि (ख़ुदा के दीन पर) इस तरह साबित क़दम हैं कि रातों को ख़ुदा की आयतें पढ़ा करते हैं और वह बराबर सजदे किया करते हैं
(मुसलमानों) ये लोग मामूली अज़ीयत के सिवा तुम्हें हरगिज़ ज़रर नहीं पहुंचा सकते और अगर तुमसे लड़ेंगे तो उन्हें तुम्हारी तरफ़ पीठ ही करनी होगी और फिर उनकी कहीं से मदद भी नहीं पहुंचेगी
और जहॉ कहीं हत्ते चढ़े उनपर रूसवाई की मार पड़ी मगर ख़ुदा के एहद (या) और लोगों के एहद के ज़रिये से (उनको कहीं पनाह मिल गयी) और फिर हेरफेर के खुदा के गज़ब में पड़ गए और उनपर मोहताजी की मार (अलग) पड़ी ये (क्यों) इस सबब से कि वह ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते थे और पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल करते थे ये सज़ा उसकी है कि उन्होंने नाफ़रमानी की और हद से गुज़र गए थे
और ये लोग भी सबके सब यकसॉ नहीं हैं (बल्कि) अहले किताब से कुछ लोग तो ऐसे हैं कि (ख़ुदा के दीन पर) इस तरह साबित क़दम हैं कि रातों को ख़ुदा की आयतें पढ़ा करते हैं और वह बराबर सजदे किया करते हैं
खुदा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम का तो हुक्म करते हैं और बुरे कामों से रोकते हैं और नेक कामों में दौड़ पड़ते हैं और यही लोग तो नेक बन्दों से हैं
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।