अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- غَشِيَهُم (उन्हें ढक लिया / घेर लिया)
- كَالظُّلَلِ (बादलों के समान, अर्थात बहुत ऊँची और विशाल लहरें)
- مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ (केवल अल्लाह को पुकारते हुए, उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराते)
- مُقْتَصِدٌ (मध्यमार्गी, अर्थात जो अपने वादे पर पूरा नहीं उतरता, न शुक्र अदा करता है न इनकार)
- خَتَّارٍ (बहुत अधिक धोखा देने वाला, वचन तोड़ने वाला)
- كَفُورٍ (अत्यधिक कृतघ्न, अल्लाह की नेमतों का इनकार करने वाला)
तफसीर:
जब ये मुशरिकीन समुद्र में सफर करते हैं और उन पर पहाड़ों जैसी ऊँची और बादलों की तरह छा जाने वाली विशाल लहरें चारों ओर से हमला करती हैं, और उन्हें डूबने का भय सताता है, तो उस वक्त उनकी सारी कृत्रिम मान्यताएँ और झूठे देवता उनके दिलों से गायब हो जाते हैं। वे अपनी पूरी निष्ठा और एकाग्रता के साथ केवल अल्लाह को पुकारते हैं, उसी से मदद माँगते हैं, और उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराते। वे उस समय सच्चे दिल से अल्लाह से वादा करते हैं कि अगर हमें बचा लिया तो हम सच्चे मुसलमान बन जाएँगे।
लेकिन जब अल्लाह अपनी रहमत से उन्हें सुरक्षित किनारे तक पहुँचा देता है और उन्हें डूबने से बचा लेता है, तो उनमें से कुछ तो मध्यमार्गी होते हैं — यानी वे अपने वादे पर पूरी तरह खरे नहीं उतरते, न तो पूरी तरह शुक्र अदा करते हैं और न ही पूरी तरह इनकार करते हैं। और कुछ तो अल्लाह की नेमत को भूलकर उसका इनकार करने लगते हैं, और अपनी पुरानी शिर्क की स्थिति में लौट जाते हैं।
अल्लाह तआला फरमाता है कि हमारी आयतों और निशानियों को — जो हमारी कुदरत और वहदानियत पर स्पष्ट प्रमाण हैं — केवल वही इनकार करता है जो बहुत अधिक धोखेबाज़ हो, वचन तोड़ने वाला हो, और अल्लाह की नेमतों का अत्यधिक कृतघ्न हो। ऐसा व्यक्ति जब संकट में होता है तो अल्लाह को पुकारता है, और जब सुरक्षित हो जाता है तो उसे भूल जाता है — यह सबसे बड़ा धोखा और कृतघ्नता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान की फितरत यह है कि वह मुसीबत में अल्लाह को याद करता है, लेकिन सच्चा मोमिन वही है जो आराम और सुख-चैन में भी अल्लाह को याद रखे और उसका शुक्र अदा करे। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह उन्हें मुसीबतों से बचाता है, उनकी दुआएँ सुनता है, और उन्हें नेमतें देता है। हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह के शुक्रगुज़ार रहें, उसकी नेमतों को पहचानें, और अपने वादों पर खरे उतरें। जो व्यक्ति अल्लाह से सच्चा रिश्ता जोड़ता है, अल्लाह उसे हर मुसीबत से निकालने का रास्ता दिखाता है और उसे सफलता प्रदान करता है।
📜 आयत 30-34 — लुकमान
अनुवाद — लुकमान 32
सूरा लुकमान आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब उन्हें मौज (ऊँची होकर) साएबानों की तरह (ऊपर…सूरा आयत 32/34 — लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: लुकमान सुनें, लुकमान अनुवाद, लुकमान mp3, लुकमान pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








