लुकमान · 33/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمْ وَاخْشَوْا يَوْمًا لَّا يَجْزِي وَالِدٌ عَن وَلَدِهِ وَلَا مَوْلُودٌ هُوَ جَازٍ عَن وَالِدِهِ شَيْئًا ۚ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّهِ الْغَرُورُ ۝٣٣
Yaaa ayyuhan naasuttaqoo Rabbakum wakhshaw Yawmal laa yajzee waalidun `anw waladihee wa laa mawloodun huwa jaazin `anw waalidihee shai`aa; innaa wa`dal laahi haqqun falaa taghurran nakumul hayaatud dunyaa wa laa yaghur rannakum billaahil gharoon
📖 हिंदी अर्थ
लोगों अपने परवरदिगार से डरो और उस दिन का ख़ौफ रखो जब न कोई बाप अपने बेटे के काम आएगा और न कोई बेटा अपने बाप के कुछ काम आ सकेगा ख़ुदा का (क़यामत का) वायदा बिल्कुल पक्का है तो (कहीं) तुम लोगों को दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी धोखे में न डाले और न कहीं तुम्हें फरेब देने वाला (शैतान) कुछ फ़रेब दे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اتَّقُوا: अल्लाह का भय रखते हुए उसके आदेशों का पालन करना और उसकी मनाही से बचना।
  • وَاخْشَوْا: डरो, भयभीत होना।
  • لَا يَجْزِي: कोई बदला नहीं दे सकेगा, किसी की ओर से कुछ भी क्षतिपूर्ति नहीं कर सकेगा।
  • الْغَرُور: धोखा देने वाला, विशेष रूप से शैतान जो झूठी आशाएँ दिलाता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! अपने रब का भय रखो और उस दिन से डरो जिस दिन कोई बाप अपने बेटे के काम न आ सकेगा, और न कोई बेटा अपने बाप के किसी काम आ सकेगा। उस दिन हर व्यक्ति अपने ही कर्मों में व्यस्त होगा, और किसी को किसी की मदद का अवसर नहीं मिलेगा। यह एक ऐसा दिन है जब रिश्तेदारी, दोस्ती और सांसारिक संबंधों का कोई मोल नहीं होगा। हर इंसान अपने किए गए अच्छे या बुरे कर्मों का अकेले सामना करेगा।

अल्लाह का वादा पूर्ण रूप से सत्य है, इसमें कोई संदेह नहीं। क़यामत का दिन अवश्य आएगा, और हर व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा बदला मिलेगा। यह कोई कल्पना या मिथक नहीं, बल्कि एक अटल सत्य है जिसे अल्लाह ने अपनी किताब में स्पष्ट कर दिया है।

इसलिए सावधान हो जाओ! यह सांसारिक जीवन अपनी चमक-दमक, सुख-सुविधाओं और अस्थायी आनंद से तुम्हें धोखे में न डाल दे। यह दुनिया अपने खिलौनों और मोह-माया के जाल से तुम्हें अल्लाह की याद से गाफिल न कर दे। और न ही वह धोखेबाज़ (शैतान) तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखा दे — यानी वह तुम्हें यह न समझाए कि अल्लाह बड़ा क्षमाशील है, तुम जो चाहो करो, अल्लाह तो माफ कर देगा। यह शैतान की सबसे बड़ी चाल है कि वह इंसान को पाप करने पर उकसाता है और उसे अल्लाह की क्षमा का झूठा भरोसा दिलाता है।

याद रखो, अल्लाह की क्षमा उनके लिए है जो सच्चे दिल से तौबा करें, अपने गुनाहों से बाज़ आएं और अच्छे कर्म करें। लेकिन जो व्यक्ति जानबूझकर पाप करता रहे और यह सोचे कि अल्लाह तो माफ कर देगा, यह शैतानी धोखे में पड़ना है। अल्लाह न्यायपूर्ण है, और उसका वादा सत्य है — अच्छाई का बदला अच्छाई और बुराई का बदला बुराई से मिलेगा।

इसलिए आज ही अपने जीवन को सुधार लो, अल्लाह के आदेशों का पालन करो, उसकी मनाही से बचो, और उस दिन के लिए तैयारी करो जब कोई किसी की मदद नहीं कर सकेगा। यही सच्ची सफलता का मार्ग है, और यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सभी को सीधे मार्ग पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 31-34 — लुकमान

31أَلَمْ تَرَ أَنَّ الْفُلْكَ تَجْرِي فِي الْبَحْرِ بِنِعْمَتِ اللَّهِ لِيُرِيَكُم مِّنْ آيَاتِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
क्या तूने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ही के फज़ल से कश्ती दरिया में बहती चलती रहती है ताकि (लकड़ी में ये क़ूवत देकर) तुम लोगों को अपनी (कुदरत की) बाज़ निशानियाँ दिखा दे बेशक उस में भी तमाम सब्र व शुक्र करने वाले (बन्दों) के लिए (कुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ दिखा दे बेशक इसमें भी तमाम सब्र व शुक्र करने वाले (बन्दों) के लिए (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
32وَإِذَا غَشِيَهُم مَّوْجٌ كَالظُّلَلِ دَعَوُا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ فَلَمَّا نَجَّاهُمْ إِلَى الْبَرِّ فَمِنْهُم مُّقْتَصِدٌ ۚ وَمَا يَجْحَدُ بِآيَاتِنَا إِلَّا كُلُّ خَتَّارٍ كَفُورٍ
और जब उन्हें मौज (ऊँची होकर) साएबानों की तरह (ऊपर से) ढॉक लेती है तो निरा खुरा उसी का अक़ीदा रखकर ख़ुदा को पुकारने लगते हैं फिर जब ख़ुदा उनको नजात देकर खुश्की तक पहुँचा देता है तो उनमें से बाज़ तो कुछ देर एतदाल पर रहते हैं (और बाज़ पक्के काफिर) और हमारी (क़ुदरत की) निशानियों से इन्कार तो बस बदएहद और नाशुक्रे ही लोग करते हैं
33يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمْ وَاخْشَوْا يَوْمًا لَّا يَجْزِي وَالِدٌ عَن وَلَدِهِ وَلَا مَوْلُودٌ هُوَ جَازٍ عَن وَالِدِهِ شَيْئًا ۚ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّهِ الْغَرُورُ
लोगों अपने परवरदिगार से डरो और उस दिन का ख़ौफ रखो जब न कोई बाप अपने बेटे के काम आएगा और न कोई बेटा अपने बाप के कुछ काम आ सकेगा ख़ुदा का (क़यामत का) वायदा बिल्कुल पक्का है तो (कहीं) तुम लोगों को दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी धोखे में न डाले और न कहीं तुम्हें फरेब देने वाला (शैतान) कुछ फ़रेब दे
34إِنَّ اللَّهَ عِندَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ ۖ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَّاذَا تَكْسِبُ غَدًا ۖ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ
बेशक ख़ुदा ही के पास क़यामत (के आने) का इल्म है और वही (जब मौक़ा मुनासिब देखता है) पानी बरसाता है और जो कुछ औरतों के पेट में (नर मादा) है जानता है और कोई शख्स (इतना भी तो) नहीं जानता कि वह ख़़ुद कल क्या करेगा और कोई शख्स ये (भी) नहीं जानता है कि वह किस सर ज़मीन पर मरे (गड़े) गा बेशक ख़ुदा (सब बातों से) आगाह ख़बरदार है
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अनुवाद — लुकमान 33

सूरा लुकमान आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : लोगों अपने परवरदिगार से डरो और उस दिन का ख़ौफ…

सूरा आयत 33/34 — लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: लुकमान सुनें, लुकमान अनुवाद, लुकमान mp3, लुकमान pdf. आयत 31–34. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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