लुकमान · 31/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
أَلَمْ تَرَ أَنَّ الْفُلْكَ تَجْرِي فِي الْبَحْرِ بِنِعْمَتِ اللَّهِ لِيُرِيَكُم مِّنْ آيَاتِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ ۝٣١
Alam tara annal fulka tajree fil bahri bini`matil laahi li yuriyakum min Aayaatih; inna fee zaalika la Aayaatil likulli sabbaarin shakoor
📖 हिंदी अर्थ
क्या तूने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ही के फज़ल से कश्ती दरिया में बहती चलती रहती है ताकि (लकड़ी में ये क़ूवत देकर) तुम लोगों को अपनी (कुदरत की) बाज़ निशानियाँ दिखा दे बेशक उस में भी तमाम सब्र व शुक्र करने वाले (बन्दों) के लिए (कुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ दिखा दे बेशक इसमें भी तमाम सब्र व शुक्र करने वाले (बन्दों) के लिए (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الفُلْك – जहाज़ (समुद्री जहाज़)
  • بِنِعْمَتِ اللَّهِ – अल्लाह की कृपा और उसकी तरफ़ से सुगमता से
  • لِيُرِيَكُم – ताकि वह तुम्हें दिखाए
  • آيَاتِهِ – अपनी निशानियाँ और अपनी क़ुदरत के प्रमाण
  • صَبَّارٍ – बहुत सब्र करने वाला (धैर्यवान)
  • شَكُورٍ – बहुत शुक्र अदा करने वाला (कृतज्ञ)

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नज़र रखने वाले इंसान! क्या तूने कभी ग़ौर नहीं किया कि समुद्र में बड़ी-बड़ी जहाज़ें किस तरह चलती हैं? यह जहाज़ें अपने आप नहीं चलतीं, बल्कि अल्लाह की कृपा और उसकी दया से चलती हैं। उसने पानी को इस तरह बनाया है कि वह जहाज़ों को उठा लेता है, हवा को इस तरह बनाया है कि वह उन्हें आगे बढ़ाती है, और इंसान को वह तरक़ीबें सिखाईं जिनसे वह इन जहाज़ों को बना सके। यह सब कुछ अल्लाह की ओर से एक बड़ा एहसान है।

अल्लाह यह सब इसलिए करता है ताकि तुम्हें अपनी क़ुदरत की निशानियाँ दिखाए — कि वही इस कायनात का मालिक है, वही चीज़ों को गति देता है, और वही हर चीज़ पर क़ादिर है। जब तुम जहाज़ को समुद्र की लहरों के बीच चलते देखते हो, तो यह अल्लाह की उस ताक़त का जीता-जागता सबूत है जो पानी और हवा जैसी चीज़ों को इंसान के काम में लगा देती है।

बेशक इस घटना में — यानी जहाज़ों का समुद्र में चलना — उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं जो सब्र करने वाले और शुक्र अदा करने वाले हैं। यानी जो मुसीबत के वक़्त सब्र करते हैं, अल्लाह के हुक्म पर डटे रहते हैं, और जब नेमतें मिलती हैं तो अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं। ऐसे लोग ही इन निशानियों से सबक़ लेते हैं और अपने रब की तरफ़ बढ़ते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करना इबादत है। जब हम समुद्र में जहाज़ देखते हैं, हवाई जहाज़ देखते हैं, या अपनी ज़िंदगी की छोटी-बड़ी सुविधाओं को देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह सब अल्लाह का फ़ज़ल है। यह नेमतें हमें उसकी तरफ़ ले जाने का ज़रिया बननी चाहिए। जो इंसान सब्र और शुक्र के साथ जीता है, वही असल में कामयाब है। सब्र उसे मुसीबतों में मज़बूत रखता है और शुक्र उसे नेमतों में अल्लाह का करीब कर देता है। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 29-33 — लुकमान

29أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ كُلٌّ يَجْرِي إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى وَأَنَّ اللَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
क्या तूने ये भी ख्याल न किया कि ख़ुदा ही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल कर देता है (तो रात बढ़ जाती है) और दिन को (बढ़ा के) रात में दाख़िल कर देता है (तो दिन बढ़ जाता है) उसी ने आफताब व माहताब को (गोया) तुम्हारा ताबेए बना दिया है कि एक मुक़र्रर मीयाद तक (यूँ ही) चलता रहेगा और (क्या तूने ये भी ख्याल न किया कि) जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़ूब वाकिफकार है
30ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ هُوَ الْحَقُّ وَأَنَّ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِ الْبَاطِلُ وَأَنَّ اللَّهَ هُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ
ये (सब बातें) इस सबब से हैं कि ख़ुदा ही यक़ीनी बरहक़ (माबूद) है और उस के सिवा जिसको लोग पुकारते हैं यक़ीनी बिल्कुल बातिल और इसमें शक नहीं कि ख़ुदा ही आलीशान और बड़ा रुतबे वाला है
31أَلَمْ تَرَ أَنَّ الْفُلْكَ تَجْرِي فِي الْبَحْرِ بِنِعْمَتِ اللَّهِ لِيُرِيَكُم مِّنْ آيَاتِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
क्या तूने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ही के फज़ल से कश्ती दरिया में बहती चलती रहती है ताकि (लकड़ी में ये क़ूवत देकर) तुम लोगों को अपनी (कुदरत की) बाज़ निशानियाँ दिखा दे बेशक उस में भी तमाम सब्र व शुक्र करने वाले (बन्दों) के लिए (कुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ दिखा दे बेशक इसमें भी तमाम सब्र व शुक्र करने वाले (बन्दों) के लिए (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
32وَإِذَا غَشِيَهُم مَّوْجٌ كَالظُّلَلِ دَعَوُا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ فَلَمَّا نَجَّاهُمْ إِلَى الْبَرِّ فَمِنْهُم مُّقْتَصِدٌ ۚ وَمَا يَجْحَدُ بِآيَاتِنَا إِلَّا كُلُّ خَتَّارٍ كَفُورٍ
और जब उन्हें मौज (ऊँची होकर) साएबानों की तरह (ऊपर से) ढॉक लेती है तो निरा खुरा उसी का अक़ीदा रखकर ख़ुदा को पुकारने लगते हैं फिर जब ख़ुदा उनको नजात देकर खुश्की तक पहुँचा देता है तो उनमें से बाज़ तो कुछ देर एतदाल पर रहते हैं (और बाज़ पक्के काफिर) और हमारी (क़ुदरत की) निशानियों से इन्कार तो बस बदएहद और नाशुक्रे ही लोग करते हैं
33يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمْ وَاخْشَوْا يَوْمًا لَّا يَجْزِي وَالِدٌ عَن وَلَدِهِ وَلَا مَوْلُودٌ هُوَ جَازٍ عَن وَالِدِهِ شَيْئًا ۚ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّهِ الْغَرُورُ
लोगों अपने परवरदिगार से डरो और उस दिन का ख़ौफ रखो जब न कोई बाप अपने बेटे के काम आएगा और न कोई बेटा अपने बाप के कुछ काम आ सकेगा ख़ुदा का (क़यामत का) वायदा बिल्कुल पक्का है तो (कहीं) तुम लोगों को दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी धोखे में न डाले और न कहीं तुम्हें फरेब देने वाला (शैतान) कुछ फ़रेब दे
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अनुवाद — लुकमान 31

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Tuesday, August 18, 2026

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