Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الفُلْك – जहाज़ (समुद्री जहाज़)
- بِنِعْمَتِ اللَّهِ – अल्लाह की कृपा और उसकी तरफ़ से सुगमता से
- لِيُرِيَكُم – ताकि वह तुम्हें दिखाए
- آيَاتِهِ – अपनी निशानियाँ और अपनी क़ुदरत के प्रमाण
- صَبَّارٍ – बहुत सब्र करने वाला (धैर्यवान)
- شَكُورٍ – बहुत शुक्र अदा करने वाला (कृतज्ञ)
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नज़र रखने वाले इंसान! क्या तूने कभी ग़ौर नहीं किया कि समुद्र में बड़ी-बड़ी जहाज़ें किस तरह चलती हैं? यह जहाज़ें अपने आप नहीं चलतीं, बल्कि अल्लाह की कृपा और उसकी दया से चलती हैं। उसने पानी को इस तरह बनाया है कि वह जहाज़ों को उठा लेता है, हवा को इस तरह बनाया है कि वह उन्हें आगे बढ़ाती है, और इंसान को वह तरक़ीबें सिखाईं जिनसे वह इन जहाज़ों को बना सके। यह सब कुछ अल्लाह की ओर से एक बड़ा एहसान है।
अल्लाह यह सब इसलिए करता है ताकि तुम्हें अपनी क़ुदरत की निशानियाँ दिखाए — कि वही इस कायनात का मालिक है, वही चीज़ों को गति देता है, और वही हर चीज़ पर क़ादिर है। जब तुम जहाज़ को समुद्र की लहरों के बीच चलते देखते हो, तो यह अल्लाह की उस ताक़त का जीता-जागता सबूत है जो पानी और हवा जैसी चीज़ों को इंसान के काम में लगा देती है।
बेशक इस घटना में — यानी जहाज़ों का समुद्र में चलना — उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं जो सब्र करने वाले और शुक्र अदा करने वाले हैं। यानी जो मुसीबत के वक़्त सब्र करते हैं, अल्लाह के हुक्म पर डटे रहते हैं, और जब नेमतें मिलती हैं तो अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं। ऐसे लोग ही इन निशानियों से सबक़ लेते हैं और अपने रब की तरफ़ बढ़ते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करना इबादत है। जब हम समुद्र में जहाज़ देखते हैं, हवाई जहाज़ देखते हैं, या अपनी ज़िंदगी की छोटी-बड़ी सुविधाओं को देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह सब अल्लाह का फ़ज़ल है। यह नेमतें हमें उसकी तरफ़ ले जाने का ज़रिया बननी चाहिए। जो इंसान सब्र और शुक्र के साथ जीता है, वही असल में कामयाब है। सब्र उसे मुसीबतों में मज़बूत रखता है और शुक्र उसे नेमतों में अल्लाह का करीब कर देता है। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई तक पहुँचाता है।
📜 आयत 29-33 — सूरा लुकमान
अनुवाद — लुकमान 31
सूरा लुकमान आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तूने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा…सूरा आयत 31/34 — सूरा लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा लुकमान सुनें, सूरा लुकमान अनुवाद, सूरा लुकमान mp3, सूरा लुकमान pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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