मुहम्मद · 2/38
अनुवाद उच्चारण — सूरा मुहम्मद
وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَآمَنُوا بِمَا نُزِّلَ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَهُوَ الْحَقُّ مِن رَّبِّهِمْ ۙ كَفَّرَ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَأَصْلَحَ بَالَهُمْ ۝٢
Wallazeena aamanoo wa `amilus saalihaati wa aamanoo bimaa nuzzila `alaa Muhammadinw-wa huwal haqqu mir Rabbihim kaffara `anhum saiyiaatihim wa aslaha baalahum
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए और जो (किताब) मोहम्मद पर उनके परवरदिगार की तरफ से नाज़िल हुई है और वह बरहक़ है उस पर ईमान लाए तो ख़ुदा ने उनके गुनाह उनसे दूर कर दिए और उनकी हालत संवार दी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَفَّرَ عَنْهُمْ: उनके गुनाहों को मिटा दिया, ढक दिया और माफ कर दिया।
  • سَيِّئَاتِهِمْ: उनके बुरे कर्म और पाप।
  • أَصْلَحَ بَالَهُمْ: उनकी हालत और स्थिति को सुधार दिया, उनके दुनिया और आखिरत के मामलों को बेहतर बना दिया।

तफसीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने अल्लाह पर ईमान लाया, उसके हुक्मों पर अमल किया और उस किताब (कुरआन) पर भी ईमान लाए जो हज़रत मुहम्मद ﷺ पर उतारी गई। यह किताब उनके रब की तरफ से आया हुआ सच्चा और हक़ है, जिसमें कोई शक नहीं। अल्लाह तआला ने ऐसे लोगों से वादा किया है कि वह उनके गुनाहों को माफ कर देगा, उन्हें ढक देगा और उन पर उनके बुरे कर्मों की सज़ा नहीं देगा। साथ ही, अल्लाह उनकी हालत को सुधार देगा—दुनिया में भी और आखिरत में भी। यानी अल्लाह उन्हें अच्छी ज़िंदगी देगा, उनके कामों में बरकत डालेगा, उनके दिलों को सुकून देगा और आखिरत में उन्हें जन्नत अता करेगा।

यह आयत उन अंसार (मदीना के मुसलमानों) के बारे में भी है जिन्होंने नबी ﷺ की मदद की और उन्हें पनाह दी, लेकिन यह हुक्म आम है—हर उस मुसलमान के लिए है जो ईमान लाए, नेक अमल करे और कुरआन को सच्चा माने। अल्लाह का वादा है कि वह ऐसे लोगों के पाप मिटा देगा और उनके हालात सुधार देगा।

दावती पहलू:

यह आयत मोमिनों के लिए खुशखबरी है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर इतना मेहरबान है कि अगर वे ईमान लाएँ और नेक काम करें, तो अल्लाह उनके पापों को मिटा देता है और उनकी ज़िंदगी को हर पहलू से बेहतर बना देता है। यह अल्लाह की रहमत की दौलत है। हमें चाहिए कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें, कुरआन को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ और नेक अमल करते रहें। अल्लाह का वादा सच्चा है—जो लोग उस पर भरोसा करेंगे, अल्लाह उन्हें कभी निराश नहीं करेगा। यही सच्ची कामयाबी है कि इंसान के गुनाह माफ हों और उसकी हालत सुधर जाए। हमें इस नेमत की क़द्र करनी चाहिए और अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।



📜 आयत 1-4 — सूरा मुहम्मद

1الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ أَضَلَّ أَعْمَالَهُمْ
जिन लोगों ने कुफ़्र एख्तेयार किया और (लोगों को) ख़ुदा के रास्ते से रोका ख़ुदा ने उनके आमाल अकारत कर दिए
2وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَآمَنُوا بِمَا نُزِّلَ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَهُوَ الْحَقُّ مِن رَّبِّهِمْ ۙ كَفَّرَ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَأَصْلَحَ بَالَهُمْ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए और जो (किताब) मोहम्मद पर उनके परवरदिगार की तरफ से नाज़िल हुई है और वह बरहक़ है उस पर ईमान लाए तो ख़ुदा ने उनके गुनाह उनसे दूर कर दिए और उनकी हालत संवार दी
3ذَٰلِكَ بِأَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا اتَّبَعُوا الْبَاطِلَ وَأَنَّ الَّذِينَ آمَنُوا اتَّبَعُوا الْحَقَّ مِن رَّبِّهِمْ ۚ كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ اللَّهُ لِلنَّاسِ أَمْثَالَهُمْ
ये इस वजह से कि काफिरों ने झूठी बात की पैरवी की और ईमान वालों ने अपने परवरदिगार का सच्चा दीन एख्तेयार किया यूँ ख़ुदा लोगों के समझाने के लिए मिसालें बयान करता है
4فَإِذَا لَقِيتُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا فَضَرْبَ الرِّقَابِ حَتَّىٰ إِذَا أَثْخَنتُمُوهُمْ فَشُدُّوا الْوَثَاقَ فَإِمَّا مَنًّا بَعْدُ وَإِمَّا فِدَاءً حَتَّىٰ تَضَعَ الْحَرْبُ أَوْزَارَهَا ۚ ذَٰلِكَ وَلَوْ يَشَاءُ اللَّهُ لَانتَصَرَ مِنْهُمْ وَلَٰكِن لِّيَبْلُوَ بَعْضَكُم بِبَعْضٍ ۗ وَالَّذِينَ قُتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَلَن يُضِلَّ أَعْمَالَهُمْ
तो जब तुम काफिरों से भिड़ो तो (उनकी) गर्दनें मारो यहाँ तक कि जब तुम उन्हें ज़ख्मों से चूर कर डालो तो उनकी मुश्कें कस लो फिर उसके बाद या तो एहसान रख (कर छोड़ दे) या मुआवेज़ा लेकर, यहाँ तक कि (दुशमन) लड़ाई के हथियार रख दे तो (याद रखो) अगर ख़ुदा चाहता तो (और तरह) उनसे बदला लेता मगर उसने चाहा कि तुम्हारी आज़माइश एक दूसरे से (लड़वा कर) करे और जो लोग ख़ुदा की राह में यहीद किये गए उनकी कारगुज़ारियों को ख़ुदा हरगिज़ अकारत न करेगा
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अनुवाद — मुहम्मद 2

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Monday, September 7, 2026

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