Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- البَاطِل – असत्य, मिथ्या, शैतान का मार्ग
- الحَق – सत्य, सच्चाई, जो अल्लाह की ओर से आया
- يَضْرِبُ اللهُ أَمْثَالَهُمْ – अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान करता है
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस महान सत्य को स्पष्ट करती है जो मनुष्य के जीवन की दिशा तय करता है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो भी भेदभाव, हिदायत या गुमराही तुम देखते हो, उसका मूल कारण यह है कि काफ़िरों ने असत्य का अनुसरण किया — उन्होंने शैतान की राह पकड़ी, अपनी इच्छाओं और झूठे विचारों को अपना इमाम बना लिया। उन्होंने उस सच्चाई को ठुकरा दिया जो उनके पास आई थी।
दूसरी ओर, जो लोग ईमान लाए, उन्होंने उस सत्य का अनुसरण किया जो उनके रब की ओर से आया — यानी क़ुरआन और रसूल ﷺ की शिक्षाएँ। उन्होंने अपने रब की पुकार पर कान दिया और उस नूर को अपना रास्ता बनाया जो अल्लाह ने उतारा।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस तरह उसने इन दोनों समूहों का हाल बयान किया, उसी तरह वह लोगों के लिए उनकी मिसालें पेश करता है — ताकि हर इंसान देख ले कि उसका अंजाम क्या होगा। यह अल्लाह की रहमत है कि वह क़ुरआन में अच्छे और बुरे लोगों की कहानियाँ बयान करता है, ताकि इंसान उनसे सीख ले और अपनी मंज़िल ख़ुद चुन ले।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि इंसान की कामयाबी या नाकामी का राज़ उसके चुनाव में छिपा है। अल्लाह ने हर इंसान को अक़्ल और समझ दी है, और सही रास्ता भी दिखा दिया है। अब फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि हम किसे चुनते हैं — बातिल को या हक़ को? जो लोग हक़ को चुनते हैं, वे कभी नाकाम नहीं होते, चाहे दुनिया में उन्हें कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएँ। और जो बातिल को चुनते हैं, वे कभी कामयाब नहीं होते, चाहे दुनिया में उनके पास कितना भी सामान क्यों न हो।
अल्लाह तआला ने क़ुरआन में हर तरह की मिसालें बयान की हैं ताकि हम उनसे सबक़ लें। यह उसकी महान रहमत है कि उसने हमें अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि हिदायत का रास्ता दिखाया और बताया कि कौन सी राह कहाँ जाती है। हमें चाहिए कि हर दिन अपने आप से पूछें: हम किसका अनुसरण कर रहे हैं — हक़ का या बातिल का? क्योंकि हमारा आने वाला कल इसी चुनाव पर टिका है।
📜 आयत 1-5 — सूरा मुहम्मद
अनुवाद — मुहम्मद 3
सूरा मुहम्मद आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये इस वजह से कि काफिरों ने झूठी बात की…सूरा आयत 3/38 — सूरा मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मुहम्मद सुनें, सूरा मुहम्मद अनुवाद, सूरा मुहम्मद mp3, सूरा मुहम्मद pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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