मुहम्मद · 3/38
अनुवाद उच्चारण — मुहम्मद
ذَٰلِكَ بِأَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا اتَّبَعُوا الْبَاطِلَ وَأَنَّ الَّذِينَ آمَنُوا اتَّبَعُوا الْحَقَّ مِن رَّبِّهِمْ ۚ كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ اللَّهُ لِلنَّاسِ أَمْثَالَهُمْ ۝٣
Zaalika bi annal lazeena kafarut taba`ul baatila wa annal lazeena aamanut taba`ul haqqa mir Rabbihim; kazaalika yadribul laahu linnaasi amsaalahum
📖 हिंदी अर्थ
ये इस वजह से कि काफिरों ने झूठी बात की पैरवी की और ईमान वालों ने अपने परवरदिगार का सच्चा दीन एख्तेयार किया यूँ ख़ुदा लोगों के समझाने के लिए मिसालें बयान करता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • البَاطِل – असत्य, मिथ्या, शैतान का मार्ग
  • الحَق – सत्य, सच्चाई, जो अल्लाह की ओर से आया
  • يَضْرِبُ اللهُ أَمْثَالَهُمْ – अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान करता है

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान सत्य को स्पष्ट करती है जो मनुष्य के जीवन की दिशा तय करता है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो भी भेदभाव, हिदायत या गुमराही तुम देखते हो, उसका मूल कारण यह है कि काफ़िरों ने असत्य का अनुसरण किया — उन्होंने शैतान की राह पकड़ी, अपनी इच्छाओं और झूठे विचारों को अपना इमाम बना लिया। उन्होंने उस सच्चाई को ठुकरा दिया जो उनके पास आई थी।

दूसरी ओर, जो लोग ईमान लाए, उन्होंने उस सत्य का अनुसरण किया जो उनके रब की ओर से आया — यानी क़ुरआन और रसूल ﷺ की शिक्षाएँ। उन्होंने अपने रब की पुकार पर कान दिया और उस नूर को अपना रास्ता बनाया जो अल्लाह ने उतारा।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस तरह उसने इन दोनों समूहों का हाल बयान किया, उसी तरह वह लोगों के लिए उनकी मिसालें पेश करता है — ताकि हर इंसान देख ले कि उसका अंजाम क्या होगा। यह अल्लाह की रहमत है कि वह क़ुरआन में अच्छे और बुरे लोगों की कहानियाँ बयान करता है, ताकि इंसान उनसे सीख ले और अपनी मंज़िल ख़ुद चुन ले।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि इंसान की कामयाबी या नाकामी का राज़ उसके चुनाव में छिपा है। अल्लाह ने हर इंसान को अक़्ल और समझ दी है, और सही रास्ता भी दिखा दिया है। अब फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि हम किसे चुनते हैं — बातिल को या हक़ को? जो लोग हक़ को चुनते हैं, वे कभी नाकाम नहीं होते, चाहे दुनिया में उन्हें कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएँ। और जो बातिल को चुनते हैं, वे कभी कामयाब नहीं होते, चाहे दुनिया में उनके पास कितना भी सामान क्यों न हो।

अल्लाह तआला ने क़ुरआन में हर तरह की मिसालें बयान की हैं ताकि हम उनसे सबक़ लें। यह उसकी महान रहमत है कि उसने हमें अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि हिदायत का रास्ता दिखाया और बताया कि कौन सी राह कहाँ जाती है। हमें चाहिए कि हर दिन अपने आप से पूछें: हम किसका अनुसरण कर रहे हैं — हक़ का या बातिल का? क्योंकि हमारा आने वाला कल इसी चुनाव पर टिका है।



📜 आयत 1-5 — मुहम्मद

1الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ أَضَلَّ أَعْمَالَهُمْ
जिन लोगों ने कुफ़्र एख्तेयार किया और (लोगों को) ख़ुदा के रास्ते से रोका ख़ुदा ने उनके आमाल अकारत कर दिए
2وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَآمَنُوا بِمَا نُزِّلَ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَهُوَ الْحَقُّ مِن رَّبِّهِمْ ۙ كَفَّرَ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَأَصْلَحَ بَالَهُمْ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए और जो (किताब) मोहम्मद पर उनके परवरदिगार की तरफ से नाज़िल हुई है और वह बरहक़ है उस पर ईमान लाए तो ख़ुदा ने उनके गुनाह उनसे दूर कर दिए और उनकी हालत संवार दी
3ذَٰلِكَ بِأَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا اتَّبَعُوا الْبَاطِلَ وَأَنَّ الَّذِينَ آمَنُوا اتَّبَعُوا الْحَقَّ مِن رَّبِّهِمْ ۚ كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ اللَّهُ لِلنَّاسِ أَمْثَالَهُمْ
ये इस वजह से कि काफिरों ने झूठी बात की पैरवी की और ईमान वालों ने अपने परवरदिगार का सच्चा दीन एख्तेयार किया यूँ ख़ुदा लोगों के समझाने के लिए मिसालें बयान करता है
4فَإِذَا لَقِيتُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا فَضَرْبَ الرِّقَابِ حَتَّىٰ إِذَا أَثْخَنتُمُوهُمْ فَشُدُّوا الْوَثَاقَ فَإِمَّا مَنًّا بَعْدُ وَإِمَّا فِدَاءً حَتَّىٰ تَضَعَ الْحَرْبُ أَوْزَارَهَا ۚ ذَٰلِكَ وَلَوْ يَشَاءُ اللَّهُ لَانتَصَرَ مِنْهُمْ وَلَٰكِن لِّيَبْلُوَ بَعْضَكُم بِبَعْضٍ ۗ وَالَّذِينَ قُتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَلَن يُضِلَّ أَعْمَالَهُمْ
तो जब तुम काफिरों से भिड़ो तो (उनकी) गर्दनें मारो यहाँ तक कि जब तुम उन्हें ज़ख्मों से चूर कर डालो तो उनकी मुश्कें कस लो फिर उसके बाद या तो एहसान रख (कर छोड़ दे) या मुआवेज़ा लेकर, यहाँ तक कि (दुशमन) लड़ाई के हथियार रख दे तो (याद रखो) अगर ख़ुदा चाहता तो (और तरह) उनसे बदला लेता मगर उसने चाहा कि तुम्हारी आज़माइश एक दूसरे से (लड़वा कर) करे और जो लोग ख़ुदा की राह में यहीद किये गए उनकी कारगुज़ारियों को ख़ुदा हरगिज़ अकारत न करेगा
5سَيَهْدِيهِمْ وَيُصْلِحُ بَالَهُمْ
उन्हें अनक़रीब मंज़िले मक़सूद तक पहुँचाएगा
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अनुवाद — मुहम्मद 3

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Tuesday, August 18, 2026

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