अल-फतह · 5/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फतह
لِّيُدْخِلَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَيُكَفِّرَ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عِندَ اللَّهِ فَوْزًا عَظِيمًا ۝٥
Liyudkhilal mu`mineena walmu`minaati jannaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa wa yukaffira `anhum saiyi aatihim; wa kaana zaalika `indal laahi fawzan `azeemaa
📖 हिंदी अर्थ
ताकि मोमिन मर्द और मोमिना औरतों को (बेहिश्त) के बाग़ों में जा पहुँचाए जिनके नीचे नहरें जारी हैं और ये वहाँ हमेशा रहेंगे और उनके गुनाहों को उनसे दूर कर दे और ये ख़ुदा के नज़दीक बड़ी कामयाबी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • जन्नात – बाग़, स्वर्ग के उद्यान
  • तज्री मिन तह्तिहल अन्हार – जिनके नीचे नहरें बहती हों
  • ख़ालिदीन – हमेशा रहने वाले
  • युकफ्फिर – मिटा देना, ढक देना
  • सय्यिआत – बुराइयाँ, गुनाह
  • फ़ौज़न अज़ीमन – बड़ी कामयाबी, महान सफलता

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने यह आयत मुक़द्दस फ़तह (सुलह हुदैबिया) के सिलसिले में नाज़िल फ़रमाई, जो दरअस्ल मुसलमानों के लिए एक ज़ाहिरी फ़तह से भी बड़ी नेमत का ज़रिया बनी। इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह फ़तह और यह सब कुछ इसलिए हुआ ताकि अल्लाह अपने ईमान लाने वाले मर्दों और औरतों को ऐसी जन्नतों में दाख़िल करे जिनके नीचे नहरें बहती हैं, और वे उनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। यह वह जगह है जहाँ न कोई दर्द होगा, न कोई ग़म, न कोई थकान — सिर्फ़ सुकून, खुशी और अल्लाह की रज़ा का इज़हार होगा।

साथ ही अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह उनके गुनाहों को मिटा देगा और उन्हें ढक देगा। यानी जो क़ुसूर और ख़ताएँ उनसे सरज़द हुईं, अल्लाह उन्हें माफ़ फ़रमा देगा और उन पर उन्हें पकड़ेगा नहीं। यह अल्लाह का बेइंतिहा करम है कि वह न सिर्फ़ जन्नत अता करता है, बल्कि गुनाहों से भी पाक कर देता है।

और फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और यह अल्लाह के नज़दीक बड़ी कामयाबी है।" यानी जन्नत में दाख़िला और गुनाहों की माफ़ी — यह दोनों चीज़ें मिलकर वह महान सफलता हैं जिससे बड़ी कोई कामयाबी नहीं। क्योंकि इसमें इंसान को वह सब कुछ मिल जाता है जो वह चाहता है (जन्नत) और वह सब कुछ दूर हो जाता है जिससे वह डरता है (अज़ाब और गुनाहों की पकड़)।


दावती पहलू:

यह आयत हर मोमिन के दिल में उम्मीद और खुशी का पैग़ाम भरती है। अल्लाह तआला ने जन्नत का वादा सिर्फ़ ख़ास लोगों से नहीं किया, बल्कि हर ईमान लाने वाले मर्द और औरत से किया है। चाहे आपका गुनाह कितना भी बड़ा हो, अल्लाह की रहमत उससे कहीं बड़ी है — वह माफ़ करने वाला है, ढकने वाला है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में की गई छोटी सी क़ुर्बानी, सब्र और ईमान — कभी ज़ाया नहीं होती। अल्लाह उसका बदला जन्नत और माफ़ी की शक्ल में देता है, जो उसके नज़दीक सबसे बड़ी कामयाबी है।

तो आओ, हम अपने ईमान को मज़बूत करें, अल्लाह की राह में कदम बढ़ाएँ, और यक़ीन रखें कि अल्लाह का वादा सच्चा है — वह हमें जन्नत देगा और हमारी ख़ताओं को माफ़ कर देगा। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 3-7 — सूरा अल-फतह

3وَيَنصُرَكَ اللَّهُ نَصْرًا عَزِيزًا
और ख़ुदा तुम्हारी ज़बरदस्त मदद करे
4هُوَ الَّذِي أَنزَلَ السَّكِينَةَ فِي قُلُوبِ الْمُؤْمِنِينَ لِيَزْدَادُوا إِيمَانًا مَّعَ إِيمَانِهِمْ ۗ وَلِلَّهِ جُنُودُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا
वह (वही) ख़ुदा तो है जिसने मोमिनीन के दिलों में तसल्ली नाज़िल फरमाई ताकि अपने (पहले) ईमान के साथ और ईमान को बढ़ाएँ और सारे आसमान व ज़मीन के लशकर तो ख़ुदा ही के हैं और ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार हकीम है
5لِّيُدْخِلَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَيُكَفِّرَ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عِندَ اللَّهِ فَوْزًا عَظِيمًا
ताकि मोमिन मर्द और मोमिना औरतों को (बेहिश्त) के बाग़ों में जा पहुँचाए जिनके नीचे नहरें जारी हैं और ये वहाँ हमेशा रहेंगे और उनके गुनाहों को उनसे दूर कर दे और ये ख़ुदा के नज़दीक बड़ी कामयाबी है
6وَيُعَذِّبَ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْمُشْرِكِينَ وَالْمُشْرِكَاتِ الظَّانِّينَ بِاللَّهِ ظَنَّ السَّوْءِ ۚ عَلَيْهِمْ دَائِرَةُ السَّوْءِ ۖ وَغَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ وَلَعَنَهُمْ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَهَنَّمَ ۖ وَسَاءَتْ مَصِيرًا
और मुनाफिक़ मर्द और मुनाफ़िक़ औरतों और मुशरिक मर्द और मुशरिक औरतों पर जो ख़ुदा के हक़ में बुरे बुरे ख्याल रखते हैं अज़ाब नाज़िल करे उन पर (मुसीबत की) बड़ी गर्दिश है (और ख़ुदा) उन पर ग़ज़बनाक है और उसने उस पर लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है और वह (क्या) बुरी जगह है
7وَلِلَّهِ جُنُودُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا
और सारे आसमान व ज़मीन के लश्कर ख़ुदा ही के हैं और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफ़कार (और) ग़ालिब है
अल-फतहकुरान सूची
29आयत
मदनीअवतरण स्थान
5आयत

अनुवाद — अल-फतह 5

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Wednesday, September 30, 2026

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