अल-फतह · 6/29
अनुवाद उच्चारण — अल-फतह
وَيُعَذِّبَ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْمُشْرِكِينَ وَالْمُشْرِكَاتِ الظَّانِّينَ بِاللَّهِ ظَنَّ السَّوْءِ ۚ عَلَيْهِمْ دَائِرَةُ السَّوْءِ ۖ وَغَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ وَلَعَنَهُمْ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَهَنَّمَ ۖ وَسَاءَتْ مَصِيرًا ۝٦
Wa yu`azzibal munaafiqeena walmunaafiqaati wal mushrikeena walmushrikaatiz zaaanneena billaahi zannas saw`; `alaihim daaa`iratus saw`i wa ghadibal laahu `alaihim wa la`anahum wa a`adda lahum jahannama wa saaa` at maseeraa
📖 हिंदी अर्थ
और मुनाफिक़ मर्द और मुनाफ़िक़ औरतों और मुशरिक मर्द और मुशरिक औरतों पर जो ख़ुदा के हक़ में बुरे बुरे ख्याल रखते हैं अज़ाब नाज़िल करे उन पर (मुसीबत की) बड़ी गर्दिश है (और ख़ुदा) उन पर ग़ज़बनाक है और उसने उस पर लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है और वह (क्या) बुरी जगह है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الظَّانِّينَ بِاللَّهِ ظَنَّ السَّوْءِ: जो अल्लाह के साथ बुरा गुमान रखते हैं।
  • دَائِرَةُ السَّوْءِ: बुराई का चक्र, यानी आफत और अज़ाब उन्हीं पर लौटकर आएगा।
  • لَعَنَهُمْ: उन्हें अपनी रहमत से दूर कर दिया।
  • مَصِيرًا: अंतिम ठिकाना, जगह।

तफसीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में उन लोगों के अंजाम का ज़िक्र किया है जो मुनाफिक़ीन (दिखावे के मुसलमान) और मुशरिकीन (अल्लाह के साथ शिर्क करने वाले) हैं। ये लोग अल्लाह के बारे में बुरा गुमान रखते थे कि अल्लाह अपने नबी ﷺ और मोमिनीन की मदद नहीं करेगा, और न ही अपने दीन को बुलंद करेगा। उन्होंने दिल में यह ख्याल पाल रखा था कि इस्लाम कभी कामयाब नहीं होगा।

अल्लाह फ़रमाता है कि यह बुरा गुमान उन्हीं पर लौटकर आया, यानी जो बुराई और अज़ाब वे मुसलमानों के लिए चाहते थे, वही उनके सिर पर आ पड़ा। अल्लाह ने उन पर ग़ज़ब नाज़िल किया, उन्हें अपनी रहमत से महरूम कर दिया, और उनके लिए जहन्नुम तैयार कर दी है। वह जहन्नुम कितनी बुरी जगह है, और कितना बुरा अंजाम है उनका जो अल्लाह के दीन का इंतज़ार करते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा और अच्छा गुमान रखना चाहिए। जो लोग अल्लाह की मदद पर शक करते हैं, वे अल्लाह की नज़र में बड़े गुनाहगार हैं। अल्लाह अपने नबी और अपने दीन की हमेशा मदद करता है, चाहे दुश्मन कितने भी ताकतवर क्यों न हों। मोमिन का दिल अल्लाह की रहमत और नुसरत पर पक्का यकीन रखता है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि मुनाफिक़ी और शिर्क से बचना कितना ज़रूरी है, क्योंकि ये वो बीमारियाँ हैं जो इंसान को जहन्नुम तक ले जाती हैं। अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमें सच्चे दिल से मुसलमान बनाए, और हमें मुनाफिक़ी और शिर्क से महफूज़ रखे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 4-8 — अल-फतह

4هُوَ الَّذِي أَنزَلَ السَّكِينَةَ فِي قُلُوبِ الْمُؤْمِنِينَ لِيَزْدَادُوا إِيمَانًا مَّعَ إِيمَانِهِمْ ۗ وَلِلَّهِ جُنُودُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا
वह (वही) ख़ुदा तो है जिसने मोमिनीन के दिलों में तसल्ली नाज़िल फरमाई ताकि अपने (पहले) ईमान के साथ और ईमान को बढ़ाएँ और सारे आसमान व ज़मीन के लशकर तो ख़ुदा ही के हैं और ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार हकीम है
5لِّيُدْخِلَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَيُكَفِّرَ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عِندَ اللَّهِ فَوْزًا عَظِيمًا
ताकि मोमिन मर्द और मोमिना औरतों को (बेहिश्त) के बाग़ों में जा पहुँचाए जिनके नीचे नहरें जारी हैं और ये वहाँ हमेशा रहेंगे और उनके गुनाहों को उनसे दूर कर दे और ये ख़ुदा के नज़दीक बड़ी कामयाबी है
6وَيُعَذِّبَ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْمُشْرِكِينَ وَالْمُشْرِكَاتِ الظَّانِّينَ بِاللَّهِ ظَنَّ السَّوْءِ ۚ عَلَيْهِمْ دَائِرَةُ السَّوْءِ ۖ وَغَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ وَلَعَنَهُمْ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَهَنَّمَ ۖ وَسَاءَتْ مَصِيرًا
और मुनाफिक़ मर्द और मुनाफ़िक़ औरतों और मुशरिक मर्द और मुशरिक औरतों पर जो ख़ुदा के हक़ में बुरे बुरे ख्याल रखते हैं अज़ाब नाज़िल करे उन पर (मुसीबत की) बड़ी गर्दिश है (और ख़ुदा) उन पर ग़ज़बनाक है और उसने उस पर लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है और वह (क्या) बुरी जगह है
7وَلِلَّهِ جُنُودُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا
और सारे आसमान व ज़मीन के लश्कर ख़ुदा ही के हैं और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफ़कार (और) ग़ालिब है
8إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
(ऐ रसूल) हमने तुमको (तमाम आलम का) गवाह और ख़ुशख़बरी देने वाला और धमकी देने वाला (पैग़म्बर बनाकर) भेजा
अल-फतहकुरान सूची
29आयत
मदनीRevelation
6आयत

अनुवाद — अल-फतह 6

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Tuesday, August 18, 2026

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