Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- काबा: वह पवित्र घर जो मक्का में है, जिसे अल्लाह ने इबादत के लिए निर्धारित किया।
- क़ियाम: लोगों के लिए स्थिरता, सुरक्षा और व्यवस्था का आधार।
- अश्हुरुल हुरुम (पवित्र महीने): ज़ुल-क़ादा, ज़ुल-हिज्जा, मुहर्रम और रजब।
- हद्य: वह जानवर (ऊँट, गाय, बकरी) जिसे हज या उमरा के लिए हरम (काबा) की तरफ भेजा जाए।
- क़लाइद: वे जानवर जिनके गले में निशान के तौर पर पट्टी या चमड़े का हार डाला जाए ताकि लोग जानें कि यह हरम के लिए है।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी बड़ी रहमत और एहसान का ज़िक्र किया है। उसने काबा को, जो बैतुल-हराम है, लोगों के लिए क़ियाम (आधार और स्थिरता) बनाया। यानी इस पवित्र घर की बदौलत लोगों के दीन और दुनिया दोनों की भलाई क़ायम होती है। दीन की भलाई इसलिए कि यहाँ नमाज़, हज और उमरा जैसी इबादतें अदा की जाती हैं, और दुनिया की भलाई इसलिए कि यहाँ आने वाले लोगों को अमन और सुरक्षा मिलती है। यहाँ तक कि जो लोग दूर-दराज़ से आते हैं, वे भी इसकी वजह से महफूज़ रहते हैं।
इसी तरह अल्लाह ने पवित्र महीनों (ज़ुल-क़ादा, ज़ुल-हिज्जा, मुहर्रम और रजब) को भी लोगों की भलाई के लिए बनाया, ताकि इन महीनों में लड़ाई-झगड़ा बंद हो और लोग अमन के साथ हज और उमरा कर सकें। साथ ही उसने हद्य (कुर्बानी के जानवर) और क़लाइद (गले में निशान वाले जानवर) को भी सुरक्षा का ज़रिया बनाया, ताकि जो लोग इन्हें हरम की तरफ ले जाएं, उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाए।
यह सब कुछ अल्लाह ने इसलिए किया ताकि तुम लोग जान लो कि अल्लाह उन सब चीज़ों को जानता है जो आसमानों में हैं और जो ज़मीन में हैं। वह हर चीज़ का पूरा इल्म रखता है। उसकी यह व्यवस्था और ये हिदायतें इस बात का सबूत हैं कि वह अपने बंदों की भलाई को अच्छी तरह जानता है और उनके लिए वही चीज़ें मुक़र्रर करता है जो उनके लिए बेहतर होती हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर व्यवस्था में बंदों के लिए भलाई और रहमत छिपी है। जब हम काबा की तरफ रुख करते हैं, हज और उमरा करते हैं, और अल्लाह के बताए हुए पवित्र महीनों का सम्मान करते हैं, तो हमें यकीन होना चाहिए कि यह सब हमारे लिए ही बेहतर है। अल्लाह हमारी हर ज़रूरत को जानता है और अपनी रहमत से हमें सही रास्ता दिखाता है। इसलिए हमें उसकी हर बात को दिल से कबूल करना चाहिए और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारनी चाहिए।
📜 आयत 95-99 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 97
सूरा अल-माइदा आयत 97 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ने काबा को जो (उसका) मोहतरम घर है और…सूरा आयत 97/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 95–99. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


