Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- صَيْدُ الْبَحْرِ: समुद्र का शिकार, यानी वह जीव-जंतु जो पानी से पकड़े जाएं।
- وَطَعَامُهُ: उसका खाना, यानी समुद्र से निकलने वाला वह भोजन जो मृत अवस्था में मिले (जैसे मछली जो मरी हुई किनारे आ जाए)।
- مَتَاعًا: लाभ उठाने के लिए, सुविधा के रूप में।
- لِلسَّيَّارَةِ: यात्रियों के लिए, उन लोगों के लिए जो सफर में हों।
- حُرُمًا: एहराम की हालत में, यानी हज या उमरा के लिए एहराम बांधे हुए।
- تُحْشَرُونَ: तुम एकत्र किए जाओगे (क़यामत के दिन)।
विस्तृत तफसीर:
अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी असीम रहमत और मेहरबानी का इज़हार करते हुए फरमाता है कि उसने उनके लिए समुद्र का शिकार हलाल कर दिया है। इसका मतलब यह है कि चाहे तुम एहराम की हालत में हो या सामान्य अवस्था में, समुद्र से मछली पकड़ना, उसे शिकार करना, और उसका खाना—चाहे वह ज़िंदा पकड़ी गई हो या मरी हुई किनारे आई हो—सब कुछ जायज़ और पाक है। यह अल्लाह की ओर से एक बड़ी सहूलत है, ताकि तुम उससे लाभ उठाओ, चाहे तुम अपने घरों में रहो या सफर पर हो। यात्रियों के लिए तो यह और भी बड़ी नेमत है, क्योंकि वे इससे अपना ज़खीरा बना सकते हैं और अपनी मंज़िल तक पहुँच सकते हैं।
लेकिन इसके विपरीत, अल्लाह ने उन लोगों पर ज़मीन का शिकार हराम कर दिया है जो एहराम की हालत में हों—चाहे वह हज का एहराम हो या उमरा का। यानी जब तक तुम एहराम में हो, तुम्हें ज़मीन के जानवरों का शिकार करना मना है, चाहे वह पालतू हों या जंगली। यह एक इम्तिहान है, जिससे अल्लाह अपने बंदों की फरमाबरदारी को परखता है और उन्हें सब्र और तक़वा सिखाता है।
इसके बाद अल्लाह तआला अपने बंदों को नसीहत करता है कि उससे डरो और उसके हुक्मों की पूरी पाबंदी करो। वही अल्लाह है जिसकी तरफ तुम सबको लौटकर जाना है—क़यामत के दिन। उस दिन तुम सब उसके सामने हाज़िर होंगे, और तुम्हारे अच्छे और बुरे सारे आमाल उसके सामने पेश होंगे। वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा। इसलिए इस दुनिया में उसके हुक्मों की पैरवी करो, ताकि उस दिन तुम कामयाब हो सको और उसके अज़ाब से बच सको।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का दीन आसानी और सहूलत पर आधारित है। उसने समुद्र का शिकार हर हालत में हलाल रखा, ताकि बंदों को तकलीफ न हो, लेकिन एहराम की हालत में ज़मीन का शिकार हराम करके उसने हमें संयम और इबादत की रूह सिखाई। यह एक अज़ीम नेमत है कि अल्लाह ने हमारे लिए अपने दीन को आसान बनाया है, और हमें चाहिए कि हम उसके हर हुक्म को दिल से क़बूल करें और उसकी रहमत के शुक्रगुज़ार बनें। क़यामत का दिन यक़ीनी है, और उस दिन की कामयाबी उसी को मिलेगी जो आज अल्लाह के हुक्मों पर चले।
📜 आयत 94-98 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 96
सूरा अल-माइदा आयत 96 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम्हारे और काफ़िले के वास्ते दरियाई शिकार और उसका खाना…सूरा आयत 96/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 94–98. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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