अल-माइदा · 98/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
اعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ وَأَنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝٩٨
I`lamooo annal laaha shadeedul `iqaabi wa annal laaha Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
जान लो कि यक़ीनन ख़ुदा बड़ा अज़ाब वाला है और ये (भी) कि बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَدِيدُ الْعِقَابِ: अत्यंत कठोर दंड देने वाला
  • غَفُورٌ: अत्यधिक क्षमा करने वाला
  • رَّحِيمٌ: अत्यंत दयालु

व्याख्या:

ऐ लोगों! तुम यह अच्छी तरह जान लो कि अल्लाह उन लोगों को बहुत कठोर दंड देने वाला है जो उसकी अवज्ञा करते हैं और उसके आदेशों का उल्लंघन करते हैं। उसकी पकड़ बहुत सख्त है और उसका दंड अत्यंत भयानक है। साथ ही, यह भी जान लो कि अल्लाह उन लोगों के लिए अत्यधिक क्षमा करने वाला और बड़ा दयालु है जो अपने पापों से तौबा करके उसकी ओर लौटते हैं, उसकी आज्ञा का पालन करते हैं और उसकी इबादत करते हैं। यानी अल्लाह की दो विशेषताएँ एक साथ हैं—वह दंड देने में सख्त है, लेकिन क्षमा करने में भी अत्यंत दयालु है। यह उसका न्याय और उसकी दया दोनों को दर्शाता है।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. इस आयत से हमें अल्लाह के डर और उसकी रहमत के बीच संतुलन बनाने की शिक्षा मिलती है। हमें उसके दंड से डरना चाहिए और उसकी क्षमा की आशा रखनी चाहिए।
  2. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की क्षमा का द्वार हमेशा खुला है। चाहे पाप कितने भी बड़े हों, अगर इंसान सच्चे दिल से तौबा कर ले तो अल्लाह उसे माफ कर देता है।
  3. यहाँ अल्लाह ने पहले अपने दंड का ज़िक्र किया और फिर अपनी क्षमा का, ताकि इंसान न तो अल्लाह की रहमत पर इतना भरोसा करे कि गुनाह करता रहे, और न ही उसकी रहमत से निराश होकर तौबा छोड़ दे।
  4. यह आयत हमें अल्लाह की ओर लौटने की प्रेरणा देती है। जब हमें पता चलता है कि अल्लाह क्षमा करने वाला और दयालु है, तो हमारे दिल में उम्मीद पैदा होती है और हम अपनी गलतियों से सीखकर बेहतर इंसान बनने की कोशिश करते हैं।
  5. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह का दंड और उसकी क्षमा दोनों उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित हैं। वह जिसे चाहे दंड दे और जिसे चाहे क्षमा कर दे, लेकिन उसका फैसला हमेशा न्याय और दया पर आधारित होता है।


📜 आयत 96-100 — सूरा अल-माइदा

96أُحِلَّ لَكُمْ صَيْدُ الْبَحْرِ وَطَعَامُهُ مَتَاعًا لَّكُمْ وَلِلسَّيَّارَةِ ۖ وَحُرِّمَ عَلَيْكُمْ صَيْدُ الْبَرِّ مَا دُمْتُمْ حُرُمًا ۗ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
तुम्हारे और काफ़िले के वास्ते दरियाई शिकार और उसका खाना तो (हर हालत में) तुम्हारे वास्ते जायज़ कर दिया है मगर खुश्की का शिकार जब तक तुम हालते एहराम में रहो तुम पर हराम है और उस ख़ुदा से डरते रहो जिसकी तरफ (मरने के बाद) उठाए जाओगे
97۞ جَعَلَ اللَّهُ الْكَعْبَةَ الْبَيْتَ الْحَرَامَ قِيَامًا لِّلنَّاسِ وَالشَّهْرَ الْحَرَامَ وَالْهَدْيَ وَالْقَلَائِدَ ۚ ذَٰلِكَ لِتَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَأَنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
ख़ुदा ने काबा को जो (उसका) मोहतरम घर है और हुरमत दार महीनों को और कुरबानी को और उस जानवर को जिसके गले में (क़ुरबानी के वास्ते) पट्टे डाल दिए गए हों लोगों के अमन क़ायम रखने का सबब क़रार दिया यह इसलिए कि तुम जान लो कि ख़ुदा जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है यक़ीनन (सब) जानता है और ये भी (समझ लो) कि बेशक ख़ुदा हर चीज़ से वाक़िफ है
98اعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ وَأَنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
जान लो कि यक़ीनन ख़ुदा बड़ा अज़ाब वाला है और ये (भी) कि बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
99مَّا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ ۗ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا تَكْتُمُونَ
(हमारे) रसूल पर पैग़ाम पहुँचा देने के सिवा (और) कुछ (फर्ज़) नहीं और जो कुछ तुम ज़ाहिर बा ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपा कर करते हो ख़ुदा सब जानता है
100قُل لَّا يَسْتَوِي الْخَبِيثُ وَالطَّيِّبُ وَلَوْ أَعْجَبَكَ كَثْرَةُ الْخَبِيثِ ۚ فَاتَّقُوا اللَّهَ يَا أُولِي الْأَلْبَابِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
(ऐ रसूल) कह दो कि नापाक (हराम) और पाक (हलाल) बराबर नहीं हो सकता अगरचे नापाक की कसरत तुम्हें भला क्यों न मालूम हो तो ऐसे अक्लमन्दों अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम कामयाब रहो
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
98आयत

अनुवाद — अल-माइदा 98

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Wednesday, September 30, 2026

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