अल-मुजादिला · 9/22
अनुवाद उच्चारण — अल-मुजादिला
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا تَنَاجَيْتُمْ فَلَا تَتَنَاجَوْا بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَتَنَاجَوْا بِالْبِرِّ وَالتَّقْوَىٰ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ ۝٩
Yaaa ayyuhal lazeena aamanoo izaa tanaajaytum falaa tatanaajaw bil ismi wal `udwaani wa ma`siyatir rasooli wa tanaajaw bil birri wattaqwaa wattaqul laahal lazeee ilaihi tuhsharoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों जब तुम आपस में सरगोशी करो तो गुनाह और ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशी न करो बल्कि नेकीकारी और परहेज़गारी की सरगोशी करो और ख़ुदा से डरते रहो जिसके सामने (एक दिन) जमा किए जाओगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَنَاجَيْتُمْ: आपस में गुप्त बातें करना, कानाफूसी करना।
  • الإِثْمِ: गुनाह, पाप।
  • الْعُدْوَانِ: ज़ुल्म, सीमा से आगे बढ़ना, दूसरों पर अत्याचार करना।
  • مَعْصِيَتِ الرَّسُولِ: रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की अवज्ञा करना, उनके हुक्म के खिलाफ जाना।
  • الْبِرِّ: नेकी, भलाई, अच्छे काम।
  • التَّقْوَى: परहेज़गारी, अल्लाह का डर, गुनाहों से बचना।
  • تُحْشَرُونَ: तुम इकट्ठे किए जाओगे (क़ियामत के दिन)।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! जब तुम आपस में गुप्त बातें करो, तो उस तरह की कानाफूसी मत करो जिसमें गुनाह हो, यानी ऐसी बातें जो अल्लाह की नाफरमानी पर मुश्तमिल हों, या जिसमें किसी दूसरे पर ज़ुल्म और सीमा से आगे बढ़ना हो, या रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की नाफरमानी और उनके हुक्म की खिलाफ़वर्ज़ी हो। यह वह रास्ता है जो मुनाफ़िक़ीन और यहूदियों का था, जो आपस में इसलिए कानाफूसी करते थे ताकि मुसलमानों को नुक़्सान पहुँचाएँ और उनके दिलों में खौफ़ पैदा करें। अल्लाह तआला ने मोमिनीन को इससे बाज़ रखा और फ़रमाया कि जब तुम आपस में गुप्त बातें करो, तो उन बातों में नेकी, भलाई, परहेज़गारी और अल्लाह की इताअत होनी चाहिए। यानी ऐसी बातें करो जिनमें लोगों की भलाई हो, आपसी मोहब्बत और इत्तिहाद बढ़े, और अल्लाह के हुक्मों की पैरवी हो।

फिर अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "और अल्लाह से डरो जिसके पास तुम इकट्ठे किए जाओगे।" यानी उस अल्लाह का ख़ौफ़ रखो जो तुम्हारे सारे अमल और अक़वाल को जानता है और क़ियामत के दिन तुम सबको उसी की तरफ़ लौटना है। वहाँ तुम्हारे हर छोटे-बड़े अमल का हिसाब लिया जाएगा। जो लोग दुनिया में गुप्त रूप से गुनाह और बुराई की बातें करते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि अल्लाह के फ़रिश्ते उनकी हर बात लिख रहे हैं, और क़ियामत के दिन उनके सामने उनके सारे अमाल पेश किए जाएँगे।

यह आयत मोमिनीन को सिखाती है कि उनकी गुप्त बातें भी अल्लाह की नज़र में हैं, इसलिए उन्हें चाहिए कि वे हर हाल में नेकी और परहेज़गारी को अपनाएँ। जो लोग अल्लाह के हुक्मों पर अमल करते हैं और उसके रसूल की इताअत करते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बड़ा अज्र और कामयाबी है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि मुसलमानों की आपसी बातचीत में भलाई और नेकी का पैग़ाम होना चाहिए, न कि फ़ित्ना, गुनाह और ज़ुल्म का। अल्लाह तआला अपने बंदों से मुहब्बत करता है और उन्हें हिदायत देता है कि वे उस रास्ते पर चलें जो उनके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतर है। तो आओ, हम अपनी बातों को नेकी और तक़वा का ज़रिया बनाएँ और अल्लाह के ख़ौफ़ को अपने दिलों में ज़िंदा रखें, क्योंकि उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अल-मुजादिला

7أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ مَا يَكُونُ مِن نَّجْوَىٰ ثَلَاثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمْ وَلَا خَمْسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمْ وَلَا أَدْنَىٰ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمْ أَيْنَ مَا كَانُوا ۖ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
क्या तुमको मालूम नहीं कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा जानता है जब तीन (आदमियों) का ख़ुफिया मशवेरा होता है तो वह (ख़ुद) उनका ज़रूर चौथा है और जब पाँच का मशवेरा होता है तो वह उनका छठा है और उससे कम हो या ज्यादा और चाहे जहाँ कहीं हो वह उनके साथ ज़रूर होता है फिर जो कुछ वह (दुनिया में) करते रहे क़यामत के दिन उनको उससे आगाह कर देगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है
8أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ نُهُوا عَنِ النَّجْوَىٰ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا نُهُوا عَنْهُ وَيَتَنَاجَوْنَ بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَإِذَا جَاءُوكَ حَيَّوْكَ بِمَا لَمْ يُحَيِّكَ بِهِ اللَّهُ وَيَقُولُونَ فِي أَنفُسِهِمْ لَوْلَا يُعَذِّبُنَا اللَّهُ بِمَا نَقُولُ ۚ حَسْبُهُمْ جَهَنَّمُ يَصْلَوْنَهَا ۖ فَبِئْسَ الْمَصِيرُ
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिनको सरगोशियाँ करने से मना किया गया ग़रज़ जिस काम की उनको मुमानिअत की गयी थी उसी को फिर करते हैं और (लुत्फ़ तो ये है कि) गुनाह और (बेजा) ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशियाँ करते हैं और जब तुम्हारे पास आते हैं तो जिन लफ्ज़ों से ख़ुदा ने भी तुम को सलाम नहीं किया उन लफ्ज़ों से सलाम करते हैं और अपने जी में कहते हैं कि (अगर ये वाक़ई पैग़म्बर हैं तो) जो कुछ हम कहते हैं ख़ुदा हमें उसकी सज़ा क्यों नहीं देता (ऐ रसूल) उनको दोज़ख़ ही (की सज़ा) काफी है जिसमें ये दाख़िल होंगे तो वह (क्या) बुरी जगह है
9يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا تَنَاجَيْتُمْ فَلَا تَتَنَاجَوْا بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَتَنَاجَوْا بِالْبِرِّ وَالتَّقْوَىٰ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
ऐ ईमानदारों जब तुम आपस में सरगोशी करो तो गुनाह और ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशी न करो बल्कि नेकीकारी और परहेज़गारी की सरगोशी करो और ख़ुदा से डरते रहो जिसके सामने (एक दिन) जमा किए जाओगे
10إِنَّمَا النَّجْوَىٰ مِنَ الشَّيْطَانِ لِيَحْزُنَ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَيْسَ بِضَارِّهِمْ شَيْئًا إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
(बरी बातों की) सरगोशी तो बस एक शैतानी काम है (और इसलिए करते हैं) ताकि ईमानदारों को उससे रंज पहुँचे हालॉकि ख़ुदा की तरफ से आज़ादी दिए बग़ैर सरगोशी उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकती और मोमिनीन को तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिए
11يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا قِيلَ لَكُمْ تَفَسَّحُوا فِي الْمَجَالِسِ فَافْسَحُوا يَفْسَحِ اللَّهُ لَكُمْ ۖ وَإِذَا قِيلَ انشُزُوا فَانشُزُوا يَرْفَعِ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا مِنكُمْ وَالَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ دَرَجَاتٍ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
ऐ ईमानदारों जब तुमसे कहा जाए कि मजलिस में जगह कुशादा करो वह तो कुशादा कर दिया करो ख़ुदा तुमको कुशादगी अता करेगा और जब तुमसे कहा जाए कि उठ खड़े हो तो उठ खड़े हुआ करो जो लोग तुमसे ईमानदार हैं और जिनको इल्म अता हुआ है ख़ुदा उनके दर्जे बुलन्द करेगा और ख़ुदा तुम्हारे सब कामों से बेख़बर है
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अनुवाद — अल-मुजादिला 9

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Tuesday, August 18, 2026

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