अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَنَاجَيْتُمْ: आपस में गुप्त बातें करना, कानाफूसी करना।
- الإِثْمِ: गुनाह, पाप।
- الْعُدْوَانِ: ज़ुल्म, सीमा से आगे बढ़ना, दूसरों पर अत्याचार करना।
- مَعْصِيَتِ الرَّسُولِ: रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की अवज्ञा करना, उनके हुक्म के खिलाफ जाना।
- الْبِرِّ: नेकी, भलाई, अच्छे काम।
- التَّقْوَى: परहेज़गारी, अल्लाह का डर, गुनाहों से बचना।
- تُحْشَرُونَ: तुम इकट्ठे किए जाओगे (क़ियामत के दिन)।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालो! जब तुम आपस में गुप्त बातें करो, तो उस तरह की कानाफूसी मत करो जिसमें गुनाह हो, यानी ऐसी बातें जो अल्लाह की नाफरमानी पर मुश्तमिल हों, या जिसमें किसी दूसरे पर ज़ुल्म और सीमा से आगे बढ़ना हो, या रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की नाफरमानी और उनके हुक्म की खिलाफ़वर्ज़ी हो। यह वह रास्ता है जो मुनाफ़िक़ीन और यहूदियों का था, जो आपस में इसलिए कानाफूसी करते थे ताकि मुसलमानों को नुक़्सान पहुँचाएँ और उनके दिलों में खौफ़ पैदा करें। अल्लाह तआला ने मोमिनीन को इससे बाज़ रखा और फ़रमाया कि जब तुम आपस में गुप्त बातें करो, तो उन बातों में नेकी, भलाई, परहेज़गारी और अल्लाह की इताअत होनी चाहिए। यानी ऐसी बातें करो जिनमें लोगों की भलाई हो, आपसी मोहब्बत और इत्तिहाद बढ़े, और अल्लाह के हुक्मों की पैरवी हो।
फिर अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "और अल्लाह से डरो जिसके पास तुम इकट्ठे किए जाओगे।" यानी उस अल्लाह का ख़ौफ़ रखो जो तुम्हारे सारे अमल और अक़वाल को जानता है और क़ियामत के दिन तुम सबको उसी की तरफ़ लौटना है। वहाँ तुम्हारे हर छोटे-बड़े अमल का हिसाब लिया जाएगा। जो लोग दुनिया में गुप्त रूप से गुनाह और बुराई की बातें करते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि अल्लाह के फ़रिश्ते उनकी हर बात लिख रहे हैं, और क़ियामत के दिन उनके सामने उनके सारे अमाल पेश किए जाएँगे।
यह आयत मोमिनीन को सिखाती है कि उनकी गुप्त बातें भी अल्लाह की नज़र में हैं, इसलिए उन्हें चाहिए कि वे हर हाल में नेकी और परहेज़गारी को अपनाएँ। जो लोग अल्लाह के हुक्मों पर अमल करते हैं और उसके रसूल की इताअत करते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बड़ा अज्र और कामयाबी है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि मुसलमानों की आपसी बातचीत में भलाई और नेकी का पैग़ाम होना चाहिए, न कि फ़ित्ना, गुनाह और ज़ुल्म का। अल्लाह तआला अपने बंदों से मुहब्बत करता है और उन्हें हिदायत देता है कि वे उस रास्ते पर चलें जो उनके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतर है। तो आओ, हम अपनी बातों को नेकी और तक़वा का ज़रिया बनाएँ और अल्लाह के ख़ौफ़ को अपने दिलों में ज़िंदा रखें, क्योंकि उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है।
📜 आयत 7-11 — अल-मुजादिला
अनुवाद — अल-मुजादिला 9
सूरा अल-मुजादिला आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों जब तुम आपस में सरगोशी करो तो गुनाह…सूरा आयत 9/22 — अल-मुजादिला المجادلة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुजादिला सुनें, अल-मुजादिला अनुवाद, अल-मुजादिला mp3, अल-मुजादिला pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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