अल-मुजादिला · 8/22
अनुवाद उच्चारण — अल-मुजादिला
أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ نُهُوا عَنِ النَّجْوَىٰ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا نُهُوا عَنْهُ وَيَتَنَاجَوْنَ بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَإِذَا جَاءُوكَ حَيَّوْكَ بِمَا لَمْ يُحَيِّكَ بِهِ اللَّهُ وَيَقُولُونَ فِي أَنفُسِهِمْ لَوْلَا يُعَذِّبُنَا اللَّهُ بِمَا نَقُولُ ۚ حَسْبُهُمْ جَهَنَّمُ يَصْلَوْنَهَا ۖ فَبِئْسَ الْمَصِيرُ ۝٨
Alam tara ilal lazeena nuhoo `anin najwaa summa ya`oodoona limaa nuhoo `anhu wa yatanaajawna bil ismi wal`udwaani wa ma`siyatir rasooli wa izaa jaaa`ooka haiyawka bimaa lam yuhai yika bihil laahu wa yaqooloona fee anfusihim law laa yu`azzibunal laahu bimaa naqool; hasbuhum jahannnamu yaslawnahaa fabi`sal maseer
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिनको सरगोशियाँ करने से मना किया गया ग़रज़ जिस काम की उनको मुमानिअत की गयी थी उसी को फिर करते हैं और (लुत्फ़ तो ये है कि) गुनाह और (बेजा) ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशियाँ करते हैं और जब तुम्हारे पास आते हैं तो जिन लफ्ज़ों से ख़ुदा ने भी तुम को सलाम नहीं किया उन लफ्ज़ों से सलाम करते हैं और अपने जी में कहते हैं कि (अगर ये वाक़ई पैग़म्बर हैं तो) जो कुछ हम कहते हैं ख़ुदा हमें उसकी सज़ा क्यों नहीं देता (ऐ रसूल) उनको दोज़ख़ ही (की सज़ा) काफी है जिसमें ये दाख़िल होंगे तो वह (क्या) बुरी जगह है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • النَّجْوَى (नजवा): चुपके से आपस में बात करना, कानाफूसी करना।
  • الْإِثْم (इसम): गुनाह, पाप।
  • الْعُدْوَان (उद्वान): ज़्यादती, हद से बढ़ना, दूसरों पर ज़ुल्म करना।
  • حَيَّوْكَ (हय्यौका): तुम्हें सलाम किया, तुम्हारी खैरियत पूछी।
  • السَّام (अस-साम): मौत, हलाकत।
  • لَوْلَا (लौला): क्यों नहीं, काश।
  • حَسْبُهُمْ (हस्बुहुम): उनके लिए काफ़ी है।
  • يَصْلَوْنَهَا (यसलौनहा): वे उसमें (आग में) प्रवेश करेंगे और उसकी गर्मी झेलेंगे।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या तुमने उन लोगों (यहूदियों) की हालत पर ग़ौर नहीं किया, जिन्हें सिरगुप्त बातें करने से मना किया गया था? उन्हें रोका गया कि वे मुसलमानों को देखकर आपस में कानाफूसी न करें, क्योंकि इससे मुसलमानों के दिलों में बेचैनी और शक पैदा होता है। मगर अफ़सोस! वे उसी काम की तरफ लौट आते हैं जिससे उन्हें रोका गया था। वे फिर से चुपके-चुपके बैठकर ऐसी बातें करते हैं जो गुनाह हैं, जिनमें मुसलमानों के खिलाफ ज़्यादती और नबी (ﷺ) की नाफ़रमानी होती है।

और जब वे तुम्हारे पास आते हैं, तो तुम्हें उस सलाम से सलाम नहीं करते जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए मुकर्रर किया है। अल्लाह ने मुसलमानों को सिखाया है कि वे "अस्सलामु अलैकुम" कहें, यानी तुम पर सलामती और रहमत हो। मगर ये लोग मरोड़कर कहते हैं: "अस-सामु अलैका" यानी तुम पर मौत हो! वे दिल में कहते हैं कि अगर यह सच में अल्लाह के नबी होते, तो हमारी इन बातों पर अल्लाह हमें सज़ा क्यों नहीं देता? वे अपनी इस बात को नबी (ﷺ) की रिसालत पर शुबहा (संदेह) पैदा करने का ज़रिया बनाते हैं।

अल्लाह फ़रमाता है: उनके लिए जहन्नम काफ़ी है! वे उसमें जाएंगे और उसकी भयंकर आग में झुलसेंगे। वह कितना बुरा ठिकाना है!


दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह हर छोटी-बड़ी बात से वाकिफ है, चाहे वो चुपके से कही जाए या दिल में ही छिपा ली जाए। हमें चाहिए कि अपनी ज़ुबान को गुनाह से बचाएं, किसी की बुराई न करें, किसी को तकलीफ़ देने वाली बातें न करें और नबी (ﷺ) की सुन्नत के मुताबिक सलाम करें। सलाम सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि मुहब्बत और दुआ का ज़रिया है। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का मज़ाक उड़ाते हैं या उनके खिलाफ चुपके से साज़िशें करते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जहन्नम की आग से बचने का एक ही रास्ता है — ईमान, अच्छे आचरण और नबी (ﷺ) की पूरी इताअत। आओ, हम अपनी ज़ुबान को नेक बातों में लगाएं और दूसरों के साथ अच्छा सलूक करें, ताकि अल्लाह की रहमत और जन्नत हमारा हिस्सा बने।



📜 आयत 6-10 — अल-मुजादिला

6يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ جَمِيعًا فَيُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا ۚ أَحْصَاهُ اللَّهُ وَنَسُوهُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
जिस दिन ख़ुदा उन सबको दोबारा उठाएगा तो उनके आमाल से उनको आगाह कर देगा ये लोग (अगरचे) उनको भूल गये हैं मगर ख़ुदा ने उनको याद रखा है और ख़ुदा तो हर चीज़ का गवाह है
7أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ مَا يَكُونُ مِن نَّجْوَىٰ ثَلَاثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمْ وَلَا خَمْسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمْ وَلَا أَدْنَىٰ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمْ أَيْنَ مَا كَانُوا ۖ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
क्या तुमको मालूम नहीं कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा जानता है जब तीन (आदमियों) का ख़ुफिया मशवेरा होता है तो वह (ख़ुद) उनका ज़रूर चौथा है और जब पाँच का मशवेरा होता है तो वह उनका छठा है और उससे कम हो या ज्यादा और चाहे जहाँ कहीं हो वह उनके साथ ज़रूर होता है फिर जो कुछ वह (दुनिया में) करते रहे क़यामत के दिन उनको उससे आगाह कर देगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है
8أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ نُهُوا عَنِ النَّجْوَىٰ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا نُهُوا عَنْهُ وَيَتَنَاجَوْنَ بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَإِذَا جَاءُوكَ حَيَّوْكَ بِمَا لَمْ يُحَيِّكَ بِهِ اللَّهُ وَيَقُولُونَ فِي أَنفُسِهِمْ لَوْلَا يُعَذِّبُنَا اللَّهُ بِمَا نَقُولُ ۚ حَسْبُهُمْ جَهَنَّمُ يَصْلَوْنَهَا ۖ فَبِئْسَ الْمَصِيرُ
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिनको सरगोशियाँ करने से मना किया गया ग़रज़ जिस काम की उनको मुमानिअत की गयी थी उसी को फिर करते हैं और (लुत्फ़ तो ये है कि) गुनाह और (बेजा) ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशियाँ करते हैं और जब तुम्हारे पास आते हैं तो जिन लफ्ज़ों से ख़ुदा ने भी तुम को सलाम नहीं किया उन लफ्ज़ों से सलाम करते हैं और अपने जी में कहते हैं कि (अगर ये वाक़ई पैग़म्बर हैं तो) जो कुछ हम कहते हैं ख़ुदा हमें उसकी सज़ा क्यों नहीं देता (ऐ रसूल) उनको दोज़ख़ ही (की सज़ा) काफी है जिसमें ये दाख़िल होंगे तो वह (क्या) बुरी जगह है
9يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا تَنَاجَيْتُمْ فَلَا تَتَنَاجَوْا بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَتَنَاجَوْا بِالْبِرِّ وَالتَّقْوَىٰ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
ऐ ईमानदारों जब तुम आपस में सरगोशी करो तो गुनाह और ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशी न करो बल्कि नेकीकारी और परहेज़गारी की सरगोशी करो और ख़ुदा से डरते रहो जिसके सामने (एक दिन) जमा किए जाओगे
10إِنَّمَا النَّجْوَىٰ مِنَ الشَّيْطَانِ لِيَحْزُنَ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَيْسَ بِضَارِّهِمْ شَيْئًا إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
(बरी बातों की) सरगोशी तो बस एक शैतानी काम है (और इसलिए करते हैं) ताकि ईमानदारों को उससे रंज पहुँचे हालॉकि ख़ुदा की तरफ से आज़ादी दिए बग़ैर सरगोशी उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकती और मोमिनीन को तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिए
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अनुवाद — अल-मुजादिला 8

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सूरा आयत 8/22 — अल-मुजादिला المجادلة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुजादिला सुनें, अल-मुजादिला अनुवाद, अल-मुजादिला mp3, अल-मुजादिला pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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