Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- النَّجْوَى (नजवा): चुपके से आपस में बात करना, कानाफूसी करना।
- الْإِثْم (इसम): गुनाह, पाप।
- الْعُدْوَان (उद्वान): ज़्यादती, हद से बढ़ना, दूसरों पर ज़ुल्म करना।
- حَيَّوْكَ (हय्यौका): तुम्हें सलाम किया, तुम्हारी खैरियत पूछी।
- السَّام (अस-साम): मौत, हलाकत।
- لَوْلَا (लौला): क्यों नहीं, काश।
- حَسْبُهُمْ (हस्बुहुम): उनके लिए काफ़ी है।
- يَصْلَوْنَهَا (यसलौनहा): वे उसमें (आग में) प्रवेश करेंगे और उसकी गर्मी झेलेंगे।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! क्या तुमने उन लोगों (यहूदियों) की हालत पर ग़ौर नहीं किया, जिन्हें सिरगुप्त बातें करने से मना किया गया था? उन्हें रोका गया कि वे मुसलमानों को देखकर आपस में कानाफूसी न करें, क्योंकि इससे मुसलमानों के दिलों में बेचैनी और शक पैदा होता है। मगर अफ़सोस! वे उसी काम की तरफ लौट आते हैं जिससे उन्हें रोका गया था। वे फिर से चुपके-चुपके बैठकर ऐसी बातें करते हैं जो गुनाह हैं, जिनमें मुसलमानों के खिलाफ ज़्यादती और नबी (ﷺ) की नाफ़रमानी होती है।
और जब वे तुम्हारे पास आते हैं, तो तुम्हें उस सलाम से सलाम नहीं करते जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए मुकर्रर किया है। अल्लाह ने मुसलमानों को सिखाया है कि वे "अस्सलामु अलैकुम" कहें, यानी तुम पर सलामती और रहमत हो। मगर ये लोग मरोड़कर कहते हैं: "अस-सामु अलैका" यानी तुम पर मौत हो! वे दिल में कहते हैं कि अगर यह सच में अल्लाह के नबी होते, तो हमारी इन बातों पर अल्लाह हमें सज़ा क्यों नहीं देता? वे अपनी इस बात को नबी (ﷺ) की रिसालत पर शुबहा (संदेह) पैदा करने का ज़रिया बनाते हैं।
अल्लाह फ़रमाता है: उनके लिए जहन्नम काफ़ी है! वे उसमें जाएंगे और उसकी भयंकर आग में झुलसेंगे। वह कितना बुरा ठिकाना है!
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह हर छोटी-बड़ी बात से वाकिफ है, चाहे वो चुपके से कही जाए या दिल में ही छिपा ली जाए। हमें चाहिए कि अपनी ज़ुबान को गुनाह से बचाएं, किसी की बुराई न करें, किसी को तकलीफ़ देने वाली बातें न करें और नबी (ﷺ) की सुन्नत के मुताबिक सलाम करें। सलाम सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि मुहब्बत और दुआ का ज़रिया है। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का मज़ाक उड़ाते हैं या उनके खिलाफ चुपके से साज़िशें करते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जहन्नम की आग से बचने का एक ही रास्ता है — ईमान, अच्छे आचरण और नबी (ﷺ) की पूरी इताअत। आओ, हम अपनी ज़ुबान को नेक बातों में लगाएं और दूसरों के साथ अच्छा सलूक करें, ताकि अल्लाह की रहमत और जन्नत हमारा हिस्सा बने।
📜 आयत 6-10 — सूरा अल-मुजादिला
अनुवाद — अल-मुजादिला 8
सूरा अल-मुजादिला आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिनको सरगोशियाँ करने…सूरा आयत 8/22 — सूरा अल-मुजादिला المجادلة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुजादिला सुनें, सूरा अल-मुजादिला अनुवाद, सूरा अल-मुजादिला mp3, सूरा अल-मुजादिला pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुजादिला
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 11, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


