अनुवाद — Tafsir
वह अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए सितारों को (आकाश में) बनाया, ताकि तुम उनके द्वारा जंगल (सूखे मैदान) और समुद्र के अंधेरों में (अपनी मंज़िल की) राह पा सको। हमने अपनी आयतों (निशानियों) को उन लोगों के लिए विस्तार से स्पष्ट कर दिया है जो जानने-समझने वाले हैं।
शब्दों के अर्थ:
- النُّجُوم (सितारे): आकाश में चमकने वाले तारे।
- ظُلُمَات (अंधेरे): रात के घने अंधेरे, जो जंगल (सूखे मैदान) और समुद्र के सफर में रास्ता भटकाने वाले होते हैं।
- فَصَّلْنَا (हमने विस्तार से स्पष्ट किया): हमने हर निशानी को अलग-अलग करके, खोलकर बयान किया।
- آيَات (निशानियाँ/आयतें): अल्लाह की कुदरत की दलीलें और उसकी वही की गई आयतें।
विस्तृत तफसीर:
यह आयत अल्लाह तआला की उस महान रहमत और कुदरत की तरफ इशारा करती है जो उसने इंसानों के लिए इस कायनात में रखी है। अल्लाह ही वह है जिसने आसमान में सितारों को पैदा किया, और उन्हें सिर्फ ज़ीनत के लिए नहीं बनाया, बल्कि एक बड़े मक़सद के लिए बनाया—ताकि इंसान उनके ज़रिए रात के अंधेरों में, चाहे वह सूखे जंगल (रेगिस्तान) के रास्ते हों या समुद्र की गहराइयाँ, अपनी मंज़िल की तरफ राह पा सके। जब इंसान रात के सफर में होता है और चारों तरफ अंधेरा छाया होता है, तो सितारे उसके लिए मार्गदर्शक बन जाते हैं, जिनसे वह अपनी दिशा तय करता है। यह अल्लाह की उस हिकमत और इंसान पर मेहरबानी का सबूत है कि उसने इंसान को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उसे हिदायत के ज़रिए (सितारों की शक्ल में) मुहैया कराए।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि हमने अपनी आयतों (निशानियों) को खोल-खोलकर, विस्तार से बयान कर दिया है—चाहे वह किताब (क़ुरआन) की आयतें हों या कायनात में फैली हुई निशानियाँ—उन लोगों के लिए जो जानने-समझने वाले हैं। यानी जो लोग इन निशानियों पर ग़ौर करते हैं, उन्हें अल्लाह की कुदरत, उसकी वहदानियत और उसकी रहमत का इल्म हासिल होता है। यहाँ अल्लाह ने "जानने वालों" का ज़िक्र किया, क्योंकि सिर्फ आँखों से देखना काफी नहीं, बल्कि दिल और अक़्ल से सोचना-समझना ज़रूरी है। जो लोग अक़्ल इस्तेमाल करते हैं और इन निशानियों पर दिल से ग़ौर करते हैं, वही इनसे सबक़ लेते हैं और अल्लाह की तरफ रुजू करते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने इस कायनात को बे-मक़सद नहीं बनाया, बल्कि हर चीज़ में इंसान के लिए भलाई और हिदायत रखी है। जिस तरह सितारे अंधेरे में रास्ता दिखाते हैं, उसी तरह अल्लाह की किताब (क़ुरआन) और उसके नबी ﷺ की सुन्नत हमारे लिए ज़िंदगी के अंधेरों में रोशनी हैं। जो इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका दिल ईमान की रोशनी से भर जाता है और वह अल्लाह की मोहब्बत में गहरा जाता है। यह आयत हमें दावत देती है कि हम कायनात की हर चीज़ में अल्लाह की कुदरत के निशाने देखें, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें सच्चे ज्ञान, सच्चे ईमान और अल्लाह की रज़ा तक पहुँचाता है। अल्लाह ने हम पर यह बड़ा एहसान किया है कि उसने हमें अक़्ल दी और अपनी निशानियाँ सामने रखीं, ताकि हम उसे पहचानें और उसकी इबादत करें।
📜 आयत 95-99 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 97
सूरा अल-अनआम आयत 97 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह वही (ख़ुदा) है जिसने तुम्हारे (नफे के) वास्ते…सूरा आयत 97/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 95–99. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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