अल-अनआम · 97/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَهُوَ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ النُّجُومَ لِتَهْتَدُوا بِهَا فِي ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ ۝٩٧
Wa Huwal lazee ja`ala lakumun nujooma litahtadoo bihaa fee zulumaatil barri walbahr; qad fassalnal Aayaati liqawminy ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और वह वही (ख़ुदा) है जिसने तुम्हारे (नफे के) वास्ते सितारे पैदा किए ताकि तुम जॅगलों और दरियाओं की तारिक़ियों (अंधेरों) में उनसे राह मालूम करो जो लोग वाक़िफकार हैं उनके लिए हमने (अपनी क़ुदरत की) निशानियाँ ख़ूब तफ़सील से बयान कर दी हैं

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अनुवाद — Tafsir

वह अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए सितारों को (आकाश में) बनाया, ताकि तुम उनके द्वारा जंगल (सूखे मैदान) और समुद्र के अंधेरों में (अपनी मंज़िल की) राह पा सको। हमने अपनी आयतों (निशानियों) को उन लोगों के लिए विस्तार से स्पष्ट कर दिया है जो जानने-समझने वाले हैं।

शब्दों के अर्थ:

  • النُّجُوم (सितारे): आकाश में चमकने वाले तारे।
  • ظُلُمَات (अंधेरे): रात के घने अंधेरे, जो जंगल (सूखे मैदान) और समुद्र के सफर में रास्ता भटकाने वाले होते हैं।
  • فَصَّلْنَا (हमने विस्तार से स्पष्ट किया): हमने हर निशानी को अलग-अलग करके, खोलकर बयान किया।
  • آيَات (निशानियाँ/आयतें): अल्लाह की कुदरत की दलीलें और उसकी वही की गई आयतें।

विस्तृत तफसीर:

यह आयत अल्लाह तआला की उस महान रहमत और कुदरत की तरफ इशारा करती है जो उसने इंसानों के लिए इस कायनात में रखी है। अल्लाह ही वह है जिसने आसमान में सितारों को पैदा किया, और उन्हें सिर्फ ज़ीनत के लिए नहीं बनाया, बल्कि एक बड़े मक़सद के लिए बनाया—ताकि इंसान उनके ज़रिए रात के अंधेरों में, चाहे वह सूखे जंगल (रेगिस्तान) के रास्ते हों या समुद्र की गहराइयाँ, अपनी मंज़िल की तरफ राह पा सके। जब इंसान रात के सफर में होता है और चारों तरफ अंधेरा छाया होता है, तो सितारे उसके लिए मार्गदर्शक बन जाते हैं, जिनसे वह अपनी दिशा तय करता है। यह अल्लाह की उस हिकमत और इंसान पर मेहरबानी का सबूत है कि उसने इंसान को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उसे हिदायत के ज़रिए (सितारों की शक्ल में) मुहैया कराए।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि हमने अपनी आयतों (निशानियों) को खोल-खोलकर, विस्तार से बयान कर दिया है—चाहे वह किताब (क़ुरआन) की आयतें हों या कायनात में फैली हुई निशानियाँ—उन लोगों के लिए जो जानने-समझने वाले हैं। यानी जो लोग इन निशानियों पर ग़ौर करते हैं, उन्हें अल्लाह की कुदरत, उसकी वहदानियत और उसकी रहमत का इल्म हासिल होता है। यहाँ अल्लाह ने "जानने वालों" का ज़िक्र किया, क्योंकि सिर्फ आँखों से देखना काफी नहीं, बल्कि दिल और अक़्ल से सोचना-समझना ज़रूरी है। जो लोग अक़्ल इस्तेमाल करते हैं और इन निशानियों पर दिल से ग़ौर करते हैं, वही इनसे सबक़ लेते हैं और अल्लाह की तरफ रुजू करते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने इस कायनात को बे-मक़सद नहीं बनाया, बल्कि हर चीज़ में इंसान के लिए भलाई और हिदायत रखी है। जिस तरह सितारे अंधेरे में रास्ता दिखाते हैं, उसी तरह अल्लाह की किताब (क़ुरआन) और उसके नबी ﷺ की सुन्नत हमारे लिए ज़िंदगी के अंधेरों में रोशनी हैं। जो इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका दिल ईमान की रोशनी से भर जाता है और वह अल्लाह की मोहब्बत में गहरा जाता है। यह आयत हमें दावत देती है कि हम कायनात की हर चीज़ में अल्लाह की कुदरत के निशाने देखें, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें सच्चे ज्ञान, सच्चे ईमान और अल्लाह की रज़ा तक पहुँचाता है। अल्लाह ने हम पर यह बड़ा एहसान किया है कि उसने हमें अक़्ल दी और अपनी निशानियाँ सामने रखीं, ताकि हम उसे पहचानें और उसकी इबादत करें।



📜 आयत 95-99 — अल-अनआम

95۞ إِنَّ اللَّهَ فَالِقُ الْحَبِّ وَالنَّوَىٰ ۖ يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَمُخْرِجُ الْمَيِّتِ مِنَ الْحَيِّ ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ
ख़ुदा ही तो गुठली और दाने को चीर (करके दरख्त ऊगाता) है वही मुर्दे में से ज़िन्दे को निकालता है और वही ज़िन्दा से मुर्दे को निकालने वाला है (लोगों) वही तुम्हारा ख़ुदा है फिर तुम किधर बहके जा रहे हो
96فَالِقُ الْإِصْبَاحِ وَجَعَلَ اللَّيْلَ سَكَنًا وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ حُسْبَانًا ۚ ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ الْعَزِيزِ الْعَلِيمِ
उसी के लिए सुबह की पौ फटी और उसी ने आराम के लिए रात और हिसाब के लिए सूरज और चाँद बनाए ये ख़ुदाए ग़ालिब व दाना के मुक़र्रर किए हुए किरदा (उसूल) हैं
97وَهُوَ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ النُّجُومَ لِتَهْتَدُوا بِهَا فِي ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
और वह वही (ख़ुदा) है जिसने तुम्हारे (नफे के) वास्ते सितारे पैदा किए ताकि तुम जॅगलों और दरियाओं की तारिक़ियों (अंधेरों) में उनसे राह मालूम करो जो लोग वाक़िफकार हैं उनके लिए हमने (अपनी क़ुदरत की) निशानियाँ ख़ूब तफ़सील से बयान कर दी हैं
98وَهُوَ الَّذِي أَنشَأَكُم مِّن نَّفْسٍ وَاحِدَةٍ فَمُسْتَقَرٌّ وَمُسْتَوْدَعٌ ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَفْقَهُونَ
और वह वही ख़ुदा है जिसने तुम लोगों को एक शख़्श से पैदा किया फिर (हर शख़्श के) क़रार की जगह (बाप की पुश्त (पीठ)) और सौंपने की जगह (माँ का पेट) मुक़र्रर है हमने समझदार लोगों के वास्ते (अपनी कुदरत की) निशानियाँ ख़ूब तफसील से बयान कर दी हैं
99وَهُوَ الَّذِي أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجْنَا بِهِ نَبَاتَ كُلِّ شَيْءٍ فَأَخْرَجْنَا مِنْهُ خَضِرًا نُّخْرِجُ مِنْهُ حَبًّا مُّتَرَاكِبًا وَمِنَ النَّخْلِ مِن طَلْعِهَا قِنْوَانٌ دَانِيَةٌ وَجَنَّاتٍ مِّنْ أَعْنَابٍ وَالزَّيْتُونَ وَالرُّمَّانَ مُشْتَبِهًا وَغَيْرَ مُتَشَابِهٍ ۗ انظُرُوا إِلَىٰ ثَمَرِهِ إِذَا أَثْمَرَ وَيَنْعِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكُمْ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
और वह वही (क़ादिर तवाना है) जिसने आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने उसके ज़रिए से हर चीज़ के कोए निकालें फिर हम ही ने उससे हरी भरी टहनियाँ निकालीं कि उससे हम बाहम गुत्थे दाने निकालते हैं और छुहारे के बोर (मुन्जिर) से लटके हुए गुच्छे पैदा किए और अंगूर और ज़ैतून और अनार के बाग़ात जो बाहम सूरत में एक दूसरे से मिलते जुलते और (मजे में) जुदा जुदा जब ये पिघले और पक्के तो उसके फल की तरफ ग़ौर तो करो बेशक अमन में ईमानदार लोगों के लिए बहुत सी (ख़ुदा की) निशानियाँ हैं
अल-अनआमकुरान सूची
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97आयत

अनुवाद — अल-अनआम 97

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Tuesday, August 18, 2026

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