अल-अनआम · 96/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
فَالِقُ الْإِصْبَاحِ وَجَعَلَ اللَّيْلَ سَكَنًا وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ حُسْبَانًا ۚ ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ الْعَزِيزِ الْعَلِيمِ ۝٩٦
Faaliqul isbaahi wa ja`alal laila sakananw washh shamsa walqamara husbaanaa; zaalika taqdeerul `Azeezil `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
उसी के लिए सुबह की पौ फटी और उसी ने आराम के लिए रात और हिसाब के लिए सूरज और चाँद बनाए ये ख़ुदाए ग़ालिब व दाना के मुक़र्रर किए हुए किरदा (उसूल) हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • फ़ालिक़ुल इज़्बाह: सुबह की रोशनी को अंधेरे से निकालने वाला, यानी सुबह को चीरने वाला।
  • सुकनन: आराम और सुकून की जगह, जहाँ प्राणी चैन पाएँ।
  • हुस्बानन: हिसाब, गणना, यानी एक निश्चित और मापी हुई प्रणाली पर चलने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और बेमिसाल कारीगरी के कुछ अज़ीम नमूने पेश कर रहा है। वही है जो सुबह के उजाले को रात के अंधेरे से चीरकर निकालता है। जब रात का सबसे गहरा अंधेरा छाया होता है, तो वह अपने हुक्म से उसे चीरता है और सुबह की रोशनी फूट पड़ती है। यह उसकी कुदरत का एक ज़िंदा सबूत है जो हर रोज़ हमारी आँखों के सामने आता है।

उसी ने रात को सुकून और आराम का ज़रिया बनाया है। रात में सारे जानदार अपनी थकान उतारते हैं, चैन की नींद सोते हैं और दिन भर की मशक्कत के बाद ताज़ादम हो जाते हैं। यह रात का सुकून अल्लाह की रहमत है, जो उसने अपने बंदों पर किया है।

और सूरज और चाँद को उसने एक मापी हुई गणना पर चलाया है। उनके उगने, डूबने, बदलने और अपनी मंज़िलों पर चलने का एक बारीक हिसाब है। इन्हीं की गति से दिन-रात, महीने और साल बनते हैं, और इंसान अपने कामों का हिसाब लगा पाता है। यह सब कुछ एक अज़ीम और दानिशमंद हस्ती का बनाया हुआ है।

यह सारी कायनात, यह बेहतरीन निज़ाम, यह हर चीज़ का सटीक अंदाज़ा — यह सब उस अल्लाह की तक़दीर (नाप-तौल) है जो अज़ीज़ है, यानी सब पर ग़ालिब है, कोई उसके सामने टिक नहीं सकता, और अलीम है, यानी हर चीज़ का पूरा इल्म रखता है। वह जानता है कि उसकी मख़लूक़ात के लिए क्या बेहतर है, और उसी के हिसाब से सब कुछ चला रहा है।

दावती पहलू:

इस आयत में अल्लाह तआला हमें अपनी कुदरत के नज़ारे दिखा रहा है ताकि हम उसे पहचानें और उसके सामने सर झुकाएँ। जो इंसान सुबह की रोशनी, रात के सुकून और सूरज-चाँद के इस सटीक निज़ाम पर ग़ौर करे, वह कभी यह नहीं कह सकता कि यह सब अपने आप बन गया। यह सब उस हकीम और अज़ीज़ अल्लाह की याद दिलाता है जो हमें हर पल अपनी नेमतों से नवाज़ रहा है। जब हम सुबह उठते हैं, तो यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें फिर से ज़िंदगी दी। जब रात को चैन की नींद सोते हैं, तो यह उसकी मेहरबानी है। यह सब कुछ हमें अल्लाह का शुक्रिया अदा करना सिखाता है और उसकी इबादत की तरफ बुलाता है। यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी कायनात को इस तरह सँभाल रखा है, वह हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों को भी जानता है और उन्हें पूरा करने पर क़ादिर है।

🎧 सुनें

📜 आयत 94-98 — अल-अनआम

94وَلَقَدْ جِئْتُمُونَا فُرَادَىٰ كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَتَرَكْتُم مَّا خَوَّلْنَاكُمْ وَرَاءَ ظُهُورِكُمْ ۖ وَمَا نَرَىٰ مَعَكُمْ شُفَعَاءَكُمُ الَّذِينَ زَعَمْتُمْ أَنَّهُمْ فِيكُمْ شُرَكَاءُ ۚ لَقَد تَّقَطَّعَ بَيْنَكُمْ وَضَلَّ عَنكُم مَّا كُنتُمْ تَزْعُمُونَ
और आख़िर तुम हमारे पास इसी तरह तन्हा आए (ना) जिस तरह हमने तुम को पहली बार पैदा किया था और जो (माल व औलाद) हमने तुमको दिया था वह सब अपने पस्त पुश्त (पीछे) छोड़ आए और तुम्हारे साथ तुम्हारे उन सिफारिश करने वालों को भी नहीं देखते जिन को तुम ख्याल करते थे कि वह तुम्हारी (परवरिश वगैरह) मै (हमारे) साझेदार है अब तो तुम्हारे बाहरी ताल्लुक़ात मनक़तआ (ख़त्म) हो गए और जो कुछ ख्याल करते थे वह सब तुम से ग़ायब हो गए
95۞ إِنَّ اللَّهَ فَالِقُ الْحَبِّ وَالنَّوَىٰ ۖ يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَمُخْرِجُ الْمَيِّتِ مِنَ الْحَيِّ ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ
ख़ुदा ही तो गुठली और दाने को चीर (करके दरख्त ऊगाता) है वही मुर्दे में से ज़िन्दे को निकालता है और वही ज़िन्दा से मुर्दे को निकालने वाला है (लोगों) वही तुम्हारा ख़ुदा है फिर तुम किधर बहके जा रहे हो
96فَالِقُ الْإِصْبَاحِ وَجَعَلَ اللَّيْلَ سَكَنًا وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ حُسْبَانًا ۚ ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ الْعَزِيزِ الْعَلِيمِ
उसी के लिए सुबह की पौ फटी और उसी ने आराम के लिए रात और हिसाब के लिए सूरज और चाँद बनाए ये ख़ुदाए ग़ालिब व दाना के मुक़र्रर किए हुए किरदा (उसूल) हैं
97وَهُوَ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ النُّجُومَ لِتَهْتَدُوا بِهَا فِي ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
और वह वही (ख़ुदा) है जिसने तुम्हारे (नफे के) वास्ते सितारे पैदा किए ताकि तुम जॅगलों और दरियाओं की तारिक़ियों (अंधेरों) में उनसे राह मालूम करो जो लोग वाक़िफकार हैं उनके लिए हमने (अपनी क़ुदरत की) निशानियाँ ख़ूब तफ़सील से बयान कर दी हैं
98وَهُوَ الَّذِي أَنشَأَكُم مِّن نَّفْسٍ وَاحِدَةٍ فَمُسْتَقَرٌّ وَمُسْتَوْدَعٌ ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَفْقَهُونَ
और वह वही ख़ुदा है जिसने तुम लोगों को एक शख़्श से पैदा किया फिर (हर शख़्श के) क़रार की जगह (बाप की पुश्त (पीठ)) और सौंपने की जगह (माँ का पेट) मुक़र्रर है हमने समझदार लोगों के वास्ते (अपनी कुदरत की) निशानियाँ ख़ूब तफसील से बयान कर दी हैं
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अनुवाद — अल-अनआम 96

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Tuesday, August 18, 2026

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