अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- फ़ालिक़ुल इज़्बाह: सुबह की रोशनी को अंधेरे से निकालने वाला, यानी सुबह को चीरने वाला।
- सुकनन: आराम और सुकून की जगह, जहाँ प्राणी चैन पाएँ।
- हुस्बानन: हिसाब, गणना, यानी एक निश्चित और मापी हुई प्रणाली पर चलने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और बेमिसाल कारीगरी के कुछ अज़ीम नमूने पेश कर रहा है। वही है जो सुबह के उजाले को रात के अंधेरे से चीरकर निकालता है। जब रात का सबसे गहरा अंधेरा छाया होता है, तो वह अपने हुक्म से उसे चीरता है और सुबह की रोशनी फूट पड़ती है। यह उसकी कुदरत का एक ज़िंदा सबूत है जो हर रोज़ हमारी आँखों के सामने आता है।
उसी ने रात को सुकून और आराम का ज़रिया बनाया है। रात में सारे जानदार अपनी थकान उतारते हैं, चैन की नींद सोते हैं और दिन भर की मशक्कत के बाद ताज़ादम हो जाते हैं। यह रात का सुकून अल्लाह की रहमत है, जो उसने अपने बंदों पर किया है।
और सूरज और चाँद को उसने एक मापी हुई गणना पर चलाया है। उनके उगने, डूबने, बदलने और अपनी मंज़िलों पर चलने का एक बारीक हिसाब है। इन्हीं की गति से दिन-रात, महीने और साल बनते हैं, और इंसान अपने कामों का हिसाब लगा पाता है। यह सब कुछ एक अज़ीम और दानिशमंद हस्ती का बनाया हुआ है।
यह सारी कायनात, यह बेहतरीन निज़ाम, यह हर चीज़ का सटीक अंदाज़ा — यह सब उस अल्लाह की तक़दीर (नाप-तौल) है जो अज़ीज़ है, यानी सब पर ग़ालिब है, कोई उसके सामने टिक नहीं सकता, और अलीम है, यानी हर चीज़ का पूरा इल्म रखता है। वह जानता है कि उसकी मख़लूक़ात के लिए क्या बेहतर है, और उसी के हिसाब से सब कुछ चला रहा है।
दावती पहलू:
इस आयत में अल्लाह तआला हमें अपनी कुदरत के नज़ारे दिखा रहा है ताकि हम उसे पहचानें और उसके सामने सर झुकाएँ। जो इंसान सुबह की रोशनी, रात के सुकून और सूरज-चाँद के इस सटीक निज़ाम पर ग़ौर करे, वह कभी यह नहीं कह सकता कि यह सब अपने आप बन गया। यह सब उस हकीम और अज़ीज़ अल्लाह की याद दिलाता है जो हमें हर पल अपनी नेमतों से नवाज़ रहा है। जब हम सुबह उठते हैं, तो यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें फिर से ज़िंदगी दी। जब रात को चैन की नींद सोते हैं, तो यह उसकी मेहरबानी है। यह सब कुछ हमें अल्लाह का शुक्रिया अदा करना सिखाता है और उसकी इबादत की तरफ बुलाता है। यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी कायनात को इस तरह सँभाल रखा है, वह हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों को भी जानता है और उन्हें पूरा करने पर क़ादिर है।
📜 आयत 94-98 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 96
सूरा अल-अनआम आयत 96 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसी के लिए सुबह की पौ फटी और उसी ने…सूरा आयत 96/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 94–98. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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