अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَنشَأَكُم (अन्शअकुम): तुम्हें पैदा किया, अस्तित्व में लाया।
- نَفْسٍ وَاحِدَةٍ (नफ़्सिन वाहिदह): एक ही प्राण (आत्मा) से, यानी हज़रत आदम अलैहिस्सलाम।
- مُسْتَقَرٌّ (मुस्तक़र्र): ठहरने की जगह, जहाँ इंसान कुछ समय के लिए रुकता है — यहाँ अर्थ है माँ का गर्भ (रहम)।
- مُسْتَوْدَعٌ (मुस्तौदअ): अमानत रखने की जगह, जहाँ इंसान की नस्ल को सुरक्षित रखा जाए — यहाँ अर्थ है पिता की पीठ (सुल्ब)।
- فَصَّلْنَا (फ़स्सलना): हमने स्पष्ट रूप से विस्तार से बयान कर दिया।
- يَفْقَهُونَ (यफ़्क़हून): समझने वाले, गहरी समझ रखने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपनी कुदरत और हिकमत के नमूने पेश करते हुए फ़रमाता है कि वही वह ज़ात है जिसने तुम सब इंसानों को एक ही प्राण से पैदा किया — वह है हज़रत आदम अलैहिस्सलाम। उन्हें मिट्टी से बनाया, फिर उनकी नस्ल से तुम सबको जारी किया। यानी तुम्हारी शुरुआत एक ही बाप से हुई, ताकि तुम जान लो कि सब इंसान भाई-भाई हैं, और किसी को किसी पर नस्ल, रंग या ज़मीन के बल पर बड़ाई नहीं, बल्कि तक़्वा ही बड़ाई का पैमाना है।
फिर अल्लाह ने तुम्हारे लिए दो जगहें मुक़र्रर कीं:
- मुस्तक़र्र — यानी माँ का गर्भ, जहाँ तुम एक अरसे तक रहते हो, वहाँ तुम्हारी परवरिश होती है, और तुम सुरक्षित रहते हो।
- मुस्तौदअ — यानी पिता की पीठ (सुल्ब), जहाँ तुम्हारी नस्ल को अमानत के तौर पर रखा जाता है, जो आगे चलकर बाप से माँ के गर्भ में स्थानांतरित होती है।
यह अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है कि उसने इंसान की पैदाइश का यह निज़ाम बनाया — एक तरफ़ सुरक्षित ठिकाना (गर्भ), दूसरी तरफ़ अमानत के रूप में नस्ल की हिफ़ाज़त (पिता की पीठ)। यह सब उसकी कुदरत और हिकमत की निशानियाँ हैं।
अल्लाह फ़रमाता है: "हमने अपनी आयतों (निशानियों) को स्पष्ट रूप से विस्तार से बयान कर दिया है उन लोगों के लिए जो समझते हैं।" यानी ये सब निशानियाँ और दलीलें किताब और क़ुरआन में खोलकर बयान कर दी गई हैं, ताकि जो लोग सोच-समझकर गौर करें, वे अपने रब को पहचानें और उसकी इबादत की तरफ़ रुजू करें।
दावती पहलू (नसीहत):
ऐ इंसान! ज़रा सोच — तू एक ही बाप आदम की औलाद है, तो फिर आपस में लड़ाई-झगड़ा, बड़ाई और फ़र्क़ क्यों? यही तो इस्लाम की तालीम है कि सब इंसान भाई हैं। अल्लाह ने तुझे बड़ी मुहब्बत से पैदा किया, तेरी हर स्टेज का इंतज़ाम किया — गर्भ से लेकर दुनिया तक, और दुनिया से आख़िरत तक। क्या यह अल्लाह की मुहब्बत और कुदरत का तक़ाज़ा नहीं कि हम उसके बताए रास्ते पर चलें? क़ुरआन की ये आयतें उन्हीं के लिए फ़ायदेमंद हैं जो दिल से समझना चाहें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढालें। आओ, हम सब अपने रब की नेमतों को पहचानें, उसका शुक्र अदा करें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रहनुमाई में गुज़ारें — यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 96-100 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 98
सूरा अल-अनआम आयत 98 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह वही ख़ुदा है जिसने तुम लोगों को एक…सूरा आयत 98/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 96–100. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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