अल-अनआम · 98/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَهُوَ الَّذِي أَنشَأَكُم مِّن نَّفْسٍ وَاحِدَةٍ فَمُسْتَقَرٌّ وَمُسْتَوْدَعٌ ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَفْقَهُونَ ۝٩٨
Wa hhuwal lazeee ansha akum min nasinw waahidatin famustaqarrunw wa mustawda`; qad fassalnal Aayaati liqaw miny-yafqahoon
📖 हिंदी अर्थ
और वह वही ख़ुदा है जिसने तुम लोगों को एक शख़्श से पैदा किया फिर (हर शख़्श के) क़रार की जगह (बाप की पुश्त (पीठ)) और सौंपने की जगह (माँ का पेट) मुक़र्रर है हमने समझदार लोगों के वास्ते (अपनी कुदरत की) निशानियाँ ख़ूब तफसील से बयान कर दी हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَنشَأَكُم (अन्शअकुम): तुम्हें पैदा किया, अस्तित्व में लाया।
  • نَفْسٍ وَاحِدَةٍ (नफ़्सिन वाहिदह): एक ही प्राण (आत्मा) से, यानी हज़रत आदम अलैहिस्सलाम।
  • مُسْتَقَرٌّ (मुस्तक़र्र): ठहरने की जगह, जहाँ इंसान कुछ समय के लिए रुकता है — यहाँ अर्थ है माँ का गर्भ (रहम)।
  • مُسْتَوْدَعٌ (मुस्तौदअ): अमानत रखने की जगह, जहाँ इंसान की नस्ल को सुरक्षित रखा जाए — यहाँ अर्थ है पिता की पीठ (सुल्ब)।
  • فَصَّلْنَا (फ़स्सलना): हमने स्पष्ट रूप से विस्तार से बयान कर दिया।
  • يَفْقَهُونَ (यफ़्क़हून): समझने वाले, गहरी समझ रखने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी कुदरत और हिकमत के नमूने पेश करते हुए फ़रमाता है कि वही वह ज़ात है जिसने तुम सब इंसानों को एक ही प्राण से पैदा किया — वह है हज़रत आदम अलैहिस्सलाम। उन्हें मिट्टी से बनाया, फिर उनकी नस्ल से तुम सबको जारी किया। यानी तुम्हारी शुरुआत एक ही बाप से हुई, ताकि तुम जान लो कि सब इंसान भाई-भाई हैं, और किसी को किसी पर नस्ल, रंग या ज़मीन के बल पर बड़ाई नहीं, बल्कि तक़्वा ही बड़ाई का पैमाना है।

फिर अल्लाह ने तुम्हारे लिए दो जगहें मुक़र्रर कीं:

  1. मुस्तक़र्र — यानी माँ का गर्भ, जहाँ तुम एक अरसे तक रहते हो, वहाँ तुम्हारी परवरिश होती है, और तुम सुरक्षित रहते हो।
  2. मुस्तौदअ — यानी पिता की पीठ (सुल्ब), जहाँ तुम्हारी नस्ल को अमानत के तौर पर रखा जाता है, जो आगे चलकर बाप से माँ के गर्भ में स्थानांतरित होती है।

यह अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है कि उसने इंसान की पैदाइश का यह निज़ाम बनाया — एक तरफ़ सुरक्षित ठिकाना (गर्भ), दूसरी तरफ़ अमानत के रूप में नस्ल की हिफ़ाज़त (पिता की पीठ)। यह सब उसकी कुदरत और हिकमत की निशानियाँ हैं।

अल्लाह फ़रमाता है: "हमने अपनी आयतों (निशानियों) को स्पष्ट रूप से विस्तार से बयान कर दिया है उन लोगों के लिए जो समझते हैं।" यानी ये सब निशानियाँ और दलीलें किताब और क़ुरआन में खोलकर बयान कर दी गई हैं, ताकि जो लोग सोच-समझकर गौर करें, वे अपने रब को पहचानें और उसकी इबादत की तरफ़ रुजू करें।


दावती पहलू (नसीहत):

ऐ इंसान! ज़रा सोच — तू एक ही बाप आदम की औलाद है, तो फिर आपस में लड़ाई-झगड़ा, बड़ाई और फ़र्क़ क्यों? यही तो इस्लाम की तालीम है कि सब इंसान भाई हैं। अल्लाह ने तुझे बड़ी मुहब्बत से पैदा किया, तेरी हर स्टेज का इंतज़ाम किया — गर्भ से लेकर दुनिया तक, और दुनिया से आख़िरत तक। क्या यह अल्लाह की मुहब्बत और कुदरत का तक़ाज़ा नहीं कि हम उसके बताए रास्ते पर चलें? क़ुरआन की ये आयतें उन्हीं के लिए फ़ायदेमंद हैं जो दिल से समझना चाहें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढालें। आओ, हम सब अपने रब की नेमतों को पहचानें, उसका शुक्र अदा करें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रहनुमाई में गुज़ारें — यही सबसे बड़ी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 96-100 — अल-अनआम

96فَالِقُ الْإِصْبَاحِ وَجَعَلَ اللَّيْلَ سَكَنًا وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ حُسْبَانًا ۚ ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ الْعَزِيزِ الْعَلِيمِ
उसी के लिए सुबह की पौ फटी और उसी ने आराम के लिए रात और हिसाब के लिए सूरज और चाँद बनाए ये ख़ुदाए ग़ालिब व दाना के मुक़र्रर किए हुए किरदा (उसूल) हैं
97وَهُوَ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ النُّجُومَ لِتَهْتَدُوا بِهَا فِي ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
और वह वही (ख़ुदा) है जिसने तुम्हारे (नफे के) वास्ते सितारे पैदा किए ताकि तुम जॅगलों और दरियाओं की तारिक़ियों (अंधेरों) में उनसे राह मालूम करो जो लोग वाक़िफकार हैं उनके लिए हमने (अपनी क़ुदरत की) निशानियाँ ख़ूब तफ़सील से बयान कर दी हैं
98وَهُوَ الَّذِي أَنشَأَكُم مِّن نَّفْسٍ وَاحِدَةٍ فَمُسْتَقَرٌّ وَمُسْتَوْدَعٌ ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَفْقَهُونَ
और वह वही ख़ुदा है जिसने तुम लोगों को एक शख़्श से पैदा किया फिर (हर शख़्श के) क़रार की जगह (बाप की पुश्त (पीठ)) और सौंपने की जगह (माँ का पेट) मुक़र्रर है हमने समझदार लोगों के वास्ते (अपनी कुदरत की) निशानियाँ ख़ूब तफसील से बयान कर दी हैं
99وَهُوَ الَّذِي أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجْنَا بِهِ نَبَاتَ كُلِّ شَيْءٍ فَأَخْرَجْنَا مِنْهُ خَضِرًا نُّخْرِجُ مِنْهُ حَبًّا مُّتَرَاكِبًا وَمِنَ النَّخْلِ مِن طَلْعِهَا قِنْوَانٌ دَانِيَةٌ وَجَنَّاتٍ مِّنْ أَعْنَابٍ وَالزَّيْتُونَ وَالرُّمَّانَ مُشْتَبِهًا وَغَيْرَ مُتَشَابِهٍ ۗ انظُرُوا إِلَىٰ ثَمَرِهِ إِذَا أَثْمَرَ وَيَنْعِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكُمْ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
और वह वही (क़ादिर तवाना है) जिसने आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने उसके ज़रिए से हर चीज़ के कोए निकालें फिर हम ही ने उससे हरी भरी टहनियाँ निकालीं कि उससे हम बाहम गुत्थे दाने निकालते हैं और छुहारे के बोर (मुन्जिर) से लटके हुए गुच्छे पैदा किए और अंगूर और ज़ैतून और अनार के बाग़ात जो बाहम सूरत में एक दूसरे से मिलते जुलते और (मजे में) जुदा जुदा जब ये पिघले और पक्के तो उसके फल की तरफ ग़ौर तो करो बेशक अमन में ईमानदार लोगों के लिए बहुत सी (ख़ुदा की) निशानियाँ हैं
100وَجَعَلُوا لِلَّهِ شُرَكَاءَ الْجِنَّ وَخَلَقَهُمْ ۖ وَخَرَقُوا لَهُ بَنِينَ وَبَنَاتٍ بِغَيْرِ عِلْمٍ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يَصِفُونَ
और उन (कम्बख्तों) ने जिन्नात को ख़ुदा का शरीक बनाया हालॉकि जिन्नात को भी ख़ुदा ही ने पैदा किया उस पर भी उन लोगों ने बे समझे बूझे ख़ुदा के लिए बेटे बेटियाँ गढ़ डालीं जो बातों में लोग (उसकी शान में) बयान करते हैं उससे वह पाक व पाकीज़ा और बरतर है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
98आयत

अनुवाद — अल-अनआम 98

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Tuesday, August 18, 2026

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