अल-क़लम · 41/52
अनुवाद उच्चारण — अल-क़लम
أَمْ لَهُمْ شُرَكَاءُ فَلْيَأْتُوا بِشُرَكَائِهِمْ إِن كَانُوا صَادِقِينَ ۝٤١
Am lahum shurakaaa`u falyaatoo bishurakaaa `ihim in kaanoo saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
या (इस बाब में) उनके और लोग भी शरीक हैं तो अगर ये लोग सच्चे हैं तो अपने शरीकों को सामने लाएँ

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • शुरकाउ (شُرَكَاءُ): साझेदार, भागीदार। यहाँ अर्थ है—वे झूठे देवता और मूर्तियाँ जिन्हें वे अल्लाह का साझी ठहराते हैं।
  • फ़ल-यअतू (فَلْيَأْتُوا): तो उन्हें लाना चाहिए, लेकर आएँ।
  • सादिक़ीन (صَادِقِينَ): सच्चे, अपने दावे में सच्चे।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने उन मुशरिकीन (बहुदेववादियों) को चुनौती दी है जो क़ियामत के दिन मोमिनीन के साथ बराबरी का दावा करते थे और कहते थे कि हमें भी वही इज़्ज़त और अच्छा अंजाम मिलेगा जो मुसलमानों को मिलेगा। अल्लाह फ़रमाता है—क्या उनके पास कोई साझेदार हैं (अल्लाह के साथ) जो उनके इस दावे की ज़मानत दें और उन्हें इस बात पर मदद करें कि वे मोमिनीन के बराबर हो जाएँ? अगर सच में उनके पास ऐसे साझेदार हैं, तो उन्हें लेकर आएँ! अगर वे अपने दावे में सच्चे हैं, तो अपने इन तथाकथित मददगारों को पेश करें।

यह एक ऐसी चुनौती है जिसका जवाब देना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं। क्योंकि ये तथाकथित साझेदार—चाहे वे मूर्तियाँ हों, चाहे देवता, चाहे कोई और—न तो ख़ुद किसी काम के हैं, न किसी की मदद कर सकते हैं। वे न तो सुनते हैं, न देखते हैं, न किसी को फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और न नुक़सान। फिर वे किसी की ज़मानत कैसे देंगे?

अल्लाह तआला ने इस आयत में उनके दावे की बेबुनियादी को खोलकर रख दिया है। अगर उनके पास सच में कोई साझेदार हैं जो अल्लाह के फ़ैसले में दख़ल दे सकते हैं, तो वे उन्हें क्यों नहीं पेश करते? यह साबित करता है कि उनके पास कोई साझेदार नहीं, कोई मददगार नहीं, कोई ज़मानत देने वाला नहीं। उनका दावा सिर्फ़ झूठ और धोखा है।


दावती पहलू (इस्लामी दृष्टिकोण):

यह आयत हमें सिखाती है कि तौहीद (एकेश्वरवाद) ही सच्चा रास्ता है। जो लोग अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराते हैं, वे सिर्फ़ अपने आपको धोखा देते हैं। उनके पास कोई ठोस दलील नहीं, कोई सबूत नहीं। इसके विपरीत, इस्लाम एक साफ़ और मुकम्मल दीन है—जिसमें अल्लाह की वहदानिय्यत (एकता) का पैग़ाम है, जो इंसान को ग़ुलामी से आज़ाद करता है और उसे सिर्फ़ अल्लाह के सामने झुकना सिखाता है।

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक चेतावनी है जो अल्लाह के सिवा किसी और से मदद माँगता है, किसी और पर भरोसा करता है, या किसी और को अल्लाह का साझी बनाता है। अल्लाह तआला किसी का साझी नहीं चाहता, और न ही उसे कोई साझी पेश कर सकता है।

आओ हम सब अपने दिलों को सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ लगाएँ, उसी से मदद माँगें, उसी पर भरोसा करें। क्योंकि सच्ची इज़्ज़त, सच्ची कामयाबी और सच्चा सुकून सिर्फ़ अल्लाह की इबादत में है। जो लोग इस हक़ीक़त को समझ गए, वही असल में कामयाब हैं—दुनिया में भी और आख़िरत में भी।



📜 आयत 39-43 — अल-क़लम

39أَمْ لَكُمْ أَيْمَانٌ عَلَيْنَا بَالِغَةٌ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ ۙ إِنَّ لَكُمْ لَمَا تَحْكُمُونَ
या तुमने हमसे क़समें ले रखी हैं जो रोज़े क़यामत तक चली जाएगी कि जो कुछ तुम हुक्म दोगे वही तुम्हारे लिए ज़रूर हाज़िर होगा
40سَلْهُمْ أَيُّهُم بِذَٰلِكَ زَعِيمٌ
उनसे पूछो तो कि उनमें इसका कौन ज़िम्मेदार है
41أَمْ لَهُمْ شُرَكَاءُ فَلْيَأْتُوا بِشُرَكَائِهِمْ إِن كَانُوا صَادِقِينَ
या (इस बाब में) उनके और लोग भी शरीक हैं तो अगर ये लोग सच्चे हैं तो अपने शरीकों को सामने लाएँ
42يَوْمَ يُكْشَفُ عَن سَاقٍ وَيُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ
जिस दिन पिंडली खोल दी जाए और (काफ़िर) लोग सजदे के लिए बुलाए जाएँगे तो (सजदा) न कर सकेंगे
43خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ وَقَدْ كَانُوا يُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ وَهُمْ سَالِمُونَ
उनकी ऑंखें झुकी हुई होंगी रूसवाई उन पर छाई होगी और (दुनिया में) ये लोग सजदे के लिए बुलाए जाते और हटटे कटटे तन्दरूस्त थे
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
41आयत

अनुवाद — अल-क़लम 41

सूरा अल-क़लम आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या (इस बाब में) उनके और लोग भी शरीक हैं…

सूरा आयत 41/52 — अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़लम सुनें, अल-क़लम अनुवाद, अल-क़लम mp3, अल-क़लम pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए