अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَلْهُمْ: उनसे पूछिए
- زَعِيمٌ: ज़मानत करने वाला, ज़िम्मेदार, कफ़ील
तफ़सीर:
ऐ नबी! इन मुशरिकों से पूछिए जो यह दावा करते हैं कि आख़िरत में उन्हें भी वही कुछ मिलेगा जो मुसलमानों को मिलेगा, या वे कहते हैं कि हमारा दर्जा तुमसे बढ़कर है — उनसे पूछिए कि इस दावे का ज़िम्मेदार और ज़मानत करने वाला तुममें से कौन है? कौन सा व्यक्ति इस बात की गारंटी ले सकता है कि तुम्हारा यह दावा सच्चा है?
यह प्रश्न उन्हें उनके खोखले दावों की हक़ीक़त दिखाता है। जब कोई व्यक्ति कोई बड़ा दावा करता है, तो उससे पूछा जाता है कि क्या तुम्हारे पास कोई प्रमाण है? क्या तुम्हारे पास कोई ज़मानत देने वाला है? यही बात अल्लाह तआला ने इन मुशरिकों से कहलवाई — कि यदि तुम सच्चे हो, तो अपने दावे का कोई ज़िम्मेदार या प्रमाण पेश करो।
यह आयत हमें सिखाती है कि दीन के मामले में बिना प्रमाण के दावा करना बिल्कुल बेकार है। इस्लाम एक ऐसा दीन है जो तर्क और प्रमाण पर आधारित है। अल्लाह तआला ने क़ुरआन में बार-बार लोगों को चुनौती दी है कि यदि तुम सच्चे हो तो अपने दावे का सबूत लाओ। यही इस्लाम की सच्चाई है कि वह हर मामले में स्पष्ट प्रमाण और ठोस तर्क पेश करता है।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें यह भी बताती है कि हमें अपने ईमान और अपने दीन पर पूरा यक़ीन रखना चाहिए, क्योंकि हमारा दीन सच्चाई पर आधारित है। जब हम क़ुरआन और सुन्नत को पढ़ते हैं, तो हमें हर जगह स्पष्ट प्रमाण और ठोस तर्क मिलते हैं। यही इस दीन की खूबसूरती है कि यह अक़्ल और दिल दोनों को संतुष्ट करता है।
अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमें सच्चाई पर साबित क़दम रखने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से बनाए जो अपने दावे को अपने अमल से साबित करते हैं। आमीन।
📜 आयत 38-42 — अल-क़लम
अनुवाद — अल-क़लम 40
सूरा अल-क़लम आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनसे पूछो तो कि उनमें इसका कौन ज़िम्मेदार हैसूरा आयत 40/52 — अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़लम सुनें, अल-क़लम अनुवाद, अल-क़लम mp3, अल-क़लम pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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