अल-क़लम · 42/52
अनुवाद उच्चारण — अल-क़लम
يَوْمَ يُكْشَفُ عَن سَاقٍ وَيُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ ۝٤٢
Yawma yukshafu `am saaqinw wa yud`awna ilas sujoodi falaa yastatee`oon
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन पिंडली खोल दी जाए और (काफ़िर) लोग सजदे के लिए बुलाए जाएँगे तो (सजदा) न कर सकेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُكْشَفُ عَن سَاقٍ: यानी क़यामत के दिन हौलनाक स्थिति पैदा होगी और अल्लाह तआला अपनी शान के अनुकूल अपनी पिंडली खोलेगा, जिसकी कोई मिसाल नहीं।
  • يُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ: उन्हें सज्दे के लिए बुलाया जाएगा।
  • فَلَا يَسْتَطِيعُونَ: तो वे सज्दा नहीं कर सकेंगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत क़यामत के दिन के एक बहुत ही भयानक और अहम दृश्य का वर्णन करती है। उस दिन जब अल्लाह तआला अपनी शान के अनुकूल अपनी पिंडली खोलेगा और हौलनाक स्थिति पैदा होगी, तो सभी लोगों को सज्दे के लिए बुलाया जाएगा। मोमिन पुरुष और मोमिन महिलाएं उस समय सज्दे में गिर जाएंगी, क्योंकि दुनिया में उन्होंने अल्लाह की इबादत की थी और सज्दे के आदी थे। लेकिन जो लोग दुनिया में रिया (दिखावे) और शोहरत के लिए सज्दा करते थे, या जिन्होंने अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ा था—काफ़िर और मुनाफ़िक़—वे उस दिन सज्दा करना चाहेंगे, लेकिन उनकी पीठ लोहे की चादर की तरह सख्त हो जाएगी और वे सज्दा नहीं कर पाएंगे। यह उनके लिए बहुत बड़ी रुसवाई और अज़ाब का क्षण होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सज्दा अल्लाह की सबसे बड़ी इबादत है। जो लोग दुनिया में अल्लाह के सामने अपना माथा झुकाते हैं, वे आख़िरत में भी सज्दे की तौफ़ीक़ पाएंगे और उन्हें इसका बड़ा इनाम मिलेगा। लेकिन जो लोग अहंकार और दिखावे के कारण सज्दे से दूर रहते हैं, वे उस दिन पछताएंगे, लेकिन पछताने का कोई फायदा नहीं होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी नमाज़ों को सच्चे दिल से अदा करें, सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए, ताकि क़यामत के दिन हम उन लोगों में शामिल हों जिन्हें सज्दे की तौफ़ीक़ मिलेगी और हमारा चेहरा उस दिन नूरानी होगा। याद रखिए, सज्दा वह अमल है जो इंसान को अल्लाह के सबसे करीब लाता है और शैतान को उससे दूर करता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को सज्दों की रोशनी से रोशन करें, ताकि उस बड़े दिन हमारा माथा अल्लाह के सामने झुक सके और हम कामयाबी पा सकें।



📜 आयत 40-44 — अल-क़लम

40سَلْهُمْ أَيُّهُم بِذَٰلِكَ زَعِيمٌ
उनसे पूछो तो कि उनमें इसका कौन ज़िम्मेदार है
41أَمْ لَهُمْ شُرَكَاءُ فَلْيَأْتُوا بِشُرَكَائِهِمْ إِن كَانُوا صَادِقِينَ
या (इस बाब में) उनके और लोग भी शरीक हैं तो अगर ये लोग सच्चे हैं तो अपने शरीकों को सामने लाएँ
42يَوْمَ يُكْشَفُ عَن سَاقٍ وَيُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ
जिस दिन पिंडली खोल दी जाए और (काफ़िर) लोग सजदे के लिए बुलाए जाएँगे तो (सजदा) न कर सकेंगे
43خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ وَقَدْ كَانُوا يُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ وَهُمْ سَالِمُونَ
उनकी ऑंखें झुकी हुई होंगी रूसवाई उन पर छाई होगी और (दुनिया में) ये लोग सजदे के लिए बुलाए जाते और हटटे कटटे तन्दरूस्त थे
44فَذَرْنِي وَمَن يُكَذِّبُ بِهَٰذَا الْحَدِيثِ ۖ سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ
तो मुझे उस कलाम के झुठलाने वाले से समझ लेने दो हम उनको आहिस्ता आहिस्ता इस तरह पकड़ लेंगे कि उनको ख़बर भी न होगी
अल-क़लमकुरान सूची
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42आयत

अनुवाद — अल-क़लम 42

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Tuesday, August 18, 2026

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