Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नफ्सिन वाहिदा: एक ही आत्मा (यानी हज़रत आदम अलैहिस्सलाम)
- ज़ौजहा: उसका जीवनसाथी (हज़रत हव्वा)
- लियस्कुना इलैहा: ताकि वह उसके पास सुकून और चैन पाए
- तगश्शाहा: उससे संबंध बनाया (वैवाहिक संबंध)
- हम्लन ख़फ़ीफ़न: हल्का गर्भ (शुरुआती अवस्था में जिसका एहसास कम हो)
- फमर्रत बिही: वह उसे लेकर चलती रही (अपने कामों में)
- अस्क़लत: गर्भ भारी हो गया
- सालिहन: स्वस्थ और पूर्ण शरीर वाला बच्चा
- शाकिरीन: कृतज्ञता जताने वाले
व्याख्या:
अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और रहमत का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि वही वह ज़ात है जिसने तुम सब इंसानों को एक ही आत्मा से पैदा किया — और वह हैं हज़रत आदम अलैहिस्सलाम। फिर उन्हीं से उनकी जीवनसाथी हज़रत हव्वा को पैदा किया, ताकि वह उनके पास सुकून पाएं, उनसे अनसियत हो और उनके दिल को चैन मिले। यह अल्लाह की बेपनाह हिकमत है कि उसने मर्द और औरत के बीच मुहब्बत और सुकून का रिश्ता रखा।
फिर जब पति ने अपनी पत्नी से संबंध बनाया, तो वह हल्के गर्भ से गर्भवती हुई — शुरुआत में उसे इसका ज़्यादा एहसास नहीं होता, इसलिए वह अपने दैनिक कामों में लगी रही, उठती-बैठती रही। लेकिन जब गर्भ भारी हुआ और बच्चा पेट में बड़ा होने लगा, और जन्म का वक़्त करीब आया, तो पति-पत्नी दोनों ने मिलकर अपने रब से दुआ की: "ऐ हमारे रब! अगर तूने हमें एक स्वस्थ, पूर्ण और सलीम बच्चा अता किया, तो हम तेरे बहुत शुक्रगुज़ार बंदों में से होंगे।"
यह आयत हमें सिखाती है कि माता-पिता को चाहिए कि वे संतान की नेकी और सलामती के लिए अल्लाह से दुआ करें, और जब अल्लाह उन्हें नेक और स्वस्थ संतान दे, तो उसकी नेमत का शुक्र अदा करें। अल्लाह की रहमत का तक़ाज़ा है कि वह अपने बंदों की दुआ सुनता है और उन्हें सालिह संतान अता फ़रमाता है। यही वह रिश्ता है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाता है — दुआ और शुक्र का रिश्ता। जो बंदा अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और नेमतें देता है, क्योंकि अल्लाह ने फ़रमाया: "अगर तुम शुक्र करोगे तो मैं तुम्हें और ज़्यादा दूँगा।"
इस आयत से हमें यह भी सबक़ मिलता है कि परिवार की बुनियाद अल्लाह की याद, उसकी रहमत और उसके शुक्र पर होनी चाहिए। जब माँ-बाप अल्लाह से दुआ करते हैं और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करते हैं, तो अल्लाह उनके घर में बरकत डालता है और उनकी संतान को नेक बनाता है।
📜 आयत 187-191 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 189
सूरा अल-आराफ आयत 189 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह ख़ुदा ही तो है जिसने तुमको एक शख़्श (आदम)…सूरा आयत 189/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 187–191. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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