अल-आराफ · 38/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قَالَ ادْخُلُوا فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِكُم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ فِي النَّارِ ۖ كُلَّمَا دَخَلَتْ أُمَّةٌ لَّعَنَتْ أُخْتَهَا ۖ حَتَّىٰ إِذَا ادَّارَكُوا فِيهَا جَمِيعًا قَالَتْ أُخْرَاهُمْ لِأُولَاهُمْ رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ أَضَلُّونَا فَآتِهِمْ عَذَابًا ضِعْفًا مِّنَ النَّارِ ۖ قَالَ لِكُلٍّ ضِعْفٌ وَلَٰكِن لَّا تَعْلَمُونَ ۝٣٨
Qaalad khuloo feee umamin qad khalat min qablikum minal jinni wal insifin naari kullamaa dakhalat ummatul la`anat ukhtahaa hattaaa izad daarakoo feehaa jamee`an qaalat ukhraahum li oolaahum Rabbannaa haaa`u laaa`i adalloonaa fa aatihim `azaaban di`fam minan naari qaala likullin di funw wa laakil laa ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
(तब ख़ुदा उनसे) फरमाएगा कि जो लोग जिन व इन्स के तुम से पहले बसे हैं उन्हीं में मिलजुल कर तुम भी जहन्नुम वासिल हो जाओ (और ) अहले जहन्नुम का ये हाल होगा कि जब उसमें एक गिरोह दाख़िल होगा तो अपने साथी दूसरे गिरोह पर लानत करेगा यहाँ तक कि जब सब के सब पहुंच जाएगें तो उनमें की पिछली जमात अपने से पहली जमाअत के वास्ते बदद्आ करेगी कि परवरदिगार उन्हीं लोगों ने हमें गुमराह किया था तो उन पर जहन्नुम का दोगुना अज़ाब फरमा (इस पर) ख़ुदा फरमाएगा कि हर एक के वास्ते दो गुना अज़ाब है लेकिन (तुम पर) तुफ़ है तुम जानते नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ادْخُلُوا فِي أُمَمٍ: दाखिल हो जाओ उन गिरोहों के साथ
  • قَدْ خَلَتْ: जो गुज़र चुकी हैं
  • لَعَنَتْ أُخْتَهَا: अपने (धर्म वाले) साथी को लानत दी
  • ادَّارَكُوا: एक दूसरे के पीछे पहुँच गए, इकट्ठे हो गए
  • أُخْرَاهُمْ: उनके पिछले (अनुयायी)
  • لِأُولَاهُمْ: उनके अगले (नेताओं) के कारण
  • ضِعْفًا: दोगुना (दुगुना अज़ाब)

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला क़यामत के दिन उन ज़ालिमों और मुशरिकों से फ़रमाएगा: "तुम भी उन उम्मतों के साथ जहन्नम में दाखिल हो जाओ जो तुमसे पहले जिन्न और इंसानों में से कुफ़्र और गुमराही पर थीं।" यह एक बहुत ही डरावना और रोने वाला दृश्य होगा। जब भी कोई उम्मत (समुदाय) जहन्नम में दाखिल होगी, तो वह अपने उस साथी उम्मत को लानत देगी जो उससे पहले कुफ़्र में थी और जिसकी पैरवी करके वे गुमराह हुए। यानी जो लोग किसी नेता या गिरोह की तक़लीद करके कुफ़्र पर ज़िंदा रहे, वे उन्हें लानत देंगे।

यहाँ तक कि जब सब लोग जहन्नम में इकट्ठे हो जाएँगे — पहले वाले और पिछले वाले, नेता और अनुयायी — तो पिछले लोग (जो दुनिया में कमज़ोर और पैरवी करने वाले थे) अपने नेताओं की वजह से अल्लाह से कहेंगे: "ऐ हमारे रब! इन्होंने ही हमें रास्ते से भटकाया, इन्होंने ही हमें गुमराह किया। इन्हें तू आग का दोगुना अज़ाब दे, क्योंकि ये ख़ुद गुमराह हुए और हमें भी गुमराह किया।"

तब अल्लाह तआला जवाब में फ़रमाएगा: "तुम में से हर एक के लिए दोगुना अज़ाब है — नेताओं के लिए भी दोगुना और पैरवी करने वालों के लिए भी दोगुना।" लेकिन तुम लोग इस हक़ीक़त को नहीं जानते कि हर गिरोह का अज़ाब कितना भयानक और अलग-अलग होगा। यानी सबको उनके कर्मों के हिसाब से पूरा-पूरा अज़ाब मिलेगा, और कोई भी इससे बच नहीं पाएगा।

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें बहुत बड़ी नसीहत देती है कि हम अपने नेताओं, बुज़ुर्गों, या समाज के दबाव में आकर कभी भी गलत रास्ता न अपनाएँ। क़यामत के दिन कोई बहाना क़बूल नहीं होगा कि "हमने तो अपने बड़ों की पैरवी की थी।" हर इंसान अपने आमाल के लिए ख़ुद ज़िम्मेदार है। यह भी सीख है कि जो लोग दूसरों को गुमराह करते हैं, उन पर उतना ही गुनाह है जितना उन पर जो उनकी पैरवी करते हैं, बल्कि कुछ मामलों में ज़्यादा भी। इसलिए हमें चाहिए कि हम सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की बात मानें, क्योंकि यही रास्ता नजात (मुक्ति) का है। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 36-40 — अल-आराफ

36وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उनसे सरताबी कर बैठे वह लोग जहन्नुमी हैं कि वह उसमें हमेशा रहेगें
37فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَوْ كَذَّبَ بِآيَاتِهِ ۚ أُولَٰئِكَ يَنَالُهُمْ نَصِيبُهُم مِّنَ الْكِتَابِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا جَاءَتْهُمْ رُسُلُنَا يَتَوَفَّوْنَهُمْ قَالُوا أَيْنَ مَا كُنتُمْ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ
तो जो शख्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या उसकी आयतों को झुठलाए उससे बढ़कर ज़ालिम और कौन होगा फिर तो वह लोग हैं जिन्हें उनकी (तक़दीर) का लिखा हिस्सा (रिज़क) वग़ैरह मिलता रहेगा यहाँ तक कि जब हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) उनके पास आकर उनकी रूह कब्ज़ करेगें तो (उनसे) पूछेगें कि जिन्हें तुम ख़ुदा को छोड़कर पुकारा करते थे अब वह (कहाँ हैं तो वह कुफ्फार) जवाब देगें कि वह सब तो हमें छोड़ कर चल चंपत हुए और अपने खिलाफ आप गवाही देगें कि वह बेशक काफ़िर थे
38قَالَ ادْخُلُوا فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِكُم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ فِي النَّارِ ۖ كُلَّمَا دَخَلَتْ أُمَّةٌ لَّعَنَتْ أُخْتَهَا ۖ حَتَّىٰ إِذَا ادَّارَكُوا فِيهَا جَمِيعًا قَالَتْ أُخْرَاهُمْ لِأُولَاهُمْ رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ أَضَلُّونَا فَآتِهِمْ عَذَابًا ضِعْفًا مِّنَ النَّارِ ۖ قَالَ لِكُلٍّ ضِعْفٌ وَلَٰكِن لَّا تَعْلَمُونَ
(तब ख़ुदा उनसे) फरमाएगा कि जो लोग जिन व इन्स के तुम से पहले बसे हैं उन्हीं में मिलजुल कर तुम भी जहन्नुम वासिल हो जाओ (और ) अहले जहन्नुम का ये हाल होगा कि जब उसमें एक गिरोह दाख़िल होगा तो अपने साथी दूसरे गिरोह पर लानत करेगा यहाँ तक कि जब सब के सब पहुंच जाएगें तो उनमें की पिछली जमात अपने से पहली जमाअत के वास्ते बदद्आ करेगी कि परवरदिगार उन्हीं लोगों ने हमें गुमराह किया था तो उन पर जहन्नुम का दोगुना अज़ाब फरमा (इस पर) ख़ुदा फरमाएगा कि हर एक के वास्ते दो गुना अज़ाब है लेकिन (तुम पर) तुफ़ है तुम जानते नहीं
39وَقَالَتْ أُولَاهُمْ لِأُخْرَاهُمْ فَمَا كَانَ لَكُمْ عَلَيْنَا مِن فَضْلٍ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ
और उनमें से पहली जमाअत पिछली जमाअत की तरफ मुख़ातिब होकर कहेगी कि अब तो तुमको हमपर कोई फज़ीलत न रही पस (हमारी तरह) तुम भी अपने करतूत की बदौलत अज़ाब (के मज़े) चखो बेशक जिन लोगों ने हमारे आयात को झुठलाया
40إِنَّ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ أَبْوَابُ السَّمَاءِ وَلَا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ حَتَّىٰ يَلِجَ الْجَمَلُ فِي سَمِّ الْخِيَاطِ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُجْرِمِينَ
और उनसे सरताबी की न उनके लिए आसमान के दरवाज़े खोले जाएंगें और वह बेहश्त ही में दाखिल होने पाएगें यहाँ तक कि ऊँट सूई के नाके में होकर निकल जाए (यानि जिस तरह ये मुहाल है) उसी तरह उनका बेहश्त में दाखिल होना मुहाल है और हम मुजरिमों को ऐसी ही सज़ा दिया करते हैं उनके लिए जहन्नुम (की आग) का बिछौना होगा
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अनुवाद — अल-आराफ 38

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सूरा आयत 38/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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