अल-आराफ · 39/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَقَالَتْ أُولَاهُمْ لِأُخْرَاهُمْ فَمَا كَانَ لَكُمْ عَلَيْنَا مِن فَضْلٍ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ ۝٣٩
Wa qaalat oolaahum li ukhraahum famaa kaana lakum `alainaa min fadlin fazooqul azaaba bimaa kuntum taksiboon
📖 हिंदी अर्थ
और उनमें से पहली जमाअत पिछली जमाअत की तरफ मुख़ातिब होकर कहेगी कि अब तो तुमको हमपर कोई फज़ीलत न रही पस (हमारी तरह) तुम भी अपने करतूत की बदौलत अज़ाब (के मज़े) चखो बेशक जिन लोगों ने हमारे आयात को झुठलाया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُولَاهُمْ: उनके अग्रणी, नेता, बड़े लोग।
  • أُخْرَاهُمْ: उनके पिछले लोग, अनुयायी, सामान्य अनुयायी।
  • فَضْلٍ: कोई श्रेष्ठता, कोई बड़ाई, कोई अतिरिक्त अधिकार।
  • فَذُوقُوا: तो चखो, अनुभव करो।
  • تَكْسِبُونَ: तुम कमाते थे, अर्जित करते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नेता और बड़े लोग, जिन्होंने दूसरों को गुमराह किया था, और उनके अनुयायी, जिन्होंने उनकी बात मानकर गलती की थी, दोनों जहन्नम में इकट्ठे होंगे, तो वहाँ एक दूसरे से झगड़ने और बहस करने लगेंगे। उस समय नेता और अग्रणी लोग अपने अनुयायियों से कहेंगे: "हमारी तुम पर कोई श्रेष्ठता नहीं है, न ही हमारे पास तुमसे बढ़कर कोई अधिकार या दलील थी। हम सब इस गुमराही और कुफ्र में बराबर थे। तुमने भी अपनी मर्जी से हमारी बात मानी और हमारे पीछे चले, जबकि तुम्हारे पास सोचने-समझने की शक्ति थी। इसलिए अब हमारी तुम पर कोई बड़ाई नहीं है, और न ही तुम्हारे पास हमारे मुकाबले कोई अतिरिक्त दलील है।"

फिर अल्लाह तआला उन सबको, नेताओं और अनुयायियों दोनों को, एक साथ संबोधित करते हुए कहेंगे: "तो अब तुम सब उस आज़ाब (यातना) का मज़ा चखो, जो तुम्हारे अपने किए हुए कर्मों का नतीजा है। यह यातना तुम्हारे कुफ्र, शिर्क और गुनाहों की सज़ा है, जो तुम दुनिया में कमाते रहे थे।" यानी आज़ाब का कारण कोई और नहीं, बल्कि उनके अपने कर्म हैं, इसलिए वे किसी और को दोष नहीं दे सकते।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह के यहाँ हर इंसान अपने कर्मों का ज़िम्मेदार है। नेता और अनुयायी, दोनों अपनी-अपनी गलतियों की सज़ा पाएँगे, और कोई किसी का बोझ नहीं उठाएगा।
  2. यह हमें सिखाती है कि हमें अंधी पैरवी (अंधी नक़ल) नहीं करनी चाहिए। किसी की बात मानने से पहले उसे क़ुरआन और सुन्नत की कसौटी पर परखना चाहिए, क्योंकि क़ियामत के दिन "मैंने तो अपने बड़ों की बात मानी थी" जैसा बहाना काम नहीं आएगा।
  3. यह आयत हमें सच्चाई की तरफ बुलाती है कि हम अपने जीवन में सही रास्ता चुनें, क्योंकि अल्लाह का फ़ैसला बिल्कुल न्यायपूर्ण है। वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर किसी को उसके किए का बदला देता है।
  4. यहाँ से हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें दूसरों को गुमराह करने से बचना चाहिए, क्योंकि जो लोग दूसरों को गुमराह करते हैं, उनका गुनाह और भी बढ़ जाता है, और वे अपने अनुयायियों के साथ मिलकर यातना में शामिल होंगे।
  5. यह आयत हमें इस्लाम की सच्चाई और अल्लाह के न्याय की ओर आकर्षित करती है, और बताती है कि सिर्फ़ ईमान और अच्छे कर्म ही हमें इस यातना से बचा सकते हैं।
🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — अल-आराफ

37فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَوْ كَذَّبَ بِآيَاتِهِ ۚ أُولَٰئِكَ يَنَالُهُمْ نَصِيبُهُم مِّنَ الْكِتَابِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا جَاءَتْهُمْ رُسُلُنَا يَتَوَفَّوْنَهُمْ قَالُوا أَيْنَ مَا كُنتُمْ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ
तो जो शख्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या उसकी आयतों को झुठलाए उससे बढ़कर ज़ालिम और कौन होगा फिर तो वह लोग हैं जिन्हें उनकी (तक़दीर) का लिखा हिस्सा (रिज़क) वग़ैरह मिलता रहेगा यहाँ तक कि जब हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) उनके पास आकर उनकी रूह कब्ज़ करेगें तो (उनसे) पूछेगें कि जिन्हें तुम ख़ुदा को छोड़कर पुकारा करते थे अब वह (कहाँ हैं तो वह कुफ्फार) जवाब देगें कि वह सब तो हमें छोड़ कर चल चंपत हुए और अपने खिलाफ आप गवाही देगें कि वह बेशक काफ़िर थे
38قَالَ ادْخُلُوا فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِكُم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ فِي النَّارِ ۖ كُلَّمَا دَخَلَتْ أُمَّةٌ لَّعَنَتْ أُخْتَهَا ۖ حَتَّىٰ إِذَا ادَّارَكُوا فِيهَا جَمِيعًا قَالَتْ أُخْرَاهُمْ لِأُولَاهُمْ رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ أَضَلُّونَا فَآتِهِمْ عَذَابًا ضِعْفًا مِّنَ النَّارِ ۖ قَالَ لِكُلٍّ ضِعْفٌ وَلَٰكِن لَّا تَعْلَمُونَ
(तब ख़ुदा उनसे) फरमाएगा कि जो लोग जिन व इन्स के तुम से पहले बसे हैं उन्हीं में मिलजुल कर तुम भी जहन्नुम वासिल हो जाओ (और ) अहले जहन्नुम का ये हाल होगा कि जब उसमें एक गिरोह दाख़िल होगा तो अपने साथी दूसरे गिरोह पर लानत करेगा यहाँ तक कि जब सब के सब पहुंच जाएगें तो उनमें की पिछली जमात अपने से पहली जमाअत के वास्ते बदद्आ करेगी कि परवरदिगार उन्हीं लोगों ने हमें गुमराह किया था तो उन पर जहन्नुम का दोगुना अज़ाब फरमा (इस पर) ख़ुदा फरमाएगा कि हर एक के वास्ते दो गुना अज़ाब है लेकिन (तुम पर) तुफ़ है तुम जानते नहीं
39وَقَالَتْ أُولَاهُمْ لِأُخْرَاهُمْ فَمَا كَانَ لَكُمْ عَلَيْنَا مِن فَضْلٍ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ
और उनमें से पहली जमाअत पिछली जमाअत की तरफ मुख़ातिब होकर कहेगी कि अब तो तुमको हमपर कोई फज़ीलत न रही पस (हमारी तरह) तुम भी अपने करतूत की बदौलत अज़ाब (के मज़े) चखो बेशक जिन लोगों ने हमारे आयात को झुठलाया
40إِنَّ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ أَبْوَابُ السَّمَاءِ وَلَا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ حَتَّىٰ يَلِجَ الْجَمَلُ فِي سَمِّ الْخِيَاطِ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُجْرِمِينَ
और उनसे सरताबी की न उनके लिए आसमान के दरवाज़े खोले जाएंगें और वह बेहश्त ही में दाखिल होने पाएगें यहाँ तक कि ऊँट सूई के नाके में होकर निकल जाए (यानि जिस तरह ये मुहाल है) उसी तरह उनका बेहश्त में दाखिल होना मुहाल है और हम मुजरिमों को ऐसी ही सज़ा दिया करते हैं उनके लिए जहन्नुम (की आग) का बिछौना होगा
41لَهُم مِّن جَهَنَّمَ مِهَادٌ وَمِن فَوْقِهِمْ غَوَاشٍ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ
और उनके ऊपर से (आग ही का) ओढ़ना भी और हम ज़ालिमों को ऐसी ही सज़ा देते हैं और जिन लोगों ने ईमान कुबुल किया
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
39आयत

अनुवाद — अल-आराफ 39

सूरा अल-आराफ आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनमें से पहली जमाअत पिछली जमाअत की तरफ मुख़ातिब…

सूरा आयत 39/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए