अन-नाज़ियात · 2/46
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नाज़ियात
وَالنَّاشِطَاتِ نَشْطًا ۝٢
Wan naa shi taati nashta
📖 हिंदी अर्थ
जो (कुफ्फ़ार की रूह) डूब कर सख्ती से खींच लेते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • النَّاشِطَاتِ: वे (फ़रिश्ते) जो आसानी से और नरमी से खींचते हैं।
  • نَشْطًا: आसानी से, नरमी से, बिना किसी सख्ती के।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में उन फ़रिश्तों की क़सम खाई है जो मोमिनों की रूहों को उनके शरीर से बड़ी ही नरमी, आसानी और मुहब्बत के साथ खींचते हैं। जिस तरह एक दयालु व्यक्ति किसी बंधन को खोलते समय नरमी बरतता है, उसी तरह ये फ़रिश्ते मोमिन बंदे की रूह को उसके शरीर से इस तरह निकालते हैं कि उसे कोई तकलीफ़ या दर्द महसूस नहीं होता। यह अल्लाह की उस रहमत का इज़हार है जो वह अपने नेक बंदों के साथ मौत के वक़्त भी करता है।

यह क़सम इस बात की ताकीद के लिए है कि क़यामत का दिन आकर रहेगा, और हर इंसान को उसके अमल का हिसाब दिया जाएगा। जिस तरह अल्लाह ने मोमिनों की रूह निकालने के लिए नरम और मेहरबान फ़रिश्ते मुक़र्रर किए हैं, उसी तरह वह अपने नेक बंदों के साथ आख़िरत में भी रहमत और इनाम का मामला करेगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि मौत से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसके लिए तैयार रहना चाहिए। जो लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं, उनके लिए मौत का वक़्त भी रहमत और सुकून का वक़्त होता है। अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को कभी तकलीफ़ में नहीं डालता, बल्कि उनकी रूह को इस तरह क़ब्ज़ करता है जैसे कोई प्यारा दोस्त किसी को गले लगाता है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएं, ताकि मौत के वक़्त हमें आसानी और रहमत मिले, और आख़िरत में भी हमारा अंजाम खुशगवार हो। यही कामयाबी है, और यही अल्लाह का वादा है जो कभी टलने वाला नहीं।



📜 आयत 1-4 — सूरा अन-नाज़ियात

1وَالنَّازِعَاتِ غَرْقًا
उन (फ़रिश्तों) की क़सम
2وَالنَّاشِطَاتِ نَشْطًا
जो (कुफ्फ़ार की रूह) डूब कर सख्ती से खींच लेते हैं
3وَالسَّابِحَاتِ سَبْحًا
और उनकी क़सम जो (मोमिनीन की जान) आसानी से खोल देते हैं
4فَالسَّابِقَاتِ سَبْقًا
और उनकी क़सम जो (आसमान ज़मीन के दरमियान) पैरते फिरते हैं
अन-नाज़ियातकुरान सूची
46आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अन-नाज़ियात 2

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Monday, September 28, 2026

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