अन-नाज़ियात · 3/46
अनुवाद उच्चारण — अन-नाज़ियात
وَالسَّابِحَاتِ سَبْحًا ۝٣
Wass saabi-haati sabha
📖 हिंदी अर्थ
और उनकी क़सम जो (मोमिनीन की जान) आसानी से खोल देते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّابِحَاتِ: तैरने वाली (यहाँ आशय फ़रिश्तों से है जो आकाश से धरती की ओर उतरते और चढ़ते हैं, जैसे पानी में तैरता हुआ व्यक्ति आसानी से चलता है)।
  • سَبْحًا: तेज़ी से, फुर्ती के साथ, बिना रुके।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में फ़रिश्तों की क़सम खाई है जो उसके हुक्म से आसमान और ज़मीन के बीच सफ़र करते हैं। ये फ़रिश्ते इतनी तेज़ी और आसानी से चलते हैं जैसे कोई तैराक पानी में तैरता है — बिना किसी रुकावट के, बिना थकान के। वे अल्लाह के हुक्म को लेकर जल्दी-जल्दी दौड़ते हैं, और उसकी इबादत और तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) में मशगूल रहते हैं।

यह क़सम इसलिए खाई गई है ताकि यह बताया जाए कि जिस तरह ये फ़रिश्ते अल्लाह के हुक्म की तेज़ी से पालना करते हैं, उसी तरह अल्लाह का इंतज़ाम भी बिल्कुल सही और बेहद तेज़ है। वह हर चीज़ पर क़ादिर (सक्षम) है, और उसके लिए मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करना, हिसाब लेना, और जज़ा देना — सब कुछ आसान है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के फ़रिश्ते उसके हुक्म के आगे सिर झुकाए हुए हैं, वे कभी नाफ़रमानी नहीं करते। हम इंसानों को भी चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों को सुनते ही फौरन उन पर अमल करें — बिना देरी, बिना बहाने। जिस तरह फ़रिश्ते तेज़ी से अल्लाह के काम निबटाते हैं, हमें भी अपनी ज़िंदगी में नेकी के कामों में जल्दी करनी चाहिए। यह क़सम हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है — क़यामत आएगी, मुर्दे ज़िंदा होंगे, और हर इंसान को उसके अमल का पूरा बदला मिलेगा। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाना चाहिए, ताकि उस दिन हम कामयाब हों।



📜 आयत 1-5 — अन-नाज़ियात

1وَالنَّازِعَاتِ غَرْقًا
उन (फ़रिश्तों) की क़सम
2وَالنَّاشِطَاتِ نَشْطًا
जो (कुफ्फ़ार की रूह) डूब कर सख्ती से खींच लेते हैं
3وَالسَّابِحَاتِ سَبْحًا
और उनकी क़सम जो (मोमिनीन की जान) आसानी से खोल देते हैं
4فَالسَّابِقَاتِ سَبْقًا
और उनकी क़सम जो (आसमान ज़मीन के दरमियान) पैरते फिरते हैं
5فَالْمُدَبِّرَاتِ أَمْرًا
फिर एक के आगे बढ़ते हैं
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 3

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Tuesday, August 18, 2026

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