सूरा अन-नाज़ियात अरबी और हिंदी

सूरा अन-नाज़ियात को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (46 आयत — مكية). अन-नाज़ियात सुनें, अन-नाज़ियात अनुवाद, अन-नाज़ियात mp3, अन-नाज़ियात pdf.

सूरा अन-नाज़ियात पढ़ें और सुनें

🎧 आयत
M Mishary Rashid Alafasy
M Mahmoud Khalil Al-Husary
A Abdurrahman As-Sudais
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi
A Abdul Basit Abdul Samad
A Ali Al-Hudhaify
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy
A Abu Bakr Ash-Shaatree
M Muhammad Ayyoub
A Abdullah Basfar
A Abdullah Al-Juhani
M Maher Al Muaiqly
x1
وَالنَّازِعَاتِ غَرْقًا ۝١
📖 अनुवाद आयत 1
उन (फ़रिश्तों) की क़सम
وَالنَّاشِطَاتِ نَشْطًا ۝٢
📖 अनुवाद आयत 2
जो (कुफ्फ़ार की रूह) डूब कर सख्ती से खींच लेते हैं
وَالسَّابِحَاتِ سَبْحًا ۝٣
📖 अनुवाद आयत 3
और उनकी क़सम जो (मोमिनीन की जान) आसानी से खोल देते हैं
فَالسَّابِقَاتِ سَبْقًا ۝٤
📖 अनुवाद आयत 4
और उनकी क़सम जो (आसमान ज़मीन के दरमियान) पैरते फिरते हैं
فَالْمُدَبِّرَاتِ أَمْرًا ۝٥
📖 अनुवाद आयत 5
फिर एक के आगे बढ़ते हैं
يَوْمَ تَرْجُفُ الرَّاجِفَةُ ۝٦
📖 अनुवाद आयत 6
फिर (दुनिया के) इन्तज़ाम करते हैं (उनकी क़सम) कि क़यामत हो कर रहेगी
تَتْبَعُهَا الرَّادِفَةُ ۝٧
📖 अनुवाद आयत 7
जिस दिन ज़मीन को भूचाल आएगा फिर उसके पीछे और ज़लज़ला आएगा
قُلُوبٌ يَوْمَئِذٍ وَاجِفَةٌ ۝٨
📖 अनुवाद आयत 8
उस दिन दिलों को धड़कन होगी
أَبْصَارُهَا خَاشِعَةٌ ۝٩
📖 अनुवाद आयत 9
उनकी ऑंखें (निदामत से) झुकी हुई होंगी
يَقُولُونَ أَإِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِي الْحَافِرَةِ ۝١٠
📖 अनुवाद आयत 10
कुफ्फ़ार कहते हैं कि क्या हम उलटे पाँव (ज़िन्दगी की तरफ़) फिर लौटेंगे
أَإِذَا كُنَّا عِظَامًا نَّخِرَةً ۝١١
📖 अनुवाद आयत 11
क्या जब हम खोखल हड्डियाँ हो जाएँगे
قَالُوا تِلْكَ إِذًا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌ ۝١٢
📖 अनुवाद आयत 12
कहते हैं कि ये लौटना तो बड़ा नुक़सान देह है
فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ ۝١٣
📖 अनुवाद आयत 13
वह (क़यामत) तो (गोया) बस एक सख्त चीख़ होगी
فَإِذَا هُم بِالسَّاهِرَةِ ۝١٤
📖 अनुवाद आयत 14
और लोग शक़ बारगी एक मैदान (हश्र) में मौजूद होंगे
هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ مُوسَىٰ ۝١٥
📖 अनुवाद आयत 15
(ऐ रसूल) क्या तुम्हारे पास मूसा का किस्सा भी पहुँचा है
إِذْ نَادَاهُ رَبُّهُ بِالْوَادِ الْمُقَدَّسِ طُوًى ۝١٦
📖 अनुवाद आयत 16
जब उनको परवरदिगार ने तूवा के मैदान में पुकारा
اذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُ طَغَىٰ ۝١٧
📖 अनुवाद आयत 17
कि फिरऔन के पास जाओ वह सरकश हो गया है
فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰ أَن تَزَكَّىٰ ۝١٨
📖 अनुवाद आयत 18
(और उससे) कहो कि क्या तेरी ख्वाहिश है कि (कुफ्र से) पाक हो जाए
وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ ۝١٩
📖 अनुवाद आयत 19
और मैं तुझे तेरे परवरदिगार की राह बता दूँ तो तुझको ख़ौफ (पैदा) हो
فَأَرَاهُ الْآيَةَ الْكُبْرَىٰ ۝٢٠
📖 अनुवाद आयत 20
ग़रज़ मूसा ने उसे (असा का बड़ा) मौजिज़ा दिखाया
فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ ۝٢١
📖 अनुवाद आयत 21
तो उसने झुठला दिया और न माना
ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ ۝٢٢
📖 अनुवाद आयत 22
फिर पीठ फेर कर (ख़िलाफ़ की) तदबीर करने लगा
فَحَشَرَ فَنَادَىٰ ۝٢٣
📖 अनुवाद आयत 23
फिर (लोगों को) जमा किया और बुलन्द आवाज़ से चिल्लाया
فَقَالَ أَنَا رَبُّكُمُ الْأَعْلَىٰ ۝٢٤
📖 अनुवाद आयत 24
तो कहने लगा मैं तुम लोगों का सबसे बड़ा परवरदिगार हूँ
فَأَخَذَهُ اللَّهُ نَكَالَ الْآخِرَةِ وَالْأُولَىٰ ۝٢٥
📖 अनुवाद आयत 25
तो ख़ुदा ने उसे दुनिया और आख़ेरत (दोनों) के अज़ाब में गिरफ्तार किया
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّمَن يَخْشَىٰ ۝٢٦
📖 अनुवाद आयत 26
बेशक जो शख़्श (ख़ुदा से) डरे उसके लिए इस (किस्से) में इबरत है
أَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ السَّمَاءُ ۚ بَنَاهَا ۝٢٧
📖 अनुवाद आयत 27
भला तुम्हारा पैदा करना ज्यादा मुश्किल है या आसमान का
رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّاهَا ۝٢٨
📖 अनुवाद आयत 28
कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा
وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَاهَا ۝٢٩
📖 अनुवाद आयत 29
फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली
وَالْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَاهَا ۝٣٠
📖 अनुवाद आयत 30
और उसके बाद ज़मीन को फैलाया
أَخْرَجَ مِنْهَا مَاءَهَا وَمَرْعَاهَا ۝٣١
📖 अनुवाद आयत 31
उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला
وَالْجِبَالَ أَرْسَاهَا ۝٣٢
📖 अनुवाद आयत 32
और पहाड़ों को उसमें गाड़ दिया
مَتَاعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَامِكُمْ ۝٣٣
📖 अनुवाद आयत 33
(ये सब सामान) तुम्हारे और तुम्हारे चारपायो के फ़ायदे के लिए है
فَإِذَا جَاءَتِ الطَّامَّةُ الْكُبْرَىٰ ۝٣٤
📖 अनुवाद आयत 34
तो जब बड़ी सख्त मुसीबत (क़यामत) आ मौजूद होगी
يَوْمَ يَتَذَكَّرُ الْإِنسَانُ مَا سَعَىٰ ۝٣٥
📖 अनुवाद आयत 35
जिस दिन इन्सान अपने कामों को कुछ याद करेगा
وَبُرِّزَتِ الْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ ۝٣٦
📖 अनुवाद आयत 36
और जहन्नुम देखने वालों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी
فَأَمَّا مَن طَغَىٰ ۝٣٧
📖 अनुवाद आयत 37
तो जिसने (दुनिया में) सर उठाया था
وَآثَرَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا ۝٣٨
📖 अनुवाद आयत 38
और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी थी
فَإِنَّ الْجَحِيمَ هِيَ الْمَأْوَىٰ ۝٣٩
📖 अनुवाद आयत 39
उसका ठिकाना तो यक़ीनन दोज़ख़ है
وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِ وَنَهَى النَّفْسَ عَنِ الْهَوَىٰ ۝٤٠
📖 अनुवाद आयत 40
मगर जो शख़्श अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता और जी को नाजायज़ ख्वाहिशों से रोकता रहा
فَإِنَّ الْجَنَّةَ هِيَ الْمَأْوَىٰ ۝٤١
📖 अनुवाद आयत 41
तो उसका ठिकाना यक़ीनन बेहश्त है
يَسْأَلُونَكَ عَنِ السَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَاهَا ۝٤٢
📖 अनुवाद आयत 42
(ऐ रसूल) लोग तुम से क़यामत के बारे में पूछते हैं
فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَاهَا ۝٤٣
📖 अनुवाद आयत 43
कि उसका कहीं थल बेड़ा भी है
إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَاهَا ۝٤٤
📖 अनुवाद आयत 44
तो तुम उसके ज़िक्र से किस फ़िक्र में हो
إِنَّمَا أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخْشَاهَا ۝٤٥
📖 अनुवाद आयत 45
उस (के इल्म) की इन्तेहा तुम्हारे परवरदिगार ही तक है तो तुम बस जो उससे डरे उसको डराने वाले हो
كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوا إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَاهَا ۝٤٦
📖 अनुवाद आयत 46
जिस दिन वह लोग इसको देखेंगे तो (समझेंगे कि दुनिया में) बस एक शाम या सुबह ठहरे थे
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79النازعات An-Nazi'at 📚 46 आयत مكية

आयत-दर-आयत – सूरा अन-नाज़ियात — 46 आयत




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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