अल-ग़ाशिया · 24/26
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-ग़ाशिया
فَيُعَذِّبُهُ اللَّهُ الْعَذَابَ الْأَكْبَرَ ۝٢٤
Fa yu`azzibuhul laahul `azaabal akbar
📖 हिंदी अर्थ
और न माना तो ख़ुदा उसको बहुत बड़े अज़ाब की सज़ा देगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَيُعَذِّبُهُ: तो वह उसे अज़ाब (यातना) देगा।
  • الْعَذَابَ الْأَكْبَرَ: सबसे बड़ी यातना, यानी जहन्नम की यातना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के हाल को बयान कर रही है जो अल्लाह की नसीहत और क़ुरआन की शिक्षाओं से मुँह मोड़ते हैं और अपने कुफ़्र पर अड़े रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह तआला ने दो तरह की यातनाएँ मुक़र्रर की हैं: एक छोटी यातना जो दुनिया में आती है, जैसे भूख, डर, क़त्ल और क़ैद — यह उनके गुनाहों का दुनियावी नतीजा है। और दूसरी बड़ी यातना जो आख़िरत में होगी, यानी जहन्नम की आग में हमेशा के लिए जलना। यही सबसे बड़ी और सबसे सख्त यातना है, जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं होगा।

अल्लाह तआला ने इस आयत में साफ़ कर दिया कि जो लोग हक़ को सुनकर भी उससे इन्कार करते हैं और अपनी ज़िद पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम बहुत भयानक है। लेकिन साथ ही यह भी समझना चाहिए कि अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है — जो कोई भी अपनी ग़लती से तौबा कर ले, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। यह आयत हमें डराती भी है और सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों को कितनी अहमियत देते हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम क़ुरआन और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत को अपनी ज़िंदगी का नुस्खा बनाएँ। जो लोग इस नसीहत से दूर रहते हैं, वे दुनिया में भी तकलीफ़ उठाते हैं और आख़िरत में भी सबसे बड़ी यातना का सामना करेंगे। अल्लाह हम सबको हिदायत की राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उस अज़ाब-ए-अज़ीम से बचाए। आमीन।



📜 आयत 22-26 — सूरा अल-ग़ाशिया

22لَّسْتَ عَلَيْهِم بِمُصَيْطِرٍ
तुम कुछ उन पर दरोग़ा तो हो नहीं
23إِلَّا مَن تَوَلَّىٰ وَكَفَرَ
हाँ जिसने मुँह फेर लिया
24فَيُعَذِّبُهُ اللَّهُ الْعَذَابَ الْأَكْبَرَ
और न माना तो ख़ुदा उसको बहुत बड़े अज़ाब की सज़ा देगा
25إِنَّ إِلَيْنَا إِيَابَهُمْ
बेशक उनको हमारी तरफ़ लौट कर आना है
26ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم
फिर उनका हिसाब हमारे ज़िम्मे है
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अनुवाद — अल-ग़ाशिया 24

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Friday, October 2, 2026

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