अत-तौबा · 1/129
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तौबा
بَرَاءَةٌ مِّنَ اللَّهِ وَرَسُولِهِ إِلَى الَّذِينَ عَاهَدتُّم مِّنَ الْمُشْرِكِينَ ۝١
Baraaa`atum minal laahi wa Rasooliheee ilal lazeena `anhattum minal mushrikeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ मुसलमानों) जिन मुशरिकों से तुम लोगों ने सुलह का एहद किया था अब ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ से उनसे (एक दम) बेज़ारी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بَرَاءَةٌ: किसी चीज़ से मुक्ति, अलगाव, या बरी होने की घोषणा। यहाँ अर्थ है—सम्बन्ध-विच्छेद की घोषणा।
  • مِنَ اللهِ وَرَسُولِهِ: अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की ओर से।
  • إِلَى الَّذِينَ عَاهَدتُّم: उन लोगों के लिए जिनसे तुमने (मुसलमानों ने) संधि/समझौता किया था।
  • الْمُشْرِكِينَ: बहुदेववादी, जो अल्लाह के साथ दूसरों को साझीदार बनाते हैं।

व्याख्या:

यह आयत अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की ओर से उन बहुदेववादियों के लिए एक स्पष्ट और कठोर घोषणा है, जिनसे मुसलमानों ने पहले संधि की थी। इस घोषणा का अर्थ है कि अल्लाह और उसके रसूल उन संधियों से बरी (मुक्त) हैं, जो मुसलमानों और मुशरिकों के बीच थीं। यह घोषणा इस बात का प्रतीक है कि अब वे संधियाँ समाप्त कर दी गई हैं, क्योंकि मुशरिकों ने बार-बार संधि का उल्लंघन किया था और इस्लाम तथा मुसलमानों के विरुद्ध शत्रुता का रास्ता अपनाया था। यह आयत सूरह अत-तौबा की शुरुआत है, जो मुशरिकों के प्रति अंतिम चेतावनी और उनके साथ सम्बन्ध-विच्छेद की घोषणा है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि अल्लाह और उसके रसूल का मुशरिकों से कोई सम्बन्ध नहीं, और मुसलमानों को भी उनसे पूर्ण रूप से अलग होने का आदेश दिया गया है।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम में समझौतों और संधियों की पवित्रता का बहुत ध्यान रखा जाता है, लेकिन जब दूसरा पक्ष बार-बार विश्वासघात करे, तो उससे सम्बन्ध-विच्छेद करना आवश्यक हो जाता है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह और उसके रसूल की ओर से स्पष्ट और निर्णायक स्थिति लेना चाहिए, बिना किसी झिझक या अस्पष्टता के।
  3. यह घोषणा मुसलमानों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपने धर्म और समुदाय की सुरक्षा के लिए सतर्क रहें और शत्रुओं से सख्ती से पेश आएँ, जबकि न्याय और स्पष्टता का पालन करें।
  4. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह अपने बन्दों के साथ कितना दयालु है कि उसने मुशरिकों को चार महीने की मोहलत दी, ताकि वे अपने किए पर पश्चाताप करें और सीधे मार्ग पर लौट आएँ। यह अल्लाह की रहमत और उसके मार्गदर्शन का प्रमाण है।
  5. इससे हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम अपने जीवन में भी स्पष्टता, सच्चाई और न्याय को अपनाएँ, और किसी भी सम्बन्ध में धोखा या विश्वासघात न करें, क्योंकि अल्लाह सच्चे और वफादार लोगों को पसंद करता है।


📜 आयत 1-3 — सूरा अत-तौबा

1بَرَاءَةٌ مِّنَ اللَّهِ وَرَسُولِهِ إِلَى الَّذِينَ عَاهَدتُّم مِّنَ الْمُشْرِكِينَ
(ऐ मुसलमानों) जिन मुशरिकों से तुम लोगों ने सुलह का एहद किया था अब ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ से उनसे (एक दम) बेज़ारी है
2فَسِيحُوا فِي الْأَرْضِ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَاعْلَمُوا أَنَّكُمْ غَيْرُ مُعْجِزِي اللَّهِ ۙ وَأَنَّ اللَّهَ مُخْزِي الْكَافِرِينَ
तो (ऐ मुशरिकों) बस तुम चार महीने (ज़ीकादा, जिल हिज्जा, मुहर्रम रजब) तो (चैन से बेख़तर) रूए ज़मीन में सैरो सियाहत (घूम फिर) कर लो और ये समझते रहे कि तुम (किसी तरह) ख़ुदा को आजिज़ नहीं कर सकते और ये भी कि ख़ुदा काफ़िरों को ज़रूर रूसवा करके रहेगा
3وَأَذَانٌ مِّنَ اللَّهِ وَرَسُولِهِ إِلَى النَّاسِ يَوْمَ الْحَجِّ الْأَكْبَرِ أَنَّ اللَّهَ بَرِيءٌ مِّنَ الْمُشْرِكِينَ ۙ وَرَسُولُهُ ۚ فَإِن تُبْتُمْ فَهُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۖ وَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّكُمْ غَيْرُ مُعْجِزِي اللَّهِ ۗ وَبَشِّرِ الَّذِينَ كَفَرُوا بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
और ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ से हज अकबर के दिन (तुम) लोगों को मुनादी की जाती है कि ख़ुदा और उसका रसूल मुशरिकों से बेज़ार (और अलग) है तो (मुशरिकों) अगर तुम लोगों ने (अब भी) तौबा की तो तुम्हारे हक़ में यही बेहतर है और अगर तुम लोगों ने (इससे भी) मुंह मोड़ा तो समझ लो कि तुम लोग ख़ुदा को हरगिज़ आजिज़ नहीं कर सकते और जिन लोगों ने कुफ्र इख्तेयार किया उनको दर्दनाक अज़ाब की ख़ुश ख़बरी दे दो
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीअवतरण स्थान
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अनुवाद — अत-तौबा 1

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Monday, September 28, 2026

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