Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بَرَاءَةٌ: किसी चीज़ से मुक्ति, अलगाव, या बरी होने की घोषणा। यहाँ अर्थ है—सम्बन्ध-विच्छेद की घोषणा।
- مِنَ اللهِ وَرَسُولِهِ: अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की ओर से।
- إِلَى الَّذِينَ عَاهَدتُّم: उन लोगों के लिए जिनसे तुमने (मुसलमानों ने) संधि/समझौता किया था।
- الْمُشْرِكِينَ: बहुदेववादी, जो अल्लाह के साथ दूसरों को साझीदार बनाते हैं।
व्याख्या:
यह आयत अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की ओर से उन बहुदेववादियों के लिए एक स्पष्ट और कठोर घोषणा है, जिनसे मुसलमानों ने पहले संधि की थी। इस घोषणा का अर्थ है कि अल्लाह और उसके रसूल उन संधियों से बरी (मुक्त) हैं, जो मुसलमानों और मुशरिकों के बीच थीं। यह घोषणा इस बात का प्रतीक है कि अब वे संधियाँ समाप्त कर दी गई हैं, क्योंकि मुशरिकों ने बार-बार संधि का उल्लंघन किया था और इस्लाम तथा मुसलमानों के विरुद्ध शत्रुता का रास्ता अपनाया था। यह आयत सूरह अत-तौबा की शुरुआत है, जो मुशरिकों के प्रति अंतिम चेतावनी और उनके साथ सम्बन्ध-विच्छेद की घोषणा है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि अल्लाह और उसके रसूल का मुशरिकों से कोई सम्बन्ध नहीं, और मुसलमानों को भी उनसे पूर्ण रूप से अलग होने का आदेश दिया गया है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम में समझौतों और संधियों की पवित्रता का बहुत ध्यान रखा जाता है, लेकिन जब दूसरा पक्ष बार-बार विश्वासघात करे, तो उससे सम्बन्ध-विच्छेद करना आवश्यक हो जाता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह और उसके रसूल की ओर से स्पष्ट और निर्णायक स्थिति लेना चाहिए, बिना किसी झिझक या अस्पष्टता के।
- यह घोषणा मुसलमानों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपने धर्म और समुदाय की सुरक्षा के लिए सतर्क रहें और शत्रुओं से सख्ती से पेश आएँ, जबकि न्याय और स्पष्टता का पालन करें।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह अपने बन्दों के साथ कितना दयालु है कि उसने मुशरिकों को चार महीने की मोहलत दी, ताकि वे अपने किए पर पश्चाताप करें और सीधे मार्ग पर लौट आएँ। यह अल्लाह की रहमत और उसके मार्गदर्शन का प्रमाण है।
- इससे हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम अपने जीवन में भी स्पष्टता, सच्चाई और न्याय को अपनाएँ, और किसी भी सम्बन्ध में धोखा या विश्वासघात न करें, क्योंकि अल्लाह सच्चे और वफादार लोगों को पसंद करता है।
📜 आयत 1-3 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 1
सूरा अत-तौबा आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ मुसलमानों) जिन मुशरिकों से तुम लोगों ने सुलह का…सूरा आयत 1/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
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Monday, September 28, 2026
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