Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَسِيحُوا: चलो-फिरो, यात्रा करो।
- مُعْجِزِي الله: अल्लाह को विवश करने वाले, अल्लाह की पकड़ से बच निकलने वाले।
- مُخْزِي: अपमानित करने वाला, रुसवा करने वाला।
तफसीर (व्याख्या):
हे मुशरिको! यह अल्लाह की ओर से एक घोषणा है कि तुम चार महीने तक धरती में स्वतंत्र रूप से घूम-फिर सकते हो, जहाँ चाहो जाओ, और इस अवधि में तुम्हें मुसलमानों की ओर से कोई हानि नहीं पहुँचेगी। यह अवधि उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपनी संधि तोड़ दी थी, या जिनकी संधि की कोई निश्चित अवधि नहीं थी। जिनकी संधि चार महीने से कम की थी, उन्हें पूरे चार महीने की मोहलत दी गई, और जिनकी संधि चार महीने से अधिक की थी, उन्हें घटाकर चार महीने कर दी गई। यह अवधि हज्जे-अकबर (10वीं हिजरी) के दिन से शुरू होती है।
इसके बाद तुम्हें यह अच्छी तरह जान लेना चाहिए कि तुम अल्लाह को विवश नहीं कर सकते, अर्थात् उसकी पकड़ से बच निकलना तुम्हारे बस में नहीं है। यदि तुम अपने कुफ्र और शिर्क पर बने रहे, तो अल्लाह तुम्हें अवश्य पकड़ेगा। अल्लाह काफिरों को दुनिया में कत्ल, कैद और अपमान के माध्यम से रुसवा करेगा, और आखिरत में उन्हें जहन्नम की आग में डालेगा। यह उन लोगों के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि चार महीने की मोहलत के बाद उनके लिए कोई सुरक्षा या संधि नहीं होगी, बल्कि वे अल्लाह और उसके रसूल के दुश्मन माने जाएँगे, जब तक कि वे तौबा न कर लें।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा दयालु और कृपालु है। उसने मुशरिकों को भी, जो सबसे बड़े अपराधी थे, चार महीने की मोहलत दी ताकि वे अपने जीवन की स्थिति सुधार सकें और तौबा कर सकें। यह अल्लाह की रहमत की विशालता को दर्शाता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ से कोई नहीं बच सकता। चाहे इंसान कितना भी ताकतवर या चालाक क्यों न हो, अल्लाह की कुदरत के आगे सब बेबस है।
- इस्लाम में वादे और संधियों की पूर्ति का बड़ा महत्व है, लेकिन जब दूसरा पक्ष संधि तोड़ दे, तो स्पष्ट रूप से उसे अवगत करा देना चाहिए, जैसा कि अल्लाह ने यहाँ किया।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह काफिरों को दुनिया में भी अपमानित करता है और आखिरत में भी। यह मोमिनों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह उनके दुश्मनों को रुसवा करने वाला है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ओर से दी गई मोहलत किसी की इज़्ज़त नहीं बढ़ाती, बल्कि यह एक अवसर है कि इंसान अपनी गलतियों को सुधार ले और अल्लाह की ओर लौट आए।
📜 आयत 1-4 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 2
सूरा अत-तौबा आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (ऐ मुशरिकों) बस तुम चार महीने (ज़ीकादा, जिल हिज्जा,…सूरा आयत 2/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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