Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَلْيَضْحَكُوا: उन्हें हँसना चाहिए
- قَلِيلًا: थोड़ा
- وَلْيَبْكُوا: और उन्हें रोना चाहिए
- كَثِيرًا: बहुत
- جَزَاءً: बदले में, प्रतिफल के रूप में
- بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ: उन कर्मों के कारण जो वे कमाते थे
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के बारे में है जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ तबूक के जिहाद में शामिल नहीं हुए और पीछे रह गए। अल्लाह तआला उन्हें धमकी के अंदाज़ में कहता है कि वे इस दुनिया की फ़ानी (नाशवान) ज़िंदगी में थोड़ी सी हँसी हँस लें, क्योंकि यह हँसी बहुत कम समय के लिए है। लेकिन आगे उनका इंतज़ार कर रहा है वह लंबा और दर्दनाक रोना — जहन्नम की आग में — जो कभी खत्म नहीं होगा। यह उनके उन कर्मों का बदला है जो उन्होंने दुनिया में किए — निफ़ाक़ (मुनाफ़िक़ी), कुफ़्र (इनकार), और गुनाह — जिनकी वजह से उन्होंने अल्लाह की राह में जिहाद से बचना चुना और अपने नफ़्स की ख्वाहिशों की پیروی की।
यानी यह आयत उन्हें बताती है कि दुनिया की यह हँसी बहुत थोड़ी है, और आख़िरत का रोना बहुत लंबा और भारी है। जो लोग अल्लाह के हुक्म से मुँह मोड़ते हैं और अपने गुनाहों पर हँसते-खेलते रहते हैं, उनका अंजाम यही है कि वे उस दिन बहुत रोएँगे जब रोना किसी काम नहीं आएगा।
फ़ायदे (सबक):
- दुनिया की हँसी फ़ानी है — यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की खुशियाँ और हँसी बहुत थोड़ी और अस्थायी हैं। अक्लमंद वह है जो इस थोड़ी सी हँसी के बदले आख़िरत की हमेशा की खुशियाँ न खोए।
- गुनाह का अंजाम दर्दनाक है — जो लोग गुनाहों पर हँसते हैं और अल्लाह के हुक्मों को हल्का समझते हैं, उनका अंजाम रोना और पछतावा है। इससे हमें अपने आमाल की जाँच करनी चाहिए कि कहीं हम भी उन लोगों में से तो नहीं जो दुनिया की ख्वाहिशों के पीछे पड़कर आख़िरत को भूल रहे हैं।
- अल्लाह की राह में कुर्बानी की अहमियत — यह आयत उन लोगों के लिए सबक है जो अल्लाह की राह में जिहाद और नेक कामों से पीछे रहते हैं। मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह की राह में अपने माल, वक़्त और ताकत से हिस्सा ले, ताकि उसे आख़िरत में पछतावा न करना पड़े।
- तौबा का दरवाज़ा खुला है — यह आयत धमकी के साथ-साथ रहमत की तरफ इशारा भी करती है। जो लोग गुनाह में मुब्तिला हैं, उन्हें चाहिए कि वे अभी तौबा कर लें, क्योंकि अल्लाह तौबा कबूल करने वाला और बहुत मेहरबान है। यह आयत हमें बताती है कि हमें अपनी ज़िंदगी को इस तरह गुज़ारना चाहिए कि हमारी हँसी और खुशी दोनों जगहों (दुनिया और आख़िरत) में हो — और वह तभी मुमकिन है जब हम अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में जिएँ।
📜 आयत 80-84 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 82
सूरा अत-तौबा आयत 82 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर वह कुछ समझें जो कुछ वह किया करते थे…सूरा आयत 82/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 80–84. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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