यूनुस · 25/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
وَاللَّهُ يَدْعُو إِلَىٰ دَارِ السَّلَامِ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ ۝٢٥
Wallaahu yad`ooo ilaa daaris salaami wa yahdee mai yashaaa`u ilaa Siraatim Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा तो आराम के घर (बेहश्त) की तरफ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत करता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • دَارِ السَّلَامِ: वह घर जो हर प्रकार की बुराई, दुख, चिंता और मृत्यु से सुरक्षित हो — अर्थात जन्नत (स्वर्ग)।
  • صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ: सीधा और सही रास्ता — अर्थात इस्लाम का मार्ग।

व्याख्या:

अल्लाह तआला अपने बंदों पर बड़ी कृपा और दया करता है। वह सभी लोगों को अपनी ओर बुलाता है — उस घर की ओर जो पूर्ण शांति और सलामती का घर है, यानी जन्नत। यह वह जगह है जहाँ हर दुख, हर चिंता, हर बीमारी और मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। वहाँ केवल सुख, शांति और अल्लाह की रहमत का साम्राज्य होता है। यह दावत (पुकार) सभी इंसानों के लिए है — चाहे वे किसी भी जाति, रंग या देश के हों।

इसके बाद अल्लाह अपनी इच्छा से जिसे चाहता है, उसे सीधे रास्ते की हिदायत देता है — वह रास्ता जो इस दारुस्सलाम (शांति के घर) तक पहुँचाता है। वह सीधा रास्ता इस्लाम है। यह अल्लाह की विशेष मेहरबानी है कि वह किसी को यह तौफीक देता है कि वह सही रास्ते को पहचाने, उस पर चले और आखिरकार उस शांति के घर तक पहुँचे। यह अल्लाह का फज़ल (कृपा) है जो वह जिसे चाहता है देता है।

फायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की रहमत का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वह स्वयं अपने बंदों को जन्नत की ओर बुलाता है — उसने हमें छोड़ा नहीं, बल्कि खुद हमारी भलाई के लिए पुकार लगाई है।
  2. इस आयत से हमें यह उम्मीद मिलती है कि अल्लाह का दरवाजा हमेशा खुला है — चाहे हम कितने भी गुनाहगार हों, उसकी दावत हम तक पहुँचती रहती है।
  3. हमें यह समझना चाहिए कि सच्ची शांति और सुकून केवल अल्लाह के पास है — दुनिया की दौलत और मकामात उस शांति का विकल्प नहीं हो सकते।
  4. यह आयत हमें इस्लाम की ओर लौटने की प्रेरणा देती है, क्योंकि इस्लाम ही वह सीधा रास्ता है जो हमें उस शांति के घर तक पहुँचाता है।
  5. हमें अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें भी उन लोगों में शामिल करे जिन्हें उसने सीधे रास्ते की हिदायत दी है।


📜 आयत 23-27 — सूरा यूनुस

23فَلَمَّا أَنجَاهُمْ إِذَا هُمْ يَبْغُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ ۗ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّمَا بَغْيُكُمْ عَلَىٰ أَنفُسِكُم ۖ مَّتَاعَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ ثُمَّ إِلَيْنَا مَرْجِعُكُمْ فَنُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
फिर जब ख़ुदा ने उन्हें नजात दी तो वह लोग ज़मीन पर (कदम रखते ही) फौरन नाहक़ सरकशी करने लगते हैं (ऐ लोगों तुम्हारी सरकशी का वबाल) तो तुम्हारी ही जान पर है - (ये भी) दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी का फायदा है फिर आख़िर हमारी (ही) तरफ तुमको लौटकर आना है तो (उस वक्त) हम तुमको जो कुछ (दुनिया में) करते थे बता देगे
24إِنَّمَا مَثَلُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَاءٍ أَنزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَاءِ فَاخْتَلَطَ بِهِ نَبَاتُ الْأَرْضِ مِمَّا يَأْكُلُ النَّاسُ وَالْأَنْعَامُ حَتَّىٰ إِذَا أَخَذَتِ الْأَرْضُ زُخْرُفَهَا وَازَّيَّنَتْ وَظَنَّ أَهْلُهَا أَنَّهُمْ قَادِرُونَ عَلَيْهَا أَتَاهَا أَمْرُنَا لَيْلًا أَوْ نَهَارًا فَجَعَلْنَاهَا حَصِيدًا كَأَن لَّمْ تَغْنَ بِالْأَمْسِ ۚ كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
दुनियावी ज़िदगी की मसल तो बस पानी की सी है कि हमने उसको आसमान से बरसाया फिर ज़मीन के साग पात जिसको लोग और चौपाए खा जाते हैं (उसके साथ मिल जुलकर निकले यहाँ तक कि जब ज़मीन ने (फसल की चीज़ों से) अपना बनाओ सिंगार कर लिया और (हर तरह) आरास्ता हो गई और खेत वालों ने समझ लिया कि अब वह उस पर यक़ीनन क़ाबू पा गए (जब चाहेंगे काट लेगे) यकायक हमारा हुक्म व अज़ाब रात या दिन को आ पहुँचा तो हमने उस खेत को ऐसा साफ कटा हुआ बना दिया कि गोया कुल उसमें कुछ था ही नहीं जो लोग ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके वास्ते हम आयतों को यूँ तफसीलदार बयान करते है
25وَاللَّهُ يَدْعُو إِلَىٰ دَارِ السَّلَامِ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और ख़ुदा तो आराम के घर (बेहश्त) की तरफ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत करता है
26۞ لِّلَّذِينَ أَحْسَنُوا الْحُسْنَىٰ وَزِيَادَةٌ ۖ وَلَا يَرْهَقُ وُجُوهَهُمْ قَتَرٌ وَلَا ذِلَّةٌ ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जिन लोगों ने दुनिया में भलाई की उनके लिए (आख़िरत में भी) भलाई है (बल्कि) और कुछ बढ़कर और न (गुनेहगारों की तरह) उनके चेहरों पर कालिक लगी हुई होगी और न (उन्हें ज़िल्लत होगी यही लोग जन्नती हैं कि उसमें हमेशा रहा सहा करेंगे
27وَالَّذِينَ كَسَبُوا السَّيِّئَاتِ جَزَاءُ سَيِّئَةٍ بِمِثْلِهَا وَتَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ مَّا لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۖ كَأَنَّمَا أُغْشِيَتْ وُجُوهُهُمْ قِطَعًا مِّنَ اللَّيْلِ مُظْلِمًا ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जिन लोगों ने बुरे काम किए हैं तो गुनाह की सज़ा उसके बराबर है और उन पर रुसवाई छाई होगी ख़ुदा (के अज़ाब) से उनका कोई बचाने वाला न होगा (उनके मुह ऐसे काले होंगे) गोया उनके चेहरे यबों यज़ूर (अंधेरी रात) के टुकड़े से ढक दिए गए हैं यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये उसमें हमेशा रहेंगे
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25आयत

अनुवाद — यूनुस 25

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Friday, October 2, 2026

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