यूनुस · 26/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
۞ لِّلَّذِينَ أَحْسَنُوا الْحُسْنَىٰ وَزِيَادَةٌ ۖ وَلَا يَرْهَقُ وُجُوهَهُمْ قَتَرٌ وَلَا ذِلَّةٌ ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ ۝٢٦
Lillazeena ahsanul husnaa wa ziyaadahtunw wa laa yarhaqu wujoohahum qatarunw wa laa zillah; ulaaa`ika ashaabul jannnati hum feehaa khaalidoon
📖 हिंदी अर्थ
जिन लोगों ने दुनिया में भलाई की उनके लिए (आख़िरत में भी) भलाई है (बल्कि) और कुछ बढ़कर और न (गुनेहगारों की तरह) उनके चेहरों पर कालिक लगी हुई होगी और न (उन्हें ज़िल्लत होगी यही लोग जन्नती हैं कि उसमें हमेशा रहा सहा करेंगे
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अनुवाद — Tafsir

कठिन शब्दों के अर्थ:

  • أَحْسَنُوا: जिन्होंने अच्छे कर्म किए, अर्थात अल्लाह की आज्ञाओं का पालन किया और उसकी मनाही से बचे रहे।
  • الْحُسْنَى: सर्वोत्तम बदला, जिसका अर्थ है जन्नत (स्वर्ग)।
  • وَزِيَادَةٌ: और अधिक, जिसका अर्थ है अल्लाह तआला के दर्शन (रू'यत) का सौभाग्य।
  • لَا يَرْهَقُ: नहीं ढकता, नहीं छाता।
  • قَتَرٌ: कालिख, गर्द, अंधकार या धूल।
  • ذِلَّةٌ: अपमान, पस्ती, हीनता।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का सुंदर वर्णन कर रहा है जो दुनिया में अच्छे कर्म करते हैं। "अच्छे कर्म" से अभिप्राय यह है कि वे अल्लाह की इबादत को सच्चे दिल से करें, उसके आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही की गई चीज़ों से बचें। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने दो चीज़ों का वादा किया है:

पहली — "الحسنى" यानी जन्नत, जो हर अच्छाई और सुख-सुविधाओं से भरी हुई है। यह उनके अच्छे कर्मों का बदला है।

दूसरी — "زيادة" यानी अतिरिक्त इनाम, जो जन्नत से भी बढ़कर है। यह अल्लाह तआला के दर्शन का सौभाग्य है, जो जन्नतियों को मिलेगा। यह सबसे बड़ा इनाम है जिससे बढ़कर कोई नेमत नहीं।

फिर अल्लाह तआला बताता है कि उन चेहरों पर न तो कोई कालिख या गर्द होगी और न ही कोई अपमान या हीनता। यानी उनके चेहरे उज्ज्वल, प्रसन्न और सम्मानित होंगे, उन पर किसी प्रकार की उदासी या अपमान का निशान नहीं होगा, जैसा कि पापियों के चेहरों पर होगा।

अंत में कहा गया कि ये लोग ही जन्नत के असली अधिकारी हैं और वे उसमें हमेशा रहेंगे। यह उनका स्थायी ठिकाना है, जहाँ से उन्हें कभी निकाला नहीं जाएगा।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अच्छे कर्मों का बदला अल्लाह के यहाँ कभी बेकार नहीं जाता। हर अच्छाई का बदला मिलेगा, चाहे वह कितनी ही छोटी क्यों न हो।
  2. अल्लाह तआला की रहमत का समुद्र असीम है — वह अपने नेक बंदों को सिर्फ जन्नत ही नहीं देगा, बल्कि उन्हें अपने दर्शन का सौभाग्य भी प्रदान करेगा, जो सबसे बड़ी नेमत है।
  3. इस आयत से हमें यह उम्मीद मिलती है कि अगर हम दुनिया में अल्लाह की इबादत करें और अच्छे कर्मों में लगे रहें, तो हमारा अंजाम बेहतरीन होगा — हमारे चेहरे चमकेंगे और हम सम्मानित होंगे।
  4. यह आयत हमें बताती है कि असली कामयाबी दुनिया की दौलत या शोहरत में नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसकी जन्नत में है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी का हर पल अल्लाह की आज्ञा के अनुसार बिताना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — यूनुस

24إِنَّمَا مَثَلُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَاءٍ أَنزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَاءِ فَاخْتَلَطَ بِهِ نَبَاتُ الْأَرْضِ مِمَّا يَأْكُلُ النَّاسُ وَالْأَنْعَامُ حَتَّىٰ إِذَا أَخَذَتِ الْأَرْضُ زُخْرُفَهَا وَازَّيَّنَتْ وَظَنَّ أَهْلُهَا أَنَّهُمْ قَادِرُونَ عَلَيْهَا أَتَاهَا أَمْرُنَا لَيْلًا أَوْ نَهَارًا فَجَعَلْنَاهَا حَصِيدًا كَأَن لَّمْ تَغْنَ بِالْأَمْسِ ۚ كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
दुनियावी ज़िदगी की मसल तो बस पानी की सी है कि हमने उसको आसमान से बरसाया फिर ज़मीन के साग पात जिसको लोग और चौपाए खा जाते हैं (उसके साथ मिल जुलकर निकले यहाँ तक कि जब ज़मीन ने (फसल की चीज़ों से) अपना बनाओ सिंगार कर लिया और (हर तरह) आरास्ता हो गई और खेत वालों ने समझ लिया कि अब वह उस पर यक़ीनन क़ाबू पा गए (जब चाहेंगे काट लेगे) यकायक हमारा हुक्म व अज़ाब रात या दिन को आ पहुँचा तो हमने उस खेत को ऐसा साफ कटा हुआ बना दिया कि गोया कुल उसमें कुछ था ही नहीं जो लोग ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके वास्ते हम आयतों को यूँ तफसीलदार बयान करते है
25وَاللَّهُ يَدْعُو إِلَىٰ دَارِ السَّلَامِ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और ख़ुदा तो आराम के घर (बेहश्त) की तरफ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत करता है
26۞ لِّلَّذِينَ أَحْسَنُوا الْحُسْنَىٰ وَزِيَادَةٌ ۖ وَلَا يَرْهَقُ وُجُوهَهُمْ قَتَرٌ وَلَا ذِلَّةٌ ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जिन लोगों ने दुनिया में भलाई की उनके लिए (आख़िरत में भी) भलाई है (बल्कि) और कुछ बढ़कर और न (गुनेहगारों की तरह) उनके चेहरों पर कालिक लगी हुई होगी और न (उन्हें ज़िल्लत होगी यही लोग जन्नती हैं कि उसमें हमेशा रहा सहा करेंगे
27وَالَّذِينَ كَسَبُوا السَّيِّئَاتِ جَزَاءُ سَيِّئَةٍ بِمِثْلِهَا وَتَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ مَّا لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۖ كَأَنَّمَا أُغْشِيَتْ وُجُوهُهُمْ قِطَعًا مِّنَ اللَّيْلِ مُظْلِمًا ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जिन लोगों ने बुरे काम किए हैं तो गुनाह की सज़ा उसके बराबर है और उन पर रुसवाई छाई होगी ख़ुदा (के अज़ाब) से उनका कोई बचाने वाला न होगा (उनके मुह ऐसे काले होंगे) गोया उनके चेहरे यबों यज़ूर (अंधेरी रात) के टुकड़े से ढक दिए गए हैं यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये उसमें हमेशा रहेंगे
28وَيَوْمَ نَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ نَقُولُ لِلَّذِينَ أَشْرَكُوا مَكَانَكُمْ أَنتُمْ وَشُرَكَاؤُكُمْ ۚ فَزَيَّلْنَا بَيْنَهُمْ ۖ وَقَالَ شُرَكَاؤُهُم مَّا كُنتُمْ إِيَّانَا تَعْبُدُونَ
(ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को इकट्ठा करेगें-फिर मुशरेकीन से कहेंगें कि तुम और तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीक ज़रा अपनी जगह ठहरो फिर हम वाहम उनमें फूट डाल देगें और उनके शरीक उनसे कहेंगे कि तुम तो हमारी परसतिश करते न थे
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अनुवाद — यूनुस 26

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सूरा आयत 26/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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