यूनुस · 24/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
إِنَّمَا مَثَلُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَاءٍ أَنزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَاءِ فَاخْتَلَطَ بِهِ نَبَاتُ الْأَرْضِ مِمَّا يَأْكُلُ النَّاسُ وَالْأَنْعَامُ حَتَّىٰ إِذَا أَخَذَتِ الْأَرْضُ زُخْرُفَهَا وَازَّيَّنَتْ وَظَنَّ أَهْلُهَا أَنَّهُمْ قَادِرُونَ عَلَيْهَا أَتَاهَا أَمْرُنَا لَيْلًا أَوْ نَهَارًا فَجَعَلْنَاهَا حَصِيدًا كَأَن لَّمْ تَغْنَ بِالْأَمْسِ ۚ كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ ۝٢٤
Innamaa masalul hayaatid dunyaa kammaaa`in anzalnaahu minas sammaaa`i fakhtalata bihee nabaatul ardi mimmaa yaakulun naasu wal an`aam; hattaaa izaaa akhazatil ardu zukhrufahaa wazziyanat wa zanna ahluhaaa annahum qaadiroona `alaihaaa ataahaaa amrunaa lailan aw nahaaran faja`alnaahaa haseedan ka allam taghna bil-ams; kazaalika nufassilul aayaati liqawminy yatafakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
दुनियावी ज़िदगी की मसल तो बस पानी की सी है कि हमने उसको आसमान से बरसाया फिर ज़मीन के साग पात जिसको लोग और चौपाए खा जाते हैं (उसके साथ मिल जुलकर निकले यहाँ तक कि जब ज़मीन ने (फसल की चीज़ों से) अपना बनाओ सिंगार कर लिया और (हर तरह) आरास्ता हो गई और खेत वालों ने समझ लिया कि अब वह उस पर यक़ीनन क़ाबू पा गए (जब चाहेंगे काट लेगे) यकायक हमारा हुक्म व अज़ाब रात या दिन को आ पहुँचा तो हमने उस खेत को ऐसा साफ कटा हुआ बना दिया कि गोया कुल उसमें कुछ था ही नहीं जो लोग ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके वास्ते हम आयतों को यूँ तफसीलदार बयान करते है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • زُخْرُفَهَا: भूमि की सुन्दरता और शोभा, जो उस पर उगी हुई वनस्पति से प्रकट होती है।
  • وَازَّيَّنَتْ: वह पूर्ण रूप से सज-धज गई और अपनी सुन्दरता दिखाने लगी।
  • حَصِيدًا: कटी हुई फसल की तरह, यानी जड़ से उखाड़ी हुई और नष्ट कर दी गई।
  • كَأَن لَّمْ تَغْنَ بِالْأَمْسِ: ऐसा लगता है जैसे वह कल भी वहाँ थी ही नहीं, यानी उसका कोई निशान बाकी नहीं रहा।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में दुनिया की ज़िन्दगी की हक़ीक़त को एक बेहद रौशन और ज़बरदस्त उदाहरण के ज़रिए बयान कर रहा है। वह फ़रमाता है कि इस दुनिया की ज़िन्दगी की मिसाल बारिश के पानी जैसी है, जिसे हमने आसमान से उतारा। उस पानी की बदौलत ज़मीन से तरह-तरह की वनस्पतियाँ उगती हैं, जिनमें से कुछ इंसानों के खाने के काम आती हैं — जैसे अनाज और फल — और कुछ जानवरों के चारे के लिए होती हैं — जैसे घास और पत्तियाँ। ये सब पौधे आपस में गुंथ जाते हैं और एक दूसरे से जुड़ जाते हैं, जिससे ज़मीन हरी-भरी और खूबसूरत हो जाती है।

फिर जब ज़मीन अपनी पूरी शोभा और सुन्दरता पर पहुँच जाती है, और उसके मालिकों को यक़ीन हो जाता है कि अब हम इसकी फसल काटेंगे और इससे भरपूर फ़ायदा उठाएँगे — ठीक उसी वक़्त अल्लाह का फ़ैसला (अज़ाब या आफ़त) उस पर आ जाता है, चाहे रात में आए या दिन में। अचानक वह सारी हरियाली और फसल ऐसे कट कर तबाह हो जाती है जैसे उसे काट कर ढेर कर दिया गया हो। यहाँ तक कि ऐसा लगता है कि वह ज़मीन कल तक आबाद और हरी-भरी थी ही नहीं। सब कुछ मिट जाता है, कोई निशान नहीं बचता।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस तरह हमने यह उदाहरण साफ़-साफ़ बयान किया है, उसी तरह हम अपनी आयतें और निशानियाँ उन लोगों के लिए खोल कर बयान करते हैं जो ग़ौर और फ़िक्र करते हैं, ताकि वे दुनिया की क्षणभंगुरता को समझें और आख़िरत के लिए तैयारी करें।

फ़ायदे और सबक़:

  1. दुनिया की हक़ीक़त: यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की ज़िन्दगी और उसकी चमक-दमक कितनी अस्थायी है। जिस वक़्त इंसान को सबसे ज़्यादा भरोसा होता है कि उसकी दुनिया सँवर गई है, उसी वक़्त अल्लाह का फ़ैसला आ जाता है। इसलिए दुनिया पर इतराना और घमंड करना बिल्कुल बेवक़ूफ़ी है।
  2. आख़िरत की याद: यह उदाहरण हमें आख़िरत की याद दिलाता है। जिस तरह यह खूबसूरत फसल अचानक तबाह हो जाती है, उसी तरह यह दुनिया भी अचानक ख़त्म हो जाएगी और हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना होगा।
  3. ग़ौर और फ़िक्र की अहमियत: अल्लाह ने इस आयत के अंत में उन लोगों का ज़िक्र किया है जो ग़ौर-फ़िक्र करते हैं। यानी जो लोग इन निशानियों पर दिमाग़ लगाते हैं, वही इनसे सबक़ हासिल करते हैं और अपनी ज़िन्दगी को सही राह पर लाते हैं।
  4. अल्लाह पर भरोसा: इंसान को चाहिए कि वह दुनिया के साज़ो-सामान पर निर्भर न रहे, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखे। क्योंकि असली मालिक अल्लाह ही है, और उसका फ़ैसला किसी भी वक़्त आ सकता है।
  5. इस्लाम की प्यारी तालीम: यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम दुनिया से बेरुख़ी नहीं सिखाता, बल्कि दुनिया को आख़िरत की तैयारी का ज़रिया बनाना सिखाता है। हमें दुनिया में रहकर भलाई के काम करने चाहिए, लेकिन दिल में यह यक़ीन रखना चाहिए कि असली और हमेशा रहने वाली ज़िन्दगी आख़िरत की है।
🎧 सुनें

📜 आयत 22-26 — यूनुस

22هُوَ الَّذِي يُسَيِّرُكُمْ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا كُنتُمْ فِي الْفُلْكِ وَجَرَيْنَ بِهِم بِرِيحٍ طَيِّبَةٍ وَفَرِحُوا بِهَا جَاءَتْهَا رِيحٌ عَاصِفٌ وَجَاءَهُمُ الْمَوْجُ مِن كُلِّ مَكَانٍ وَظَنُّوا أَنَّهُمْ أُحِيطَ بِهِمْ ۙ دَعَوُا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ لَئِنْ أَنجَيْتَنَا مِنْ هَٰذِهِ لَنَكُونَنَّ مِنَ الشَّاكِرِينَ
वह वही ख़ुदा है जो तुम्हें ख़ुश्की और दरिया में सैर कराता फिरता है यहाँ तक कि जब (कभी) तुम कश्तियों पर सवार होते हो और वह उन लोगों को बाद मुवाफिक़ (हवा के धारे) की मदद से लेकर चली और लोग उस (की रफ्तार) से ख़ुश हुए (यकायक) कश्ती पर हवा का एक झोंका आ पड़ा और (आना था कि) हर तरफ से उस पर लहरें (बढ़ी चली) आ रही हैं और उन लोगों ने समझ लिया कि अब घिर गए (और जान न बचेगी) तब अपने अक़ीदे को उसके वास्ते निरा खरा करके खुदा से दुआएँ मागँने लगते हैं कि (ख़ुदाया) अगर तूने इस (मुसीबत) से हमें नजात दी तो हम ज़रुर बड़े शुक्र गुज़ार होंगे
23فَلَمَّا أَنجَاهُمْ إِذَا هُمْ يَبْغُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ ۗ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّمَا بَغْيُكُمْ عَلَىٰ أَنفُسِكُم ۖ مَّتَاعَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ ثُمَّ إِلَيْنَا مَرْجِعُكُمْ فَنُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
फिर जब ख़ुदा ने उन्हें नजात दी तो वह लोग ज़मीन पर (कदम रखते ही) फौरन नाहक़ सरकशी करने लगते हैं (ऐ लोगों तुम्हारी सरकशी का वबाल) तो तुम्हारी ही जान पर है - (ये भी) दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी का फायदा है फिर आख़िर हमारी (ही) तरफ तुमको लौटकर आना है तो (उस वक्त) हम तुमको जो कुछ (दुनिया में) करते थे बता देगे
24إِنَّمَا مَثَلُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَاءٍ أَنزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَاءِ فَاخْتَلَطَ بِهِ نَبَاتُ الْأَرْضِ مِمَّا يَأْكُلُ النَّاسُ وَالْأَنْعَامُ حَتَّىٰ إِذَا أَخَذَتِ الْأَرْضُ زُخْرُفَهَا وَازَّيَّنَتْ وَظَنَّ أَهْلُهَا أَنَّهُمْ قَادِرُونَ عَلَيْهَا أَتَاهَا أَمْرُنَا لَيْلًا أَوْ نَهَارًا فَجَعَلْنَاهَا حَصِيدًا كَأَن لَّمْ تَغْنَ بِالْأَمْسِ ۚ كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
दुनियावी ज़िदगी की मसल तो बस पानी की सी है कि हमने उसको आसमान से बरसाया फिर ज़मीन के साग पात जिसको लोग और चौपाए खा जाते हैं (उसके साथ मिल जुलकर निकले यहाँ तक कि जब ज़मीन ने (फसल की चीज़ों से) अपना बनाओ सिंगार कर लिया और (हर तरह) आरास्ता हो गई और खेत वालों ने समझ लिया कि अब वह उस पर यक़ीनन क़ाबू पा गए (जब चाहेंगे काट लेगे) यकायक हमारा हुक्म व अज़ाब रात या दिन को आ पहुँचा तो हमने उस खेत को ऐसा साफ कटा हुआ बना दिया कि गोया कुल उसमें कुछ था ही नहीं जो लोग ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके वास्ते हम आयतों को यूँ तफसीलदार बयान करते है
25وَاللَّهُ يَدْعُو إِلَىٰ دَارِ السَّلَامِ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और ख़ुदा तो आराम के घर (बेहश्त) की तरफ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत करता है
26۞ لِّلَّذِينَ أَحْسَنُوا الْحُسْنَىٰ وَزِيَادَةٌ ۖ وَلَا يَرْهَقُ وُجُوهَهُمْ قَتَرٌ وَلَا ذِلَّةٌ ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जिन लोगों ने दुनिया में भलाई की उनके लिए (आख़िरत में भी) भलाई है (बल्कि) और कुछ बढ़कर और न (गुनेहगारों की तरह) उनके चेहरों पर कालिक लगी हुई होगी और न (उन्हें ज़िल्लत होगी यही लोग जन्नती हैं कि उसमें हमेशा रहा सहा करेंगे
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अनुवाद — यूनुस 24

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सूरा आयत 24/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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