अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- زُخْرُفَهَا: भूमि की सुन्दरता और शोभा, जो उस पर उगी हुई वनस्पति से प्रकट होती है।
- وَازَّيَّنَتْ: वह पूर्ण रूप से सज-धज गई और अपनी सुन्दरता दिखाने लगी।
- حَصِيدًا: कटी हुई फसल की तरह, यानी जड़ से उखाड़ी हुई और नष्ट कर दी गई।
- كَأَن لَّمْ تَغْنَ بِالْأَمْسِ: ऐसा लगता है जैसे वह कल भी वहाँ थी ही नहीं, यानी उसका कोई निशान बाकी नहीं रहा।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में दुनिया की ज़िन्दगी की हक़ीक़त को एक बेहद रौशन और ज़बरदस्त उदाहरण के ज़रिए बयान कर रहा है। वह फ़रमाता है कि इस दुनिया की ज़िन्दगी की मिसाल बारिश के पानी जैसी है, जिसे हमने आसमान से उतारा। उस पानी की बदौलत ज़मीन से तरह-तरह की वनस्पतियाँ उगती हैं, जिनमें से कुछ इंसानों के खाने के काम आती हैं — जैसे अनाज और फल — और कुछ जानवरों के चारे के लिए होती हैं — जैसे घास और पत्तियाँ। ये सब पौधे आपस में गुंथ जाते हैं और एक दूसरे से जुड़ जाते हैं, जिससे ज़मीन हरी-भरी और खूबसूरत हो जाती है।
फिर जब ज़मीन अपनी पूरी शोभा और सुन्दरता पर पहुँच जाती है, और उसके मालिकों को यक़ीन हो जाता है कि अब हम इसकी फसल काटेंगे और इससे भरपूर फ़ायदा उठाएँगे — ठीक उसी वक़्त अल्लाह का फ़ैसला (अज़ाब या आफ़त) उस पर आ जाता है, चाहे रात में आए या दिन में। अचानक वह सारी हरियाली और फसल ऐसे कट कर तबाह हो जाती है जैसे उसे काट कर ढेर कर दिया गया हो। यहाँ तक कि ऐसा लगता है कि वह ज़मीन कल तक आबाद और हरी-भरी थी ही नहीं। सब कुछ मिट जाता है, कोई निशान नहीं बचता।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस तरह हमने यह उदाहरण साफ़-साफ़ बयान किया है, उसी तरह हम अपनी आयतें और निशानियाँ उन लोगों के लिए खोल कर बयान करते हैं जो ग़ौर और फ़िक्र करते हैं, ताकि वे दुनिया की क्षणभंगुरता को समझें और आख़िरत के लिए तैयारी करें।
फ़ायदे और सबक़:
- दुनिया की हक़ीक़त: यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की ज़िन्दगी और उसकी चमक-दमक कितनी अस्थायी है। जिस वक़्त इंसान को सबसे ज़्यादा भरोसा होता है कि उसकी दुनिया सँवर गई है, उसी वक़्त अल्लाह का फ़ैसला आ जाता है। इसलिए दुनिया पर इतराना और घमंड करना बिल्कुल बेवक़ूफ़ी है।
- आख़िरत की याद: यह उदाहरण हमें आख़िरत की याद दिलाता है। जिस तरह यह खूबसूरत फसल अचानक तबाह हो जाती है, उसी तरह यह दुनिया भी अचानक ख़त्म हो जाएगी और हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना होगा।
- ग़ौर और फ़िक्र की अहमियत: अल्लाह ने इस आयत के अंत में उन लोगों का ज़िक्र किया है जो ग़ौर-फ़िक्र करते हैं। यानी जो लोग इन निशानियों पर दिमाग़ लगाते हैं, वही इनसे सबक़ हासिल करते हैं और अपनी ज़िन्दगी को सही राह पर लाते हैं।
- अल्लाह पर भरोसा: इंसान को चाहिए कि वह दुनिया के साज़ो-सामान पर निर्भर न रहे, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखे। क्योंकि असली मालिक अल्लाह ही है, और उसका फ़ैसला किसी भी वक़्त आ सकता है।
- इस्लाम की प्यारी तालीम: यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम दुनिया से बेरुख़ी नहीं सिखाता, बल्कि दुनिया को आख़िरत की तैयारी का ज़रिया बनाना सिखाता है। हमें दुनिया में रहकर भलाई के काम करने चाहिए, लेकिन दिल में यह यक़ीन रखना चाहिए कि असली और हमेशा रहने वाली ज़िन्दगी आख़िरत की है।
📜 आयत 22-26 — यूनुस
अनुवाद — यूनुस 24
सूरा यूनुस आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : दुनियावी ज़िदगी की मसल तो बस पानी की सी है…सूरा आयत 24/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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