हूद · 114/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
وَأَقِمِ الصَّلَاةَ طَرَفَيِ النَّهَارِ وَزُلَفًا مِّنَ اللَّيْلِ ۚ إِنَّ الْحَسَنَاتِ يُذْهِبْنَ السَّيِّئَاتِ ۚ ذَٰلِكَ ذِكْرَىٰ لِلذَّاكِرِينَ ۝١١٤
Wa aqimis Salaata tarafayin nahaari wa zulafam minal layl; innal hasanaati yuzhibnas saiyi aat; zaalika zikraa liz zaakireen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) दिन के दोनो किनारे और कुछ रात गए नमाज़ पढ़ा करो (क्योंकि) नेकियाँ यक़ीनन गुनाहों को दूर कर देती हैं और (हमारी) याद करने वालो के लिए ये (बातें) नसीहत व इबरत हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • طَرَفَيِ النَّهَارِ: दिन के दोनों किनारे (सिरे), अर्थात सुबह और शाम।
  • زُلَفًا: रात के कुछ हिस्से (घंटे), इसका एकवचन "زُلْفَةٌ" है, जिसका अर्थ है निकटता या रात का एक भाग।
  • يُذْهِبْنَ: मिटा देती हैं, दूर कर देती हैं।
  • ذِكْرَى: नसीहत, याद दिलाने वाली बात।

तफसीर (व्याख्या):

हे नबी! आप दिन के दोनों सिरों पर नमाज़ क़ायम करें—यानी सुबह (फज्र) और शाम (मग़रिब) के समय—और रात के कुछ हिस्सों में भी नमाज़ अदा करें, जिसमें मग़रिब, इशा और रात का क़ियाम (तहज्जुद) शामिल है। यह आदेश नमाज़ को सर्वोत्तम तरीके से, पूरे अदब और खुशू के साथ अदा करने का है।

फिर अल्लाह तआला ने बताया कि नेक काम—विशेषकर पाँचों वक़्त की नमाज़ें—छोटे गुनाहों को मिटा देती हैं और उनके प्रभाव को दूर कर देती हैं। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने नेकियों को गुनाहों की मिटाने वाला बनाया है।

यह जो कुछ भी बताया गया है—नमाज़ की पाबंदी, नेकियों का गुनाहों को मिटाना, और अल्लाह की ओर रुजू करना—यह उन लोगों के लिए एक बड़ी नसीहत और याद दिलाने वाली बात है जो दिल से अल्लाह को याद करते हैं और उसकी शिक्षाओं से सीख लेते हैं। यह नसीहत उन्हीं को फायदा पहुँचाती है जो इसे ग्रहण करने की इच्छा रखते हैं।

फायदे (सबक):

  1. नमाज़ इस्लाम का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है, और इसे दिन-रात के विभिन्न समयों में अदा करने से इंसान का पूरा दिन अल्लाह की याद में बंध जाता है। यह इंसान को गुनाहों से बचाती है और उसके दिल को पाक रखती है।
  2. अल्लाह की रहमत बेहद व्यापक है—वह नेकियों के ज़रिए गुनाहों को माफ कर देता है। इससे इंसान को उम्मीद मिलती है कि चाहे उससे कितनी भी गलतियाँ हुई हों, वह सच्चे दिल से तौबा करके और नेक काम करके अल्लाह की माफी पा सकता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की याद और नमाज़ इंसान के लिए सुकून और शांति का ज़रिया है। जो लोग अल्लाह को याद करते हैं, उनके दिलों को परम शांति मिलती है और उनकी ज़िंदगी में बरकत आती है।
  4. इस आयत में इस बात की तरफ इशारा है कि नमाज़ सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक ऐसा ज़रिया है जो इंसान को गुनाहों से पाक करता है और उसे अल्लाह के करीब लाता है। इसलिए हमें नमाज़ को पूरे ध्यान और खुशू के साथ अदा करनी चाहिए।


📜 आयत 112-116 — सूरा हूद

112فَاسْتَقِمْ كَمَا أُمِرْتَ وَمَن تَابَ مَعَكَ وَلَا تَطْغَوْا ۚ إِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
तो (ऐ रसूल) जैसा तुम्हें हुक्म दिया है तुम और वह लोग भी जिन्होंने तुम्हारे साथ (कुफ्र से) तौबा की है ठीक साबित क़दम रहो और सरकशी न करो (क्योंकि) तुम लोग जो कुछ भी करते हो वह यक़ीनन देख रहा है
113وَلَا تَرْكَنُوا إِلَى الَّذِينَ ظَلَمُوا فَتَمَسَّكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِنْ أَوْلِيَاءَ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ
और (मुसलमानों) जिन लोगों ने (हमारी नाफरमानी करके) अपने ऊपर ज़ुल्म किया है उनकी तरफ माएल (झुकना) न होना और वरना तुम तक भी (दोज़ख़) की आग आ लपटेगी और ख़ुदा के सिवा और लोग तुम्हारे सरपरस्त भी नहीं हैं फिर तुम्हारी मदद कोई भी नहीं करेगा
114وَأَقِمِ الصَّلَاةَ طَرَفَيِ النَّهَارِ وَزُلَفًا مِّنَ اللَّيْلِ ۚ إِنَّ الْحَسَنَاتِ يُذْهِبْنَ السَّيِّئَاتِ ۚ ذَٰلِكَ ذِكْرَىٰ لِلذَّاكِرِينَ
और (ऐ रसूल) दिन के दोनो किनारे और कुछ रात गए नमाज़ पढ़ा करो (क्योंकि) नेकियाँ यक़ीनन गुनाहों को दूर कर देती हैं और (हमारी) याद करने वालो के लिए ये (बातें) नसीहत व इबरत हैं
115وَاصْبِرْ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ
और (ऐ रसूल) तुम सब्र करो क्योंकि ख़ुदा नेकी करने वालों का अज्र बरबाद नहीं करता
116فَلَوْلَا كَانَ مِنَ الْقُرُونِ مِن قَبْلِكُمْ أُولُو بَقِيَّةٍ يَنْهَوْنَ عَنِ الْفَسَادِ فِي الْأَرْضِ إِلَّا قَلِيلًا مِّمَّنْ أَنجَيْنَا مِنْهُمْ ۗ وَاتَّبَعَ الَّذِينَ ظَلَمُوا مَا أُتْرِفُوا فِيهِ وَكَانُوا مُجْرِمِينَ
फिर जो लोग तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनमें कुछ लोग ऐसे अक़ल वाले क्यों न हुए जो (लोगों को) रुए ज़मीन पर फसाद फैलाने से रोका करते (ऐसे लोग थे तो) मगर बहुत थोड़े से और ये उन्हीं लोगों से थे जिनको हमने अज़ाब से बचा लिया और जिन लोगों ने नाफरमानी की थी वह उन्हीं (लज्ज़तों) के पीछे पड़े रहे और जो उन्हें दी गई थी और ये लोग मुजरिम थे ही
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
114आयत

अनुवाद — हूद 114

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Saturday, October 3, 2026

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