अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاصْبِرْ: धैर्य रखें, सब्र करें।
- لَا يُضِيعُ: बर्बाद नहीं करता, अकारण नहीं करता।
- أَجْرَ: बदला, प्रतिफल।
- الْمُحْسِنِينَ: नेकी करने वाले, भलाई करने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप धैर्य और सब्र को अपनाएँ — चाहे वह नमाज़ और इबादत पर स्थिर रहने के लिए हो, चाहे अपनी क़ौम के मुशरिकों की ओर से मिलने वाली तकलीफ़ों और अज़िय्यतों को सहने के लिए हो, और चाहे उन सारी बातों पर अमल करने के लिए हो जिनका आपको आदेश दिया गया है। साथ ही, उन कामों से बचने के लिए भी सब्र ज़रूरी है जिनसे रोका गया है, जैसे ज़ुल्म करने वालों की तरफ़ झुकाव या उनके साथ मिलकर चलना। यह सब्र इसलिए है क्योंकि अल्लाह तआला नेकी करने वालों का अज्र (प्रतिफल) कभी बर्बाद नहीं करता। वह उनके अच्छे कर्मों को क़बूल करता है और उन्हें उनके सबसे अच्छे कामों के बदले में पूरा-पूरा बदला देता है। उसकी दृष्टि में किसी भी नेक काम की कोई छोटी सी भी क़ीमत अकारण नहीं जाती।
फ़ायदे (सीख):
- यह आयत हमें सिखाती है कि सब्र और धैर्य हर हाल में ज़रूरी है — चाहे इबादत में मुशिबत आए, चाहे लोगों की तरफ़ से तकलीफ़ मिले, या गुनाह से बचने में दिक्कत हो।
- अल्लाह का वादा है कि वह नेकी करने वालों का अज्र कभी ज़ाया नहीं करता। यह हमें भलाई के कामों पर स्थिर रहने की तरग़ीब देता है, चाहे फ़ौरन नतीजा न दिखे।
- इस आयत से हमें यह उम्मीद मिलती है कि अल्लाह की रहमत और इन्साफ़ हमारे हर अच्छे काम को देखता है और उसका हक़ देगा — भले ही दुनिया में लोग उसे न पहचानें।
- यहाँ "मुहसिनीन" (नेकी करने वालों) का ज़िक्र बताता है कि सब्र के साथ अच्छे कर्मों का होना ज़रूरी है — सिर्फ़ सब्र ही काफ़ी नहीं, बल्कि सब्र के साथ अमल भी होना चाहिए।
- यह आयत हमें तसल्ली देती है कि अल्लाह के दीन पर चलने में जो मुश्किलें आती हैं, वह उन्हें बेकार नहीं जाने देगा, बल्कि उनका बेहतरीन बदला देगा।
📜 आयत 113-117 — हूद
अनुवाद — हूद 115
सूरा हूद आयत 115 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम सब्र करो क्योंकि ख़ुदा नेकी करने…सूरा आयत 115/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 113–117. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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