Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَرْكَنُوا: झुकना, ढल जाना, दिल से मेल कर लेना या उनकी तरफ़ प्रवृत्त हो जाना।
- فَتَمَسَّكُمُ: तो तुम्हें छू ले, तुम्हें अपनी लपेट में ले ले (यहाँ अर्थ है: आग तुम्हें अपनी चपेट में ले लेगी)।
- أَوْلِيَاء: मददगार, सहायक, रक्षक।
- تُنْصَرُونَ: तुम्हारी मदद की जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने ईमानवाले बंदों को एक बहुत ही अहम और सख़्त नसीहत दे रहा है। वह फ़रमाता है कि ज़ालिमों (अत्याचारियों) की तरफ़ कभी झुकना मत, न उनसे दिली मुहब्बत रखो, न उनकी बातों पर इत्मीनान करो, और न उनकी मदद या उनके साथ मेल-जोल में इस क़दर बढ़ जाओ कि तुम उनके क़ुर्ब (नज़दीकी) को अपने लिए सुरक्षित समझने लगो। यह झुकाव चाहे दिल से हो, चाहे ज़ुबान से, चाहे अमल से — सब मना है।
इस झुकाव का नतीजा यह होगा कि अल्लाह की आग (जहन्नुम) तुम्हें अपनी लपेट में ले लेगी। क्योंकि ज़ालिमों से मेल-जोल और उनकी तरफ़ रुजूअ करना गुनाह है, और गुनाह का अंजाम आग है। फिर अल्लाह फ़रमाता है कि उस दिन अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई वली (रक्षक) नहीं होगा, जो तुम्हें उस आग से बचा सके। न कोई दोस्त तुम्हारी मदद करेगा, न कोई सहायक। यानी अगर तुमने दुनिया में ज़ालिमों का साथ दिया, तो आख़िरत में वे तुम्हारे किसी काम न आएँगे, और अल्लाह की पकड़ से बचाने वाला कोई नहीं होगा।
फ़ायदे (सबक़):
- ईमान की पहचान यह है कि इंसान ज़ालिम से दूर रहे — चाहे वह रिश्तेदार हो, दोस्त हो या कोई ताक़तवर शख़्स। ज़ालिम से दिली वाबस्तगी (लगाव) ईमान के ख़िलाफ़ है।
- ज़ालिमों से मेल-जोल का अंजाम बहुत ख़तरनाक है — यह सिर्फ़ दुनिया में रुसवाई नहीं है, बल्कि आख़िरत में जहन्नुम की आग का सबब बन सकता है। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपने अमल में इस बात का ख़याल रखे।
- अल्लाह के सिवा कोई मददगार नहीं — जब सच्ची मुसीबत आएगी, तो न ज़ालिम मदद करेंगे, न उनके चेले। सिर्फ़ अल्लाह ही बचाने वाला है। इसलिए हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखें और उसी की राह पर चलें।
- यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ नमाज़ और रोज़े का नाम नहीं — बल्कि इंसाफ़ (न्याय) और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ खड़ा होना भी ईमान का हिस्सा है। जो ज़ालिमों का साथ देता है, वह दरअसल अल्लाह के दीन से दूर हो जाता है।
- अल्लाह की रहमत और नसीहत — यह आयत अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि उसने हमें पहले ही आगाह कर दिया कि किस रास्ते पर चलना है और किससे बचना है। यह उसके प्यार की निशानी है कि वह हमें जहन्नुम से बचाना चाहता है।
📜 आयत 111-115 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 113
सूरा हूद आयत 113 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (मुसलमानों) जिन लोगों ने (हमारी नाफरमानी करके) अपने ऊपर…सूरा आयत 113/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 111–115. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


