इब्राहीम · 1/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
الر ۚ كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ إِلَيْكَ لِتُخْرِجَ النَّاسَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ بِإِذْنِ رَبِّهِمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْعَزِيزِ الْحَمِيدِ ۝١
Alif-Laaam-Raa; Kitaabun anzalnaahu ilaika litukhrijan-naasa minaz zulumaati ilan noori bi-izni Rabbihim ilaa siraatil `Azeezil Hameed
📖 हिंदी अर्थ
अलिफ़ लाम रा ऐ रसूल ये (क़ुरान वह) किताब है जिसकों हमने तुम्हारे पास इसलिए नाज़िल किया है कि तुम लोगों को परवरदिगार के हुक्म से (कुफ्र की) तारीकी से (ईमान की) रौशनी में निकाल लाओ ग़रज़ उसकी राह पर लाओ जो सब पर ग़ालिब और सज़ावार हम्द है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الر: ये हुरूफ़े मुक़त्तआत (अलग-अलग अक्षर) हैं, जिनका सही अर्थ केवल अल्लाह ही जानता है। इन अक्षरों का उल्लेख कुरआन की अजीमुश्शान शान और उसके मु'जिज़ा (चमत्कार) की ओर संकेत करता है।
  • الظُّلُمَاتِ: अंधेरे, यानी कुफ्र (अविश्वास), शिर्क (बहुदेववाद), अज्ञानता और गुमराही।
  • النُّورِ: रोशनी, यानी ईमान (विश्वास), ज्ञान और हिदायत।
  • صِرَاطِ: मार्ग, रास्ता।
  • الْعَزِيزِ: वह अल्लाह जो सब पर ग़ालिब है, जिसे कोई हरा नहीं सकता।
  • الْحَمِيدِ: वह अल्लाह जो हर स्थिति में प्रशंसा के योग्य है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह कुरआन वह किताब है जिसे हमने (अल्लाह ने) आप (ऐ नबी!) की ओर उतारा है। इसके उतारने का उद्देश्य यह है कि आप लोगों को अंधेरों से निकालकर रोशनी की ओर लाएँ। यानी कुफ्र, शिर्क, अज्ञानता और गुमराही के अंधेरों से निकालकर ईमान, तौहीद (एकेश्वरवाद), ज्ञान और हिदायत की रोशनी की ओर लाएँ। यह कार्य आप अपनी ताक़त से नहीं कर रहे हैं, बल्कि अल्लाह की इजाज़त, उसकी तौफ़ीक़ (सहायता) और उसके आदेश से कर रहे हैं। यह रोशनी लोगों को उस अल्लाह के सीधे रास्ते की ओर ले जाती है जो सबसे अधिक शक्तिशाली और ग़ालिब है, जिसके आगे कोई ताक़त नहीं टिक सकती, और जो हर अच्छाई और हर नेमत पर प्रशंसा के योग्य है। यह मार्ग उसी अल्लाह का दीन (इस्लाम) है, जो सारी सृष्टि का पालनहार और स्वामी है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. कुरआन का सबसे बड़ा उद्देश्य इंसानों को अंधेरों से निकालकर रोशनी की ओर लाना है। यही इस किताब का असली मक़सद है, और हर मुसलमान को चाहिए कि वह इस रोशनी को अपने जीवन में अपनाए और दूसरों तक पहुँचाए।
  2. हिदायत पाना अल्लाह की इजाज़त और उसकी मर्ज़ी पर निर्भर है। इसलिए हमें अल्लाह से हिदायत की दुआ माँगते रहना चाहिए और यह समझना चाहिए कि हमारी कोशिशें तभी कामयाब होती हैं जब अल्लाह उन्हें क़बूल करता है।
  3. इस्लाम का रास्ता एक ऐसे अल्लाह की ओर ले जाता है जो सबसे शक्तिशाली है। इससे मुसलमान को यह विश्वास मिलता है कि वह किसी कमज़ोर या नाकाबिल की इबादत नहीं कर रहा, बल्कि उसकी इबादत कर रहा है जिसके हाथ में सारी कुदरत है।
  4. अल्लाह 'हमीद' है, यानी वह हर अच्छाई का मालिक है और हर प्रशंसा का हक़दार है। यह बात इंसान के दिल में अल्लाह के लिए मुहब्बत और एहतिराम पैदा करती है और उसे अच्छे कामों की तरफ़ राग़िब करती है।


📜 आयत 1-3 — इब्राहीम

1الر ۚ كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ إِلَيْكَ لِتُخْرِجَ النَّاسَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ بِإِذْنِ رَبِّهِمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْعَزِيزِ الْحَمِيدِ
अलिफ़ लाम रा ऐ रसूल ये (क़ुरान वह) किताब है जिसकों हमने तुम्हारे पास इसलिए नाज़िल किया है कि तुम लोगों को परवरदिगार के हुक्म से (कुफ्र की) तारीकी से (ईमान की) रौशनी में निकाल लाओ ग़रज़ उसकी राह पर लाओ जो सब पर ग़ालिब और सज़ावार हम्द है
2اللَّهِ الَّذِي لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْكَافِرِينَ مِنْ عَذَابٍ شَدِيدٍ
वह ख़ुदा को कुछ आसमानों में और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और (आख़िरत में) काफिरों को लिए जो सख्त अज़ाब (मुहय्या किया गया) है अफसोस नाक है
3الَّذِينَ يَسْتَحِبُّونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا عَلَى الْآخِرَةِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ بَعِيدٍ
वह कुफ्फार जो दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह देते हैं और (लोगों) को ख़ुदा की राह (पर चलने) से रोकते हैं और इसमें ख्वाह मा ख्वाह कज़ी पैदा करना चाहते हैं यही लोग बड़े पल्ले दर्जे की गुमराही में हैं
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अनुवाद — इब्राहीम 1

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Tuesday, August 18, 2026

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