इब्राहीम · 2/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
اللَّهِ الَّذِي لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْكَافِرِينَ مِنْ عَذَابٍ شَدِيدٍ ۝٢
Allaahil lazee lahoo maa fis samaawaati wa maa fill ard; wa wailul lilkaafireena min `azaabin shadeed
📖 हिंदी अर्थ
वह ख़ुदा को कुछ आसमानों में और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और (आख़िरत में) काफिरों को लिए जो सख्त अज़ाब (मुहय्या किया गया) है अफसोस नाक है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اللَّهِ: अल्लाह (जो पूजा के योग्य है)
  • لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ: उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है
  • وَيْلٌ: विनाश, सख्त अज़ाब, बुरा अंजाम
  • لِلْكَافِرِينَ: इनकार करने वालों के लिए
  • مِنْ عَذَابٍ شَدِيدٍ: सख्त अज़ाब की वजह से

तफ़सीर:

यह आयत उस किताब (क़ुरआन) के बारे में बताती है जिसे अल्लाह ने अपने प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर उतारा है। यह किताब इसलिए उतारी गई ताकि लोगों को अंधेरों से निकालकर रोशनी की तरफ लाया जाए। यह वह अल्लाह है जो अकेले ही आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ का मालिक है। आसमानों में जो कुछ भी है — सूरज, चाँद, तारे, फ़रिश्ते — और ज़मीन में जो कुछ भी है — इंसान, जानवर, पहाड़, समुद्र, खज़ाने — सब कुछ उसी की मिल्कियत में है। कोई भी चीज़ उसके इल्म और इख़्तियार से बाहर नहीं है।

जब यह सच्चाई है कि सब कुछ अल्लाह का है, तो फिर इबादत और बंदगी भी सिर्फ उसी की होनी चाहिए। किसी और को उसका शरीक बनाना, किसी और से मदद माँगना, या किसी और के आगे सर झुकाना — यह सब उस अल्लाह के हक़ की खिलाफ़वरज़ी है जो सब कुछ का मालिक है।

इसके बाद अल्लाह तआला ने उन लोगों के लिए सख्त चेतावनी दी है जो इस हक़ीक़त को नकारते हैं और कुफ़्र पर क़ायम रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए "वैल" है — यानी विनाश और बर्बादी — एक ऐसे सख्त अज़ाब की वजह से जिसकी कोई मिसाल नहीं। यह अज़ाब उन्हें उनके इनकार की सज़ा के तौर पर दिया जाएगा।

यह आयत हमें दो बड़ी बातें सिखाती है: पहली, अल्लाह की अज़मत और कुदरत को पहचानना — वह जो सब कुछ का मालिक है, उसकी इबादत ही सच्ची इबादत है। दूसरी, कुफ़्र और इनकार का अंजाम बहुत बुरा है — इसलिए हमें अपने ईमान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए और अल्लाह की रहमत की तरफ दौड़ना चाहिए।

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी रहमत का दरवाज़ा भी खोला है — उसने किताब उतारी ताकि लोग अंधेरों से निकलें। यानी अल्लाह चाहता है कि हम सीधे रास्ते पर चलें, उसकी रहमत और मग़फिरत हासिल करें। जो लोग इस दावत को क़बूल कर लेंगे, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है, और जो इनकार करेंगे, उनके लिए सख्त अज़ाब का डर है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के इस एहसान का शुक्र अदा करें कि उसने हमें क़ुरआन जैसी नेमत दी, और इस पर अमल करके अपनी ज़िंदगी को रोशन करें।



📜 आयत 1-4 — इब्राहीम

1الر ۚ كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ إِلَيْكَ لِتُخْرِجَ النَّاسَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ بِإِذْنِ رَبِّهِمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْعَزِيزِ الْحَمِيدِ
अलिफ़ लाम रा ऐ रसूल ये (क़ुरान वह) किताब है जिसकों हमने तुम्हारे पास इसलिए नाज़िल किया है कि तुम लोगों को परवरदिगार के हुक्म से (कुफ्र की) तारीकी से (ईमान की) रौशनी में निकाल लाओ ग़रज़ उसकी राह पर लाओ जो सब पर ग़ालिब और सज़ावार हम्द है
2اللَّهِ الَّذِي لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْكَافِرِينَ مِنْ عَذَابٍ شَدِيدٍ
वह ख़ुदा को कुछ आसमानों में और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और (आख़िरत में) काफिरों को लिए जो सख्त अज़ाब (मुहय्या किया गया) है अफसोस नाक है
3الَّذِينَ يَسْتَحِبُّونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا عَلَى الْآخِرَةِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ بَعِيدٍ
वह कुफ्फार जो दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह देते हैं और (लोगों) को ख़ुदा की राह (पर चलने) से रोकते हैं और इसमें ख्वाह मा ख्वाह कज़ी पैदा करना चाहते हैं यही लोग बड़े पल्ले दर्जे की गुमराही में हैं
4وَمَا أَرْسَلْنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوْمِهِ لِيُبَيِّنَ لَهُمْ ۖ فَيُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और हमने जब कभी कोई पैग़म्बर भेजा तो उसकी क़ौम की ज़बान में बातें करता हुआ (ताकि उसके सामने (हमारे एहक़ाम) बयान कर सके तो यही ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिस की चाहता है हिदायत करता है वही सब पर ग़ालिब हिकमत वाला है
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अनुवाद — इब्राहीम 2

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Tuesday, August 18, 2026

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