अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اللَّهِ: अल्लाह (जो पूजा के योग्य है)
- لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ: उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है
- وَيْلٌ: विनाश, सख्त अज़ाब, बुरा अंजाम
- لِلْكَافِرِينَ: इनकार करने वालों के लिए
- مِنْ عَذَابٍ شَدِيدٍ: सख्त अज़ाब की वजह से
तफ़सीर:
यह आयत उस किताब (क़ुरआन) के बारे में बताती है जिसे अल्लाह ने अपने प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर उतारा है। यह किताब इसलिए उतारी गई ताकि लोगों को अंधेरों से निकालकर रोशनी की तरफ लाया जाए। यह वह अल्लाह है जो अकेले ही आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ का मालिक है। आसमानों में जो कुछ भी है — सूरज, चाँद, तारे, फ़रिश्ते — और ज़मीन में जो कुछ भी है — इंसान, जानवर, पहाड़, समुद्र, खज़ाने — सब कुछ उसी की मिल्कियत में है। कोई भी चीज़ उसके इल्म और इख़्तियार से बाहर नहीं है।
जब यह सच्चाई है कि सब कुछ अल्लाह का है, तो फिर इबादत और बंदगी भी सिर्फ उसी की होनी चाहिए। किसी और को उसका शरीक बनाना, किसी और से मदद माँगना, या किसी और के आगे सर झुकाना — यह सब उस अल्लाह के हक़ की खिलाफ़वरज़ी है जो सब कुछ का मालिक है।
इसके बाद अल्लाह तआला ने उन लोगों के लिए सख्त चेतावनी दी है जो इस हक़ीक़त को नकारते हैं और कुफ़्र पर क़ायम रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए "वैल" है — यानी विनाश और बर्बादी — एक ऐसे सख्त अज़ाब की वजह से जिसकी कोई मिसाल नहीं। यह अज़ाब उन्हें उनके इनकार की सज़ा के तौर पर दिया जाएगा।
यह आयत हमें दो बड़ी बातें सिखाती है: पहली, अल्लाह की अज़मत और कुदरत को पहचानना — वह जो सब कुछ का मालिक है, उसकी इबादत ही सच्ची इबादत है। दूसरी, कुफ़्र और इनकार का अंजाम बहुत बुरा है — इसलिए हमें अपने ईमान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए और अल्लाह की रहमत की तरफ दौड़ना चाहिए।
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी रहमत का दरवाज़ा भी खोला है — उसने किताब उतारी ताकि लोग अंधेरों से निकलें। यानी अल्लाह चाहता है कि हम सीधे रास्ते पर चलें, उसकी रहमत और मग़फिरत हासिल करें। जो लोग इस दावत को क़बूल कर लेंगे, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है, और जो इनकार करेंगे, उनके लिए सख्त अज़ाब का डर है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के इस एहसान का शुक्र अदा करें कि उसने हमें क़ुरआन जैसी नेमत दी, और इस पर अमल करके अपनी ज़िंदगी को रोशन करें।
📜 आयत 1-4 — इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 2
सूरा इब्राहीम आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह ख़ुदा को कुछ आसमानों में और जो कुछ ज़मीन…सूरा आयत 2/52 — इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: इब्राहीम सुनें, इब्राहीम अनुवाद, इब्राहीम mp3, इब्राहीम pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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