अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- मसाकीन: कमज़ोर और ग़रीब लोग
- य'मलून फ़िल-बह्र: समुद्र में काम करते थे (मज़दूरी या व्यापार के लिए)
- उ'अय्यबाहा: उसमें कोई कमी/खराबी पैदा कर दूँ
- वराअहुम: उनके सामने (या उनके पीछे)
- ग़स्बन: ज़बरदस्ती, बिना हक़ के छीनना
तफ़सीर:
यह वही घटना है जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) हज़रत ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) के साथ सफ़र कर रहे थे। जब उन्होंने एक नाव को ख़राब किया, तो मूसा (अलैहिस्सलाम) ने इस पर हैरानी ज़ाहिर की। फिर ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) ने इसका राज़ बताते हुए फ़रमाया:
यह नाव जिसे मैंने ख़राब किया था, वह कुछ ग़रीब मज़दूरों की थी जो समुद्र में काम करके अपनी रोज़ी-रोज़गार कमाते थे। ये लोग इतने कमज़ोर और मज़लूम थे कि अपनी चीज़ की हिफ़ाज़त नहीं कर सकते थे। मैंने जान-बूझकर उसमें एक छोटी-सी ख़राबी पैदा कर दी, ताकि वह नाव 'आइब (नुक़्स वाली) हो जाए। इसकी वजह यह थी कि उनके सामने (या रास्ते में) एक ज़ालिम बादशाह था जो हर अच्छी और सही-सलामत नाव को ज़बरदस्ती छीन लेता था। जब वह देखेगा कि यह नाव ख़राब है, तो वह इसे छोड़ देगा और इस तरह यह ग़रीब मज़दूर अपनी नाव बचा लेंगे।
यह अल्लाह की हिकमत थी कि एक छोटा-सा नुक़्सान (नाव में छेद) एक बड़े नुक़्सान (नाव पूरी तरह छिन जाने) से बचाने का ज़रिया बना। इससे हमें सबक़ मिलता है कि कभी-कभी अल्लाह की तरफ़ से आने वाली मुसीबत या कमी दरअसल रहमत का पर्दा होती है। इंसान की नाकिस अक़्ल हर बात की हिकमत नहीं समझ सकती, लेकिन अल्लाह जो करता है, बंदे की भलाई के लिए ही करता है।
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि ज़ालिम हुक्काम के ज़माने में भी अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त के लिए ऐसे उपाय करता है जो आम नज़रों से छिपे होते हैं। हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसके फ़ैसलों पर राज़ी रहें। यही सच्चे मोमिन की निशानी है।
📜 आयत 77-81 — अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 79
सूरा अल-कहफ आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (लीजिए सुनिये) वह कश्ती (जिसमें मैंने सुराख़ कर दिया था)…सूरा आयत 79/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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