अल-बकरा · 141/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
تِلْكَ أُمَّةٌ قَدْ خَلَتْ ۖ لَهَا مَا كَسَبَتْ وَلَكُم مَّا كَسَبْتُمْ ۖ وَلَا تُسْأَلُونَ عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝١٤١
Tilka ummatun qad khalat lahaa maa kasabat wa lakum maa kasabtum wa laa tus`aloona `ammaa kaano ya`maloo
📖 हिंदी अर्थ
ये वह लोग थे जो सिधार चुके जो कुछ कमा गए उनके लिए था और जो कुछ तुम कमाओगे तुम्हारे लिए होगा और जो कुछ वह कर गुज़रे उसकी पूछगछ तुमसे न होगी
📜

अनुवाद — Tafsir

यह अल्लाह का फरमान है कि वे लोग (इब्राहीम, इस्माईल, इसहाक, याकूब और उनकी संतानें) एक उम्मत थे जो गुज़र चुके हैं। उनके लिए वह है जो उन्होंने कमाया, और तुम्हारे लिए वह है जो तुम कमाते हो। और तुमसे उन कर्मों के बारे में सवाल नहीं होगा जो वे करते थे।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि किसी व्यक्ति का किसी दूसरे व्यक्ति से नाता — चाहे वह खून का रिश्ता हो या नस्ल का — उसे उस व्यक्ति के अच्छे कर्मों का लाभ नहीं पहुँचा सकता। हर इंसान अपने किए का जिम्मेदार है। जो लोग गुज़र चुके हैं, उन्होंने अपने समय में जो किया, उसका फल उन्हें मिलेगा, और तुम जो करते हो, उसका फल तुम्हें मिलेगा। कोई किसी का बोझ नहीं उठाएगा।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो केवल नस्ली या पैतृक गौरव पर इतराते हैं और सोचते हैं कि किसी बड़े इंसान से उनका संबंध होने मात्र से उन्हें नजात मिल जाएगी। अल्लाह स्पष्ट करता है कि असली कसौटी ईमान और अच्छे कर्म हैं, न कि वंशावली। तुम्हें अपने पूर्वजों के कर्मों का फल नहीं मिलेगा, बल्कि तुम्हें अपने कर्मों का हिसाब देना होगा।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने जीवन को स्वयं सुधारना चाहिए, अपने ईमान को मजबूत करना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए। हमें यह भी समझना चाहिए कि अल्लाह के यहाँ न्याय पूर्ण है — कोई किसी का हिसाब नहीं देगा, और न ही कोई किसी के कर्मों का लाभ उठा सकेगा। यही अल्लाह की रहमत और अदल है कि हर व्यक्ति को उसकी अपनी मेहनत का फल मिलेगा।

हमें चाहिए कि हम अपने पूर्वजों की अच्छाइयों को याद करें, लेकिन उन पर भरोसा करके न बैठ जाएँ। बल्कि उनके अच्छे कर्मों को अपने लिए प्रेरणा बनाएँ और स्वयं भी अच्छे कर्म करें ताकि हमारा अपना हिसाब अच्छा हो। अल्लाह तआला हमें तौफीक दे कि हम अपने जीवन को उसकी रजा के अनुसार बनाएँ। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 139-143 — अल-बकरा

139قُلْ أَتُحَاجُّونَنَا فِي اللَّهِ وَهُوَ رَبُّنَا وَرَبُّكُمْ وَلَنَا أَعْمَالُنَا وَلَكُمْ أَعْمَالُكُمْ وَنَحْنُ لَهُ مُخْلِصُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि क्या तुम हम से खुदा के बारे झगड़ते हो हालाँकि वही हमारा (भी) परवरदिगार है (वही) तुम्हारा भी (परवरदिगार है) हमारे लिए है हमारी कारगुज़ारियाँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारसतानियाँ और हम तो निरेखरे उसी में हैं
140أَمْ تَقُولُونَ إِنَّ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطَ كَانُوا هُودًا أَوْ نَصَارَىٰ ۗ قُلْ أَأَنتُمْ أَعْلَمُ أَمِ اللَّهُ ۗ وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن كَتَمَ شَهَادَةً عِندَهُ مِنَ اللَّهِ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ
क्या तुम कहते हो कि इबराहीम व इसमाइल व इसहाक़ व आलौदें याकूब सब के सब यहूदी या नसरानी थे (ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि तुम ज्यादा वाक़िफ़ हो या खुदा और उससे बढ़कर कौन ज़ालिम होगा जिसके पास खुदा की तरफ से गवाही (मौजूद) हो (कि वह यहूदी न थे) और फिर वह छिपाए और जो कुछ तुम करते हो खुदा उससे बेख़बर नहीं
141تِلْكَ أُمَّةٌ قَدْ خَلَتْ ۖ لَهَا مَا كَسَبَتْ وَلَكُم مَّا كَسَبْتُمْ ۖ وَلَا تُسْأَلُونَ عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
ये वह लोग थे जो सिधार चुके जो कुछ कमा गए उनके लिए था और जो कुछ तुम कमाओगे तुम्हारे लिए होगा और जो कुछ वह कर गुज़रे उसकी पूछगछ तुमसे न होगी
142۞ سَيَقُولُ السُّفَهَاءُ مِنَ النَّاسِ مَا وَلَّاهُمْ عَن قِبْلَتِهِمُ الَّتِي كَانُوا عَلَيْهَا ۚ قُل لِّلَّهِ الْمَشْرِقُ وَالْمَغْرِبُ ۚ يَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
बाज़ अहमक़ लोग ये कह बैठेगें कि मुसलमान जिस क़िबले बैतुल मुक़द्दस की तरफ पहले से सजदा करते थे उस से दूसरे क़िबले की तरफ मुड़ जाने का बाइस हुआ। ऐ रसूल तुम उनके जवाब में कहो कि पूरब पश्चिम सब ख़ुदा का है जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ हिदायत करता है
143وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَاكُمْ أُمَّةً وَسَطًا لِّتَكُونُوا شُهَدَاءَ عَلَى النَّاسِ وَيَكُونَ الرَّسُولُ عَلَيْكُمْ شَهِيدًا ۗ وَمَا جَعَلْنَا الْقِبْلَةَ الَّتِي كُنتَ عَلَيْهَا إِلَّا لِنَعْلَمَ مَن يَتَّبِعُ الرَّسُولَ مِمَّن يَنقَلِبُ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ ۚ وَإِن كَانَتْ لَكَبِيرَةً إِلَّا عَلَى الَّذِينَ هَدَى اللَّهُ ۗ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيُضِيعَ إِيمَانَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِالنَّاسِ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ
और जिस तरह तुम्हारे क़िबले के बारे में हिदायत की उसी तरह तुम को आदिल उम्मत बनाया ताकि और लोगों के मुक़ाबले में तुम गवाह बनो और रसूल मोहम्मद तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बनें और (ऐ रसूल) जिस क़िबले की तरफ़ तुम पहले सज़दा करते थे हम ने उसको को सिर्फ इस वजह से क़िबला क़रार दिया था कि जब क़िबला बदला जाए तो हम उन लोगों को जो रसूल की पैरवी करते हैं हम उन लोगों से अलग देख लें जो उलटे पाव फिरते हैं अगरचे ये उलट फेर सिवा उन लोगों के जिन की ख़ुदा ने हिदायत की है सब पर शाक़ ज़रुर है और ख़ुदा ऐसा नहीं है कि तुम्हारे ईमान नमाज़ को जो बैतुलमुक़द्दस की तरफ पढ़ चुके हो बरबाद कर दे बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा ही रफ़ीक व मेहरबान है।
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अनुवाद — अल-बकरा 141

सूरा अल-बकरा आयत 141 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये वह लोग थे जो सिधार चुके जो कुछ कमा…

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Tuesday, August 18, 2026

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