अल-बकरा · 149/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۖ وَإِنَّهُ لَلْحَقُّ مِن رَّبِّكَ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ ۝١٤٩
Wa min haisu kharajta fawalli wajhaka shatral Masjidil Haraami wa innahoo lalhaqqu mir Rabbik; wa mallaahu bighaafilin `ammaa ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक मक्का से) तो भी नमाज़ मे तुम अपना मुँह मस्ज़िदे मोहतरम (काबा) की तरफ़ कर लिया करो और बेशक ये नया क़िबला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَطْرَ: की ओर, दिशा में।
  • الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ: पवित्र मस्जिद (काबा)।
  • لَلْحَقُّ: निस्संदेह सत्य।
  • بِغَافِلٍ: बेखबर, अनदेखा करने वाला।

व्याख्या:

हे नबी! आप जहाँ से भी निकलें—चाहे यात्रा में हों या किसी अन्य स्थान पर—और नमाज़ अदा करने का इरादा करें, तो अपना चेहरा मस्जिद-ए-हराम (काबा) की ओर कर लें। यही आदेश आपके रब की ओर से सत्य है, जो आप पर उतारा गया है। यह कोई मनमाना नियम नहीं, बल्कि ईश्वरीय आदेश है जो सत्य पर आधारित है। अल्लाह तआला उन सब कर्मों से पूर्णतः अवगत है जो तुम लोग करते हो—न तो उसकी नज़र से कोई बात छिपी है और न ही वह तुम्हारे अमल से बेखबर है। वह तुम्हारे हर अच्छे या बुरे काम का हिसाब रखेगा और उसका पूरा बदला देगा। यह आदेश केवल नबी ﷺ के लिए नहीं, बल्कि उनके अनुयायियों के लिए भी है—हर वह व्यक्ति जो नमाज़ पढ़े, उसे क़िबला (काबा) की ओर मुँह करना अनिवार्य है, चाहे वह कहीं भी हो।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की इबादत में एकता और अनुशासन होना चाहिए। सभी मुसलमान दुनिया के किसी भी कोने में हों, एक ही दिशा (काबा) की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ते हैं, जो उनकी एकता और भाईचारे की प्रतीक है।
  2. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह हर समय हमारे साथ है और हमारे हर कर्म को देख रहा है। यह विश्वास इंसान को अच्छे काम करने की प्रेरणा देता है और बुरे कामों से रोकता है, क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा रब सब कुछ देख रहा है।
  3. इस्लाम में नमाज़ की अहमियत और उसके नियमों का पालन करना कितना आवश्यक है, यह इस आयत से स्पष्ट होता है। यह हमें सिखाता है कि धर्म के मामलों में अपनी मर्ज़ी नहीं चलानी चाहिए, बल्कि अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों का पालन करना चाहिए।
  4. यह आयत मुसलमानों को आश्वस्त करती है कि उनकी इबादत और अच्छे कर्म अल्लाह से छिपे नहीं हैं। चाहे लोग उनकी परवाह करें या न करें, अल्लाह उनके कर्मों का सही मूल्यांकन करेगा और उन्हें उचित प्रतिफल देगा।


📜 आयत 147-151 — सूरा अल-बकरा

147الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ ۖ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَرِينَ
ऐ रसूल तबदीले क़िबला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है पस तुम कहीं शक करने वालों में से न हो जाना
148وَلِكُلٍّ وِجْهَةٌ هُوَ مُوَلِّيهَا ۖ فَاسْتَبِقُوا الْخَيْرَاتِ ۚ أَيْنَ مَا تَكُونُوا يَأْتِ بِكُمُ اللَّهُ جَمِيعًا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और हर फरीक़ के वास्ते एक सिम्त है उसी की तरफ वह नमाज़ में अपना मुँह कर लेता है पस तुम ऐ मुसलमानों झगड़े को छोड़ दो और नेकियों मे उन से लपक के आगे बढ़ जाओ तुम जहाँ कहीं होगे ख़ुदा तुम सबको अपनी तरफ ले आऐगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
149وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۖ وَإِنَّهُ لَلْحَقُّ مِن رَّبِّكَ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक मक्का से) तो भी नमाज़ मे तुम अपना मुँह मस्ज़िदे मोहतरम (काबा) की तरफ़ कर लिया करो और बेशक ये नया क़िबला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है
150وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۚ وَحَيْثُ مَا كُنتُمْ فَوَلُّوا وُجُوهَكُمْ شَطْرَهُ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَيْكُمْ حُجَّةٌ إِلَّا الَّذِينَ ظَلَمُوا مِنْهُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَاخْشَوْنِي وَلِأُتِمَّ نِعْمَتِي عَلَيْكُمْ وَلَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
और तुम्हारे कामों से ख़ुदा ग़ाफिल नही है और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक के मक्का से तो भी) तुम (नमाज़ में) अपना मुँह मस्ज़िदे हराम की तरफ कर लिया करो और (ऐ रसूल) तुम जहाँ कही हुआ करो तो नमाज़ में अपना मुँह उसी काबा की तरफ़ कर लिया करो (बार बार हुक्म देने का एक फायदा ये है ताकि लोगों का इल्ज़ाम तुम पर न आने पाए मगर उन में से जो लोग नाहक़ हठधर्मी करते हैं वह तो ज़रुर इल्ज़ाम देगें) तो तुम लोग उनसे डरो नहीं और सिर्फ़ मुझसे डरो और (दूसरा फ़ायदा ये है) ताकि तुम पर अपनी नेअमत पूरी कर दूँ
151كَمَا أَرْسَلْنَا فِيكُمْ رَسُولًا مِّنكُمْ يَتْلُو عَلَيْكُمْ آيَاتِنَا وَيُزَكِّيكُمْ وَيُعَلِّمُكُمُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَيُعَلِّمُكُم مَّا لَمْ تَكُونُوا تَعْلَمُونَ
और तीसरा फायदा ये है ताकि तुम हिदायत पाओ मुसलमानों ये एहसान भी वैसा ही है जैसे हम ने तुम में तुम ही में का एक रसूल भेजा जो तुमको हमारी आयतें पढ़ कर सुनाए और तुम्हारे नफ्स को पाकीज़ा करे और तुम्हें किताब क़ुरान और अक्ल की बातें सिखाए और तुम को वह बातें बतांए जिन की तुम्हें पहले से खबर भी न थी
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
149आयत

अनुवाद — अल-बकरा 149

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Tuesday, September 29, 2026

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