अल-बकरा · 195/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَأَنفِقُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَلَا تُلْقُوا بِأَيْدِيكُمْ إِلَى التَّهْلُكَةِ ۛ وَأَحْسِنُوا ۛ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ ۝١٩٥
Wa anfiqoo fee sabeelil laahi wa laa tulqoo bi aydeekum ilat tahlukati wa ahsinoo; innal laaha yuhibbul muhsineen
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ जान हलाकत मे न डालो और नेकी करो बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَأَنفِقُوا: खर्च करो, दान दो।
  • فِي سَبِيلِ اللَّهِ: अल्लाह के मार्ग में, यानी जिहाद और उसके अन्य कार्यों में।
  • تُلْقُوا بِأَيْدِيكُمْ: अपने हाथों से डालना, यानी स्वयं को मुसीबत में डालना।
  • التَّهْلُكَةِ: विनाश, हलाकत, तबाही।
  • وَأَحْسِنُوا: अच्छा करो, भलाई करो, सुंदर तरीके से कार्य करो।
  • يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ: अच्छा करने वालों से प्रेम करता है।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों को निर्देश देता है कि वे अल्लाह के मार्ग में खर्च करते रहें—चाहे वह जिहाद हो, दान-पुण्य हो, या दीन की मदद का कोई भी कार्य हो। यह खर्च निरंतर और बिना रुके होना चाहिए, ताकि दीन की बुनियाद मज़बूत हो और इस्लाम का झंडा बुलंद रहे।

इसके साथ ही अल्लाह ने सख्त चेतावनी दी कि अपने हाथों से अपने आपको विनाश में मत डालो। इसका मतलब यह है कि जिहाद और अल्लाह के मार्ग में खर्च छोड़कर बैठ जाना, या ऐसे काम करना जो आपकी तबाही का कारण बनें, वर्जित है। कुछ विद्वानों ने इसमें यह भी शामिल किया है कि अपनी जान को खतरे में डालना, हराम कामों में पड़ना, या हताशा में आकर कोई गलत कदम उठाना भी इसी श्रेणी में आता है। अल्लाह ने हमें बताया कि निराशा और आलस्य से बचो, क्योंकि यह विनाश का रास्ता है।

फिर अल्लाह कहता है: "और अच्छा करो"—यानी अपनी इबादतों में, अपने व्यवहार में, अपने अख़लाक़ (चरित्र) में और अपने सभी कार्यों में सुंदरता और भलाई अपनाओ। खर्च में भी अति (फिज़ूलखर्ची) न करो और न ही कंजूसी करो, बल्कि संतुलित और सुंदर तरीके से खर्च करो। अल्लाह पर अच्छा गुमान रखो, क्योंकि वह अपने बंदों के साथ भलाई ही करता है।

अंत में अल्लाह ने इसका कारण बताया: "निश्चय ही अल्लाह अच्छा करने वालों से प्रेम करता है।" यह एक बहुत बड़ी खुशखबरी है—जो लोग अपने हर काम में अच्छाई, ईमानदारी और ख़ुलूस (शुद्ध नियत) अपनाते हैं, अल्लाह उनसे प्रेम करता है। और जिससे अल्लाह प्रेम करता है, उसे दुनिया में सफलता और आख़िरत में जन्नत की बड़ी नेमतें मिलती हैं।


दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि एक पूरा जीवन-दर्शन है। अल्लाह हमें सिखा रहा है कि अपने धन और जान से दीन की मदद करो, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। जो लोग अल्लाह के मार्ग में खर्च करते हैं, वे कभी घाटे में नहीं रहते—अल्लाह उन्हें दुनिया में भी और आख़िरत में भी बेहतर चीज़ें देता है। साथ ही, यह आयत हमें निराशा और हताशा से बचाती है, क्योंकि अल्लाह की रहमत और मदद हमेशा उनके साथ होती है जो उस पर भरोसा करते हैं और अच्छे काम करते हैं। आइए, हम सब इस आयत पर अमल करें—अपने खर्च में, अपने व्यवहार में और अपने हर काम में अच्छाई को अपनाएँ, ताकि अल्लाह की मुहब्बत हमारे नसीब बने।

🎧 सुनें

📜 आयत 193-197 — अल-बकरा

193وَقَاتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌ وَيَكُونَ الدِّينُ لِلَّهِ ۖ فَإِنِ انتَهَوْا فَلَا عُدْوَانَ إِلَّا عَلَى الظَّالِمِينَ
और उन से लड़े जाओ यहाँ तक कि फ़साद बाक़ी न रहे और सिर्फ ख़ुदा ही का दीन रह जाए फिर अगर वह लोग बाज़ रहे तो उन पर ज्यादती न करो क्योंकि ज़ालिमों के सिवा किसी पर ज्यादती (अच्छी) नहीं
194الشَّهْرُ الْحَرَامُ بِالشَّهْرِ الْحَرَامِ وَالْحُرُمَاتُ قِصَاصٌ ۚ فَمَنِ اعْتَدَىٰ عَلَيْكُمْ فَاعْتَدُوا عَلَيْهِ بِمِثْلِ مَا اعْتَدَىٰ عَلَيْكُمْ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ مَعَ الْمُتَّقِينَ
हुरमत वाला महीना हुरमत वाले महीने के बराबर है (और कुछ महीने की खुसूसियत नहीं) सब हुरमत वाली चीजे एक दूसरे के बराबर हैं पस जो शख्स तुम पर ज्यादती करे तो जैसी ज्यादती उसने तुम पर की है वैसी ही ज्यादती तुम भी उस पर करो और ख़ुदा से डरते रहो और खूब समझ लो कि ख़ुदा परहेज़गारों का साथी है
195وَأَنفِقُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَلَا تُلْقُوا بِأَيْدِيكُمْ إِلَى التَّهْلُكَةِ ۛ وَأَحْسِنُوا ۛ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ
और ख़ुदा की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ जान हलाकत मे न डालो और नेकी करो बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है
196وَأَتِمُّوا الْحَجَّ وَالْعُمْرَةَ لِلَّهِ ۚ فَإِنْ أُحْصِرْتُمْ فَمَا اسْتَيْسَرَ مِنَ الْهَدْيِ ۖ وَلَا تَحْلِقُوا رُءُوسَكُمْ حَتَّىٰ يَبْلُغَ الْهَدْيُ مَحِلَّهُ ۚ فَمَن كَانَ مِنكُم مَّرِيضًا أَوْ بِهِ أَذًى مِّن رَّأْسِهِ فَفِدْيَةٌ مِّن صِيَامٍ أَوْ صَدَقَةٍ أَوْ نُسُكٍ ۚ فَإِذَا أَمِنتُمْ فَمَن تَمَتَّعَ بِالْعُمْرَةِ إِلَى الْحَجِّ فَمَا اسْتَيْسَرَ مِنَ الْهَدْيِ ۚ فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ ثَلَاثَةِ أَيَّامٍ فِي الْحَجِّ وَسَبْعَةٍ إِذَا رَجَعْتُمْ ۗ تِلْكَ عَشَرَةٌ كَامِلَةٌ ۗ ذَٰلِكَ لِمَن لَّمْ يَكُنْ أَهْلُهُ حَاضِرِي الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
और सिर्फ ख़ुदा ही के वास्ते हज और उमरा को पूरा करो अगर तुम बीमारी वगैरह की वजह से मजबूर हो जाओ तो फिर जैसी क़ुरबानी मयस्सर आये (कर दो) और जब तक कुरबानी अपनी जगह पर न पहुँच जाये अपने सर न मुँडवाओ फिर जब तुम में से कोई बीमार हो या उसके सर में कोई तकलीफ हो तो (सर मुँडवाने का बदला) रोजे या खैरात या कुरबानी है पस जब मुतमइन रहों तो जो शख्स हज तमत्तो का उमरा करे तो उसको जो कुरबानी मयस्सर आये करनी होगी और जिस से कुरबानी ना मुमकिन हो तो तीन रोजे ज़माना ए हज में (रखने होंगे) और सात रोजे ज़ब तुम वापस आओ ये पूरा दहाई है ये हुक्म उस शख्स के वास्ते है जिस के लड़के बाले मस्ज़िदुल हराम (मक्का) के बाशिन्दे न हो और ख़ुदा से डरो और समझ लो कि ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब वाला है
197الْحَجُّ أَشْهُرٌ مَّعْلُومَاتٌ ۚ فَمَن فَرَضَ فِيهِنَّ الْحَجَّ فَلَا رَفَثَ وَلَا فُسُوقَ وَلَا جِدَالَ فِي الْحَجِّ ۗ وَمَا تَفْعَلُوا مِنْ خَيْرٍ يَعْلَمْهُ اللَّهُ ۗ وَتَزَوَّدُوا فَإِنَّ خَيْرَ الزَّادِ التَّقْوَىٰ ۚ وَاتَّقُونِ يَا أُولِي الْأَلْبَابِ
हज के महीने तो (अब सब को) मालूम हैं (शव्वाल, ज़ीक़ादा, जिलहज) पस जो शख्स उन महीनों में अपने ऊपर हज लाज़िम करे तो (एहराम से आख़िर हज तक) न औरत के पास जाए न कोई और गुनाह करे और न झगडे और नेकी का कोई सा काम भी करों तो ख़ुदा उस को खूब जानता है और (रास्ते के लिए) ज़ाद राह मुहिय्या करो और सब मे बेहतर ज़ाद राह परहेज़गारी है और ऐ अक्लमन्दों मुझ से डरते रहो
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
195आयत

अनुवाद — अल-बकरा 195

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Tuesday, August 18, 2026

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