Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَأَنفِقُوا: खर्च करो, दान दो।
- فِي سَبِيلِ اللَّهِ: अल्लाह के मार्ग में, यानी जिहाद और उसके अन्य कार्यों में।
- تُلْقُوا بِأَيْدِيكُمْ: अपने हाथों से डालना, यानी स्वयं को मुसीबत में डालना।
- التَّهْلُكَةِ: विनाश, हलाकत, तबाही।
- وَأَحْسِنُوا: अच्छा करो, भलाई करो, सुंदर तरीके से कार्य करो।
- يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ: अच्छा करने वालों से प्रेम करता है।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों को निर्देश देता है कि वे अल्लाह के मार्ग में खर्च करते रहें—चाहे वह जिहाद हो, दान-पुण्य हो, या दीन की मदद का कोई भी कार्य हो। यह खर्च निरंतर और बिना रुके होना चाहिए, ताकि दीन की बुनियाद मज़बूत हो और इस्लाम का झंडा बुलंद रहे।
इसके साथ ही अल्लाह ने सख्त चेतावनी दी कि अपने हाथों से अपने आपको विनाश में मत डालो। इसका मतलब यह है कि जिहाद और अल्लाह के मार्ग में खर्च छोड़कर बैठ जाना, या ऐसे काम करना जो आपकी तबाही का कारण बनें, वर्जित है। कुछ विद्वानों ने इसमें यह भी शामिल किया है कि अपनी जान को खतरे में डालना, हराम कामों में पड़ना, या हताशा में आकर कोई गलत कदम उठाना भी इसी श्रेणी में आता है। अल्लाह ने हमें बताया कि निराशा और आलस्य से बचो, क्योंकि यह विनाश का रास्ता है।
फिर अल्लाह कहता है: "और अच्छा करो"—यानी अपनी इबादतों में, अपने व्यवहार में, अपने अख़लाक़ (चरित्र) में और अपने सभी कार्यों में सुंदरता और भलाई अपनाओ। खर्च में भी अति (फिज़ूलखर्ची) न करो और न ही कंजूसी करो, बल्कि संतुलित और सुंदर तरीके से खर्च करो। अल्लाह पर अच्छा गुमान रखो, क्योंकि वह अपने बंदों के साथ भलाई ही करता है।
अंत में अल्लाह ने इसका कारण बताया: "निश्चय ही अल्लाह अच्छा करने वालों से प्रेम करता है।" यह एक बहुत बड़ी खुशखबरी है—जो लोग अपने हर काम में अच्छाई, ईमानदारी और ख़ुलूस (शुद्ध नियत) अपनाते हैं, अल्लाह उनसे प्रेम करता है। और जिससे अल्लाह प्रेम करता है, उसे दुनिया में सफलता और आख़िरत में जन्नत की बड़ी नेमतें मिलती हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि एक पूरा जीवन-दर्शन है। अल्लाह हमें सिखा रहा है कि अपने धन और जान से दीन की मदद करो, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। जो लोग अल्लाह के मार्ग में खर्च करते हैं, वे कभी घाटे में नहीं रहते—अल्लाह उन्हें दुनिया में भी और आख़िरत में भी बेहतर चीज़ें देता है। साथ ही, यह आयत हमें निराशा और हताशा से बचाती है, क्योंकि अल्लाह की रहमत और मदद हमेशा उनके साथ होती है जो उस पर भरोसा करते हैं और अच्छे काम करते हैं। आइए, हम सब इस आयत पर अमल करें—अपने खर्च में, अपने व्यवहार में और अपने हर काम में अच्छाई को अपनाएँ, ताकि अल्लाह की मुहब्बत हमारे नसीब बने।
📜 आयत 193-197 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 195
सूरा अल-बकरा आयत 195 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ…सूरा आयत 195/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 193–197. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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