अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الشَّهْرُ الْحَرَامُ: वह पवित्र महीना जिसमें युद्ध और झगड़ा वर्जित है।
- الْحُرُمَاتُ: पवित्र चीज़ें, जैसे पवित्र महीने, पवित्र शहर (मक्का), और एहराम की हालत।
- قِصَاصٌ: बराबरी का बदला, समान प्रतिक्रिया।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को सिखाते हैं कि पवित्र महीने की पवित्रता का सम्मान करो, लेकिन अगर दुश्मन इस पवित्रता का उल्लंघन करें और तुम पर हमला करें, तो तुम्हें भी उसी पवित्र महीने में उनसे बदला लेने की अनुमति है। यह न्याय और समानता का सिद्धांत है — जैसा वे करें, वैसा ही जवाब दो।
याद रखो कि जब अल्लाह ने तुम्हें मक्का में प्रवेश करने और उमरा करने का अवसर दिया (सन 7 हिजरी में), तो यह उसी पवित्र महीने का बदला था जब मुशरिकों ने तुम्हें (सन 6 हिजरी में) मक्का में प्रवेश करने से रोका था। यानी अल्लाह ने तुम्हें वही अधिकार दिया जो उन्होंने तुमसे छीना था।
इसी तरह, जो कोई अल्लाह की पवित्र चीज़ों (पवित्र महीने, पवित्र शहर, एहराम) का उल्लंघन करे, उसे उसी के बराबर सज़ा दी जाएगी। यह अल्लाह का न्याय है कि जो ज़्यादती करे, उसके साथ उसी के बराबर का व्यवहार किया जाए।
फिर अल्लाह तआला स्पष्ट आदेश देते हैं: "जो कोई तुम पर अत्याचार करे, तुम भी उस पर उतना ही अत्याचार करो जितना उसने तुम पर किया" — लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम भी ज़्यादती करो। बल्कि सीमा यह है कि जितना उन्होंने किया, उतना ही जवाब दो, उससे ज़्यादा नहीं।
अंत में अल्लाह तआला डर और संयम की शिक्षा देते हैं: "अल्लाह से डरो और जान लो कि अल्लाह उन्हीं के साथ है जो उससे डरते हैं।" यानी जब तुम बदला लो, तो इंसाफ की हद से आगे मत बढ़ो, क्योंकि अल्लाह उन्हीं की मदद करता है जो उसकी सीमाओं का पालन करते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम न्याय और संतुलन का धर्म है। हमें किसी पर ज़ुल्म नहीं करना चाहिए, लेकिन अगर कोई हम पर ज़ुल्म करे, तो हमें अपने अधिकार की रक्षा का अधिकार है। साथ ही, हमें कभी भी हद से आगे नहीं बढ़ना चाहिए। यही अल्लाह की पसंदीदा शैली है — न्याय के साथ, लेकिन रहम और इंसाफ के साथ। अल्लाह उन्हीं के साथ होता है जो उससे डरते हैं और उसकी सीमाओं का पालन करते हैं। यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि अगर हम अल्लाह के डर के साथ जिएँ, तो अल्लाह हमारे साथ है — हमारी मदद करता है, हमें कामयाबी देता है, और हमें दुश्मनों पर फ़तह भी देता है।
📜 आयत 192-196 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 194
सूरा अल-बकरा आयत 194 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हुरमत वाला महीना हुरमत वाले महीने के बराबर है (और…सूरा आयत 194/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 192–196. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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