अल-मोमिनुन · 1/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَ ۝١
Qad aflahal mu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
अलबत्ता वह ईमान लाने वाले रस्तगार हुए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • قَدْ: निश्चय ही / वास्तव में — यहाँ यह यक़ीन और पुष्टि के लिए आया है।
  • أَفْلَحَ: कामयाब हुआ, सफल हुआ, फलाह पाया — यानी वह मंज़िल पा ली जिसकी तरफ़ दौड़ा जा रहा था, और उस अज़ाब से बच गया जिससे डर लगता था।
  • الْمُؤْمِنُونَ: वे लोग जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर सच्चे दिल से ईमान लाए, और अपने ईमान को अपने अमल से साबित किया।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में मोमिनीन को सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी सुनाई है — "قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَ" यानी "निश्चय ही कामयाब हो गए मोमिनीन।" यह कोई उम्मीद या आरज़ू नहीं, बल्कि एक पक्की ख़बर है, एक ऐसा एलान है जो अल्लाह की तरफ़ से सुनाया गया है। जब अल्लाह किसी चीज़ को "قَدْ" के साथ बयान करता है, तो समझ लीजिए कि वह चीज़ होकर रहेगी, उसमें कोई शक नहीं।

"फ़लाह" का मतलब सिर्फ़ दुनिया की कामयाबी नहीं है, बल्कि यह वह कामयाबी है जो दोनों जहान को घेर लेती है — जिसे पा लेने वाला हर उस चीज़ से बच जाता है जो उसे अल्लाह से दूर करे, और हर उस चीज़ को पा लेता है जो उसे अल्लाह के करीब करे। यह वह सफलता है जो जन्नत की हमेशा रहने वाली नेमतों तक पहुँचाती है, और जहन्नम के अज़ाब से महफ़ूज़ रखती है।

इस आयत में अल्लाह ने "ईमान" को कामयाबी की शर्त बनाया है, लेकिन यहाँ ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं है, बल्कि वह ईमान है जो दिल में जड़ पकड़ ले, और फिर अमल की शक्ल में ज़ाहिर हो — नमाज़, रोज़ा, ज़कात, सच्चाई, अमानत, पाकीज़गी, और अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाना। यही वह ईमान है जो इंसान को असली कामयाबी की तरफ़ ले जाता है।

ग़ौर कीजिए — अल्लाह ने यहाँ यह नहीं कहा कि "मोमिनीन कामयाब होंगे" (भविष्य के सिग़े में), बल्कि फ़रमाया: "कामयाब हो गए" (माज़ी के सिग़े में) — यानी यह ऐसी चीज़ है जो अल्लाह के यहाँ तय हो चुकी है। जिस बंदे ने सच्चा ईमान लाया और उस पर अमल किया, उसकी कामयाबी अल्लाह के यहाँ लिख दी गई है। यह मोमिन के लिए कितनी बड़ी तसल्ली है कि उसका रब उसे कामयाब करार दे चुका है।

और यही वह पहली आयत है जिसके बाद अल्लाह उन ख़ूबियों का ज़िक्र करता है जो मोमिन को मोमिन बनाती हैं — नमाज़ में ख़ुशू, बेकार बातों से परहेज़, पाकीज़गी का ख़याल, अमानत और वादे की पाबंदी। यानी ईमान सिर्फ़ दिल की चीज़ नहीं, बल्कि अमल की ज़िंदगी है।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि असली कामयाबी दौलत, शोहरत या दुनिया के ओहदों में नहीं है — बल्कि असली कामयाबी उस इंसान की है जो अल्लाह पर ईमान लाए, अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्म के मुताबिक़ ढाले, और आख़िरत के लिए ऐसा सामान इकट्ठा करे जो उसे जन्नत तक पहुँचाए। यही वह रास्ता है जो हर मुसीबत में सब्र, हर इम्तिहान में कामयाबी, और हर मुश्किल में राह दिखाता है।

अल्लाह हमें सच्चे मोमिनीन में शामिल करे, और उस कामयाबी से नवाज़े जो उसने अपने नेक बंदों के लिए तैयार की है। आमीन।



📜 आयत 1-3 — सूरा अल-मोमिनुन

1قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَ
अलबत्ता वह ईमान लाने वाले रस्तगार हुए
2الَّذِينَ هُمْ فِي صَلَاتِهِمْ خَاشِعُونَ
जो अपनी नमाज़ों में (खुदा के सामने) गिड़गिड़ाते हैं
3وَالَّذِينَ هُمْ عَنِ اللَّغْوِ مُعْرِضُونَ
और जो बेहूदा बातों से मुँह फेरे रहते हैं
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
1आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 1

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Sunday, October 11, 2026

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