अल-मोमिनुन · 2/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
الَّذِينَ هُمْ فِي صَلَاتِهِمْ خَاشِعُونَ ۝٢
Allazeena hum fee Salaatihim khaashi`oon
📖 हिंदी अर्थ
जो अपनी नमाज़ों में (खुदा के सामने) गिड़गिड़ाते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ख़ाशि'ऊन (خاشعون): अल्लाह के आगे झुकने वाले, विनम्र, नम्र और दिल से अल्लाह की ओर झुकने वाले।

तफ़सीर:

यह आयत उन मोमिनों की विशेषताओं का वर्णन कर रही है जो सच्चे ईमानवाले हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि सच्चे मोमिन वे हैं जो अपनी नमाज़ में ख़ुशू' (विनम्रता और खुद को अल्लाह के सामने पूरी तरह समर्पित करने) की हालत में होते हैं।

ख़ुशू' का मतलब है कि नमाज़ के दौरान दिल अल्लाह की तरफ़ पूरी तरह मुतवज्जह हो, शरीर के सारे अंग सुकून और इत्मीनान से हों, और इंसान का दिल दुनिया के सारे कामों और फ़िक्रों से खाली होकर सिर्फ़ अल्लाह की इबादत में मशग़ूल हो। नमाज़ में ख़ुशू' का मतलब यह भी है कि इंसान अपनी नज़रें नीची रखे, सजदे की जगह देखे, और अपने दिल को अल्लाह के सामने झुका दे।

ख़ुशू' सिर्फ़ शरीर का नहीं होता, बल्कि दिल का ख़ुशू' सबसे अहम है। जब दिल ख़ुशू' हासिल कर लेता है, तो शरीर के अंग भी अपने आप विनम्र हो जाते हैं। नमाज़ में ख़ुशू' का यह मतलब नहीं कि सिर्फ़ झुकना और सजदा करना है, बल्कि दिल का अल्लाह की तरफ़ पूरी तरह मुतवज्जह होना और उसकी अज़मत और बुज़ुर्गी के सामने अपनी कमज़ोरी और नाचीज़गी का एहसास होना है।

यह आयत हमें सिखाती है कि नमाज़ सिर्फ़ एक रस्म नहीं है, बल्कि यह अल्लाह से राब्ता और क़ुर्बत हासिल करने का ज़रिया है। जो लोग नमाज़ में ख़ुशू' हासिल कर लेते हैं, उनकी नमाज़ उन्हें बुराई और बेदीनी से रोकती है, और उनके दिलों को रोशन करती है। यही वह लोग हैं जो अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार हैं।

प्यारे मुसलमानों! हमें चाहिए कि अपनी नमाज़ों में ख़ुशू' हासिल करने की कोशिश करें। नमाज़ में दुनिया के कामों को भूलकर सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ ध्यान लगाएँ। याद रखें, नमाज़ ही वह चीज़ है जो हमें अल्लाह से जोड़ती है और हमारी ज़िंदगी को सुधारती है। जब हमारी नमाज़ ख़ुशू' के साथ होगी, तो हमारी ज़िंदगी के हर पहलू में सुधार आएगा, और हम अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत के हक़दार बनेंगे।



📜 आयत 1-4 — सूरा अल-मोमिनुन

1قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَ
अलबत्ता वह ईमान लाने वाले रस्तगार हुए
2الَّذِينَ هُمْ فِي صَلَاتِهِمْ خَاشِعُونَ
जो अपनी नमाज़ों में (खुदा के सामने) गिड़गिड़ाते हैं
3وَالَّذِينَ هُمْ عَنِ اللَّغْوِ مُعْرِضُونَ
और जो बेहूदा बातों से मुँह फेरे रहते हैं
4وَالَّذِينَ هُمْ لِلزَّكَاةِ فَاعِلُونَ
और जो ज़कात (अदा) किया करते हैं
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 2

सूरा अल-मोमिनुन आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो अपनी नमाज़ों में (खुदा के सामने) गिड़गिड़ाते हैं

सूरा आयत 2/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.





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Monday, September 28, 2026

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