अल-मोमिनुन · 3/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
وَالَّذِينَ هُمْ عَنِ اللَّغْوِ مُعْرِضُونَ ۝٣
Wallazeena hum `anillaghwimu`ridoon
📖 हिंदी अर्थ
और जो बेहूदा बातों से मुँह फेरे रहते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اللَّغْوِ (लग़्व): वह बात या काम जिसमें कोई भलाई न हो, व्यर्थ की बातें, झूठ, गाली-गलौच, बेकार की हरकतें, और वह सब कुछ जो शरई तौर पर बुरा और बेकार हो।
  • مُعْرِضُونَ (मु'रिदून): मुँह मोड़ने वाले, दूर रहने वाले, त्यागने वाले।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों की एक और खूबी बयान फ़रमा रहे हैं। मोमिन वे लोग हैं जो हर उस चीज़ से किनारा कर लेते हैं जो बेकार, व्यर्थ या गुनाह का ज़रिया हो। चाहे वह बातें हों या काम, चाहे वह मज़ाक हो या कोई ऐसी गतिविधि जिसमें अल्लाह की नाराज़गी हो — मोमिन उससे दूर भागते हैं, उसकी तरफ़ रुख भी नहीं करते।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चा मोमिन अपने वक़्त की क़द्र करता है। वह जानता है कि ज़िंदगी बहुत कीमती है और हर पल का हिसाब देना है। इसलिए वह अपने वक़्त को बेकार की बातों, झूठ, गीबत, चुगली, मज़ाक़ियों और ऐसे कामों में बर्बाद नहीं करता जिनमें न दुनिया की भलाई हो न आख़िरत की।

यह खूबी मोमिन की पहचान है कि जब वह किसी बेहूदा मजलिस या व्यर्थ बातचीत के पास से गुज़रता है, तो उसे अहमियत नहीं देता, बल्कि इज़्ज़त के साथ गुज़र जाता है। वह जानता है कि अल्लाह ने उसे बेहतर चीज़ों के लिए पैदा किया है — इबादत के लिए, अच्छे कामों के लिए, और लोगों की भलाई के लिए।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बताती है कि अगर हम सच में मोमिन बनना चाहते हैं, तो हमें अपनी ज़बान और अपने कामों पर काबू रखना होगा। हमें उन चीज़ों से बचना होगा जो हमें अल्लाह से दूर करती हैं। सोशल मीडिया पर बेकार की बहसें, समय बर्बाद करने वाले काम, ऐसी फ़िल्में और गाने जिनमें अल्लाह की नाफ़रमानी हो — यह सब लग़्व (व्यर्थ) में आते हैं। मोमिन इन सबसे बचता है और अपना वक़्त क़ुरआन पढ़ने, ज़िक्र करने, अच्छे कामों और हलाल कमाई में लगाता है।

अल्लाह तआला हम सबको इस खूबी से नवाज़े और हमें उन लोगों में शामिल करे जो लग़्व से मुँह मोड़ने वाले हैं। आमीन।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-मोमिनुन

1قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَ
अलबत्ता वह ईमान लाने वाले रस्तगार हुए
2الَّذِينَ هُمْ فِي صَلَاتِهِمْ خَاشِعُونَ
जो अपनी नमाज़ों में (खुदा के सामने) गिड़गिड़ाते हैं
3وَالَّذِينَ هُمْ عَنِ اللَّغْوِ مُعْرِضُونَ
और जो बेहूदा बातों से मुँह फेरे रहते हैं
4وَالَّذِينَ هُمْ لِلزَّكَاةِ فَاعِلُونَ
और जो ज़कात (अदा) किया करते हैं
5وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ
और जो (अपनी) शर्मगाहों को (हराम से) बचाते हैं
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 3

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Wednesday, September 30, 2026

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