अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- عِلْمٌ مِّنَ الْكِتَابِ: पवित्र किताब (लौह-ए-महफूज़) का ज्ञान रखने वाला।
- يَرْتَدَّ إِلَيْكَ طَرْفُكَ: तुम्हारी पलक झपकने से पहले (यानी आँख के झपकते ही)।
- مُسْتَقِرًّا: सामने स्थिर और विद्यमान।
- لِيَبْلُوَنِي: ताकि मेरी परीक्षा ले।
- غَنِيٌّ كَرِيمٌ: बेनियाज़ (आत्मनिर्भर) और बड़ा दानी।
तफसीर:
जब हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) ने बल्किस (रानी शीबा) का सिंहासन माँगा, तो उनके दरबार में एक ऐसा व्यक्ति था जिसे किताब (लौह-ए-महफूज़) का विशेष ज्ञान प्राप्त था। उसने कहा: "मैं इसे आपके पास ला सकता हूँ इससे पहले कि आपकी पलक झपके।" यह वही व्यक्ति था — आसिफ़ बिन बरखिया — जिसे अल्लाह का महान नाम (इस्म-ए-आज़म) मालूम था, जिसके ज़रिए दुआ ज़रूर क़बूल होती है। उसने अल्लाह से दुआ की और अल्लाह की क़ुदरत से वह सिंहासन पलक झपकते ही हज़रत सुलेमान के सामने आ गया।
जब हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) ने वह सिंहासन अपने सामने स्थिर देखा, तो उन्होंने फ़ौरन अल्लाह का शुक्र अदा किया और कहा: "यह मेरे रब का फज़ल (कृपा) है, ताकि वह मेरी परीक्षा ले कि मैं शुक्र करता हूँ या कुफ़्रान (नाशुक्री) करता हूँ।" यह एक बहुत बड़ा सबक़ है — नेमत मिलने पर इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह का शुक्र अदा करे, क्योंकि यह नेमत अल्लाह की तरफ़ से इम्तिहान है।
फिर हज़रत सुलेमान ने फ़रमाया: "जो शुक्र करता है, उसका शुक्र उसी के भले के लिए है — क्योंकि शुक्र करने से नेमत बरकत के साथ बढ़ती है और इंसान का दिल अल्लाह की मोहब्बत से भर जाता है। और जो कुफ़्रान (नाशुक्री) करता है, तो मेरा रब उसके शुक्र से बेनियाज़ है — वह ग़नी (आत्मनिर्भर) है और करीम (दानी) है। वह शुक्र करने वाले और न करने वाले दोनों को दुनिया में रिज़्क़ देता है, लेकिन आख़िरत में हर एक को उसके अमल के हिसाब से जज़ा देगा।"
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें कितनी बड़ी हैं — वह पलक झपकते ही दूर की चीज़ें हाज़िर कर सकता है। जिस अल्लाह की क़ुदरत यह है, उस पर भरोसा करना चाहिए और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए। शुक्र करने से नेमतें बढ़ती हैं और दिल को सुकून मिलता है। यह भी सीख है कि इल्म (ज्ञान) बहुत बड़ी नेमत है — जिसे अल्लाह ने ज्ञान दिया, वह बड़े से बड़े काम कर सकता है। हमें भी चाहिए कि हम इल्म हासिल करें और उसे अल्लाह की राह में इस्तेमाल करें। अल्लाह ग़नी और करीम है — वह अपने बंदों से भलाई चाहता है, चाहे वे शुक्र करें या न करें, लेकिन शुक्र करने वालों के लिए उसके पास बेहतरीन इनाम हैं।
📜 आयत 38-42 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 40
सूरा अन-नमल आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इस पर अभी सुलेमान कुछ कहने न पाए थे कि…सूरा आयत 40/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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