अन-नमल · 41/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
قَالَ نَكِّرُوا لَهَا عَرْشَهَا نَنظُرْ أَتَهْتَدِي أَمْ تَكُونُ مِنَ الَّذِينَ لَا يَهْتَدُونَ ۝٤١
Qaala nakkiroo lahaa `arshahaa nanzur atahtadeee am takoonu minal lazeena laa yahtadoon
📖 हिंदी अर्थ
(उसके बाद) सुलेमान ने कहा कि उसके तख्त में (उसकी अक्ल के इम्तिहान के लिए) तग़य्युर तबददुल कर दो ताकि हम देखें कि फिर भी वह समझ रखती है या उन लोगों में है जो कुछ समझ नहीं रखते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नक्किरू (نَكِّرُوا): बदल दो, पहचान से परे कर दो।
  • अर्शहा (عَرْشَهَا): उसका सिंहासन, उसका तख्त।
  • अतहतदी (أَتَهْتَدِي): क्या वह पहचान पाएगी, क्या वह सही रास्ता पाएगी।
  • ला यहतदून (لَا يَهْتَدُونَ): जो पहचान नहीं पाते, जो सीधे मार्ग पर नहीं चलते।

तफसीर (व्याख्या):

जब हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम के पास बिल्क़ीस (सबा की रानी) का सिंहासन पहुँच गया, तो उन्होंने अपने दरबारियों से कहा: "इसके सिंहासन का रूप-रंग बदल दो, उसकी शक्ल-सूरत इस तरह बदल दो कि जब वह इसे देखे तो पहचान न सके।" यह काम उन्होंने एक बुद्धिमानी और परीक्षण की नीति के तहत किया।

उनका उद्देश्य यह था कि वे देखें कि बिल्क़ीस की अक्ल और समझ कितनी है। क्या वह अपने ही सिंहासन को पहचान पाएगी जब उसका रूप बदल दिया जाएगा, या वह उन लोगों में से होगी जो अपनी चीज़ों को भी नहीं पहचान पाते? यह एक तरह की परीक्षा थी — उसकी बुद्धि, उसकी समझ और उसके दिल की गहराई को जाँचने का एक ज़रिया।

यह घटना हमें सिखाती है कि इस्लाम में बुद्धि और समझ को बहुत अहमियत दी गई है। हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने यह परीक्षण इसलिए किया ताकि बिल्क़ीस के सामने सच्चाई साबित हो सके और वह अपने दिल से ईमान लाए। यह भी दिखाता है कि एक बुद्धिमान इंसान अपने आस-पास की चीज़ों पर ग़ौर करता है, और जो लोग अक्ल और समझ का इस्तेमाल करते हैं, वही सच्चाई तक पहुँच पाते हैं।

यह क़िस्सा हमें यह भी बताता है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की परीक्षा लेता है, और जो लोग समझदारी से काम लेते हैं, वे हर मुश्किल में सही रास्ता पा लेते हैं। हमें भी चाहिए कि हम अपनी अक्ल और समझ का इस्तेमाल करें, और जब सच्चाई हमारे सामने आए तो उसे कबूल करने में देर न करें — क्योंकि सच्चाई को पहचानना और उस पर अमल करना ही सबसे बड़ी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 39-43 — अन-नमल

39قَالَ عِفْرِيتٌ مِّنَ الْجِنِّ أَنَا آتِيكَ بِهِ قَبْلَ أَن تَقُومَ مِن مَّقَامِكَ ۖ وَإِنِّي عَلَيْهِ لَقَوِيٌّ أَمِينٌ
मलिका का तख्त मेरे पास ले आए (इस पर) जिनों में से एक दियो बोल उठा कि क़ब्ल इसके कि हुज़ूर (दरबार बरख़ास्त करके) अपनी जगह से उठे मै तख्त आपके पास ले आऊँगा और यक़ीनन उस पर क़ाबू रखता हूँ (और) ज़िम्मेदार हूँ
40قَالَ الَّذِي عِندَهُ عِلْمٌ مِّنَ الْكِتَابِ أَنَا آتِيكَ بِهِ قَبْلَ أَن يَرْتَدَّ إِلَيْكَ طَرْفُكَ ۚ فَلَمَّا رَآهُ مُسْتَقِرًّا عِندَهُ قَالَ هَٰذَا مِن فَضْلِ رَبِّي لِيَبْلُوَنِي أَأَشْكُرُ أَمْ أَكْفُرُ ۖ وَمَن شَكَرَ فَإِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهِ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ رَبِّي غَنِيٌّ كَرِيمٌ
इस पर अभी सुलेमान कुछ कहने न पाए थे कि वह शख्स (आसिफ़ बिन बरख़िया) जिसके पास किताबे (ख़ुदा) का किस कदर इल्म था बोला कि मै आप की पलक झपकने से पहले तख्त को आप के पास हाज़िर किए देता हूँ (बस इतने ही में आ गया) तो जब सुलेमान ने उसे अपने पास मौजूद पाया तो कहने लगे ये महज़ मेरे परवरदिगार का फज़ल व करम है ताकि वह मेरा इम्तेहान ले कि मै उसका शुक्र करता हूँ या नाशुक्री करता हूँ और जो कोई शुक्र करता है वह अपनी ही भलाई के लिए शुक्र करता है और जो शख्स ना शुक्री करता है तो (याद रखिए) मेरा परवरदिगार यक़ीनन बेपरवा और सख़ी है
41قَالَ نَكِّرُوا لَهَا عَرْشَهَا نَنظُرْ أَتَهْتَدِي أَمْ تَكُونُ مِنَ الَّذِينَ لَا يَهْتَدُونَ
(उसके बाद) सुलेमान ने कहा कि उसके तख्त में (उसकी अक्ल के इम्तिहान के लिए) तग़य्युर तबददुल कर दो ताकि हम देखें कि फिर भी वह समझ रखती है या उन लोगों में है जो कुछ समझ नहीं रखते
42فَلَمَّا جَاءَتْ قِيلَ أَهَٰكَذَا عَرْشُكِ ۖ قَالَتْ كَأَنَّهُ هُوَ ۚ وَأُوتِينَا الْعِلْمَ مِن قَبْلِهَا وَكُنَّا مُسْلِمِينَ
(चुनान्चे ऐसा ही किया गया) फिर जब बिलक़ीस (सुलेमान के पास) आयी तो पूछा गया कि तुम्हारा तख्त भी ऐसा ही है वह बोली गोया ये वही है (फिर कहने लगी) हमको तो उससे पहले ही (आपकी नुबूवत) मालूम हो गयी थी और हम तो आपके फ़रमाबरदार थे ही
43وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعْبُدُ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ إِنَّهَا كَانَتْ مِن قَوْمٍ كَافِرِينَ
और ख़ुदा के सिवा जिसे वह पूजती थी सुलेमान ने उससे उसे रोक दिया क्योंकि वह काफिर क़ौम की थी (और आफताब को पूजती थी)
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीRevelation
41आयत

अनुवाद — अन-नमल 41

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Tuesday, August 18, 2026

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