अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नक्किरू (نَكِّرُوا): बदल दो, पहचान से परे कर दो।
- अर्शहा (عَرْشَهَا): उसका सिंहासन, उसका तख्त।
- अतहतदी (أَتَهْتَدِي): क्या वह पहचान पाएगी, क्या वह सही रास्ता पाएगी।
- ला यहतदून (لَا يَهْتَدُونَ): जो पहचान नहीं पाते, जो सीधे मार्ग पर नहीं चलते।
तफसीर (व्याख्या):
जब हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम के पास बिल्क़ीस (सबा की रानी) का सिंहासन पहुँच गया, तो उन्होंने अपने दरबारियों से कहा: "इसके सिंहासन का रूप-रंग बदल दो, उसकी शक्ल-सूरत इस तरह बदल दो कि जब वह इसे देखे तो पहचान न सके।" यह काम उन्होंने एक बुद्धिमानी और परीक्षण की नीति के तहत किया।
उनका उद्देश्य यह था कि वे देखें कि बिल्क़ीस की अक्ल और समझ कितनी है। क्या वह अपने ही सिंहासन को पहचान पाएगी जब उसका रूप बदल दिया जाएगा, या वह उन लोगों में से होगी जो अपनी चीज़ों को भी नहीं पहचान पाते? यह एक तरह की परीक्षा थी — उसकी बुद्धि, उसकी समझ और उसके दिल की गहराई को जाँचने का एक ज़रिया।
यह घटना हमें सिखाती है कि इस्लाम में बुद्धि और समझ को बहुत अहमियत दी गई है। हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने यह परीक्षण इसलिए किया ताकि बिल्क़ीस के सामने सच्चाई साबित हो सके और वह अपने दिल से ईमान लाए। यह भी दिखाता है कि एक बुद्धिमान इंसान अपने आस-पास की चीज़ों पर ग़ौर करता है, और जो लोग अक्ल और समझ का इस्तेमाल करते हैं, वही सच्चाई तक पहुँच पाते हैं।
यह क़िस्सा हमें यह भी बताता है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की परीक्षा लेता है, और जो लोग समझदारी से काम लेते हैं, वे हर मुश्किल में सही रास्ता पा लेते हैं। हमें भी चाहिए कि हम अपनी अक्ल और समझ का इस्तेमाल करें, और जब सच्चाई हमारे सामने आए तो उसे कबूल करने में देर न करें — क्योंकि सच्चाई को पहचानना और उस पर अमल करना ही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 39-43 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 41
सूरा अन-नमल आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उसके बाद) सुलेमान ने कहा कि उसके तख्त में (उसकी…सूरा आयत 41/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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