अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- इफ़रीत (عِفْرِيت): ताकतवर और चालाक जिन्न।
- मक़ाम (مَقَام): बैठने की जगह, दरबार।
- क़वी (قَوِيّ): ताकतवर, बलवान।
- अमीन (أَمِين): भरोसेमंद, अमानतदार।
तफ़सीर:
जब हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने बिल्क़ीस (सबा की रानी) का सिंहासन माँगा, तो जिन्नात में से एक ताकतवर और चालाक इफ़रीत ने कहा: "मैं इसे आपके पास ले आऊँगा, इससे पहले कि आप अपनी जगह से उठें।" यानी वह इतनी जल्दी लाने का दावा कर रहा था कि सुलेमान अलैहिस्सलाम को अपनी बैठक से उठना भी न पड़े। उसने यह भी कहा कि मैं इस सिंहासन को उठाने की ताकत रखता हूँ और इसकी अमानत में ख़यानत नहीं करूँगा—न इसमें से कुछ घटाऊँगा, न बदलूँगा, बल्कि इसे ज्यों-का-त्यों लाऊँगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने जिन्नात को भी ताकत और काबिलियत दी है, लेकिन असली ताकत और इल्म तो अल्लाह के पास है। हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने इस पर खुश नहीं हुए, बल्कि उन्होंने अल्लाह की तरफ देखा और उसकी कुदरत पर भरोसा किया। यह हमारे लिए सबक है कि हमें अपनी ताकत और काबिलियत पर नहीं, बल्कि अल्लाह की मदद पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह जब चाहता है, किसी काम को पलक झपकते ही कर देता है, और उसकी कुदरत के आगे हर ताकतवर कमज़ोर है।
यह क़िस्सा हमें यह भी बताता है कि अल्लाह के नबी अपने कामों में अक्लमंदी, ताकत और अमानतदारी को अहमियत देते थे। इफ़रीत ने जो गुण बयान किए—ताकत और अमानतदारी—ये वो खूबियाँ हैं जो हर मुसलमान को अपने अंदर पैदा करनी चाहिए। हमें अपने कामों में मेहनत और ताकत से काम लेना चाहिए, और साथ ही अमानतदार बनना चाहिए ताकि लोग हम पर भरोसा कर सकें।
और सबसे बड़ी बात, यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत पर ईमान लाने की तरफ बुलाती है। जब अल्लाह किसी काम का इरादा करता है, तो उसे रोकने वाला कोई नहीं। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर मामले में अल्लाह की तरफ रुजू करें, उसी से मदद माँगें, और यक़ीन रखें कि वह हर मुश्किल को आसान कर सकता है।
📜 आयत 37-41 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 39
सूरा अन-नमल आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मलिका का तख्त मेरे पास ले आए (इस पर) जिनों…सूरा आयत 39/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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