अन-नमल · 39/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
قَالَ عِفْرِيتٌ مِّنَ الْجِنِّ أَنَا آتِيكَ بِهِ قَبْلَ أَن تَقُومَ مِن مَّقَامِكَ ۖ وَإِنِّي عَلَيْهِ لَقَوِيٌّ أَمِينٌ ۝٣٩
Qaala `ifreetum minal jinni ana aateeka bihee qabla an taqooma mim maqaamika wa innee `alaihi laqawiyyun ameen
📖 हिंदी अर्थ
मलिका का तख्त मेरे पास ले आए (इस पर) जिनों में से एक दियो बोल उठा कि क़ब्ल इसके कि हुज़ूर (दरबार बरख़ास्त करके) अपनी जगह से उठे मै तख्त आपके पास ले आऊँगा और यक़ीनन उस पर क़ाबू रखता हूँ (और) ज़िम्मेदार हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • इफ़रीत (عِفْرِيت): ताकतवर और चालाक जिन्न।
  • मक़ाम (مَقَام): बैठने की जगह, दरबार।
  • क़वी (قَوِيّ): ताकतवर, बलवान।
  • अमीन (أَمِين): भरोसेमंद, अमानतदार।

तफ़सीर:

जब हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने बिल्क़ीस (सबा की रानी) का सिंहासन माँगा, तो जिन्नात में से एक ताकतवर और चालाक इफ़रीत ने कहा: "मैं इसे आपके पास ले आऊँगा, इससे पहले कि आप अपनी जगह से उठें।" यानी वह इतनी जल्दी लाने का दावा कर रहा था कि सुलेमान अलैहिस्सलाम को अपनी बैठक से उठना भी न पड़े। उसने यह भी कहा कि मैं इस सिंहासन को उठाने की ताकत रखता हूँ और इसकी अमानत में ख़यानत नहीं करूँगा—न इसमें से कुछ घटाऊँगा, न बदलूँगा, बल्कि इसे ज्यों-का-त्यों लाऊँगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने जिन्नात को भी ताकत और काबिलियत दी है, लेकिन असली ताकत और इल्म तो अल्लाह के पास है। हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने इस पर खुश नहीं हुए, बल्कि उन्होंने अल्लाह की तरफ देखा और उसकी कुदरत पर भरोसा किया। यह हमारे लिए सबक है कि हमें अपनी ताकत और काबिलियत पर नहीं, बल्कि अल्लाह की मदद पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह जब चाहता है, किसी काम को पलक झपकते ही कर देता है, और उसकी कुदरत के आगे हर ताकतवर कमज़ोर है।

यह क़िस्सा हमें यह भी बताता है कि अल्लाह के नबी अपने कामों में अक्लमंदी, ताकत और अमानतदारी को अहमियत देते थे। इफ़रीत ने जो गुण बयान किए—ताकत और अमानतदारी—ये वो खूबियाँ हैं जो हर मुसलमान को अपने अंदर पैदा करनी चाहिए। हमें अपने कामों में मेहनत और ताकत से काम लेना चाहिए, और साथ ही अमानतदार बनना चाहिए ताकि लोग हम पर भरोसा कर सकें।

और सबसे बड़ी बात, यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत पर ईमान लाने की तरफ बुलाती है। जब अल्लाह किसी काम का इरादा करता है, तो उसे रोकने वाला कोई नहीं। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर मामले में अल्लाह की तरफ रुजू करें, उसी से मदद माँगें, और यक़ीन रखें कि वह हर मुश्किल को आसान कर सकता है।



📜 आयत 37-41 — अन-नमल

37ارْجِعْ إِلَيْهِمْ فَلَنَأْتِيَنَّهُم بِجُنُودٍ لَّا قِبَلَ لَهُم بِهَا وَلَنُخْرِجَنَّهُم مِّنْهَا أَذِلَّةً وَهُمْ صَاغِرُونَ
(फिर तोहफा लाने वाले ने कहा) तो उन्हीं लोगों के पास जा हम यक़ीनन ऐसे लश्कर से उन पर चढ़ाई करेंगे जिसका उससे मुक़ाबला न हो सकेगा और हम ज़रुर उन्हें वहाँ से ज़लील व रुसवा करके निकाल बाहर करेंगे
38قَالَ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ أَيُّكُمْ يَأْتِينِي بِعَرْشِهَا قَبْلَ أَن يَأْتُونِي مُسْلِمِينَ
(जब वह जा चुका) तो सुलेमान ने अपने अहले दरबार से कहा ऐ मेरे दरबार के सरदारो तुममें से कौन ऐसा है कि क़ब्ल इसके वह लोग मेरे सामने फरमाबरदार बनकर आयें
39قَالَ عِفْرِيتٌ مِّنَ الْجِنِّ أَنَا آتِيكَ بِهِ قَبْلَ أَن تَقُومَ مِن مَّقَامِكَ ۖ وَإِنِّي عَلَيْهِ لَقَوِيٌّ أَمِينٌ
मलिका का तख्त मेरे पास ले आए (इस पर) जिनों में से एक दियो बोल उठा कि क़ब्ल इसके कि हुज़ूर (दरबार बरख़ास्त करके) अपनी जगह से उठे मै तख्त आपके पास ले आऊँगा और यक़ीनन उस पर क़ाबू रखता हूँ (और) ज़िम्मेदार हूँ
40قَالَ الَّذِي عِندَهُ عِلْمٌ مِّنَ الْكِتَابِ أَنَا آتِيكَ بِهِ قَبْلَ أَن يَرْتَدَّ إِلَيْكَ طَرْفُكَ ۚ فَلَمَّا رَآهُ مُسْتَقِرًّا عِندَهُ قَالَ هَٰذَا مِن فَضْلِ رَبِّي لِيَبْلُوَنِي أَأَشْكُرُ أَمْ أَكْفُرُ ۖ وَمَن شَكَرَ فَإِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهِ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ رَبِّي غَنِيٌّ كَرِيمٌ
इस पर अभी सुलेमान कुछ कहने न पाए थे कि वह शख्स (आसिफ़ बिन बरख़िया) जिसके पास किताबे (ख़ुदा) का किस कदर इल्म था बोला कि मै आप की पलक झपकने से पहले तख्त को आप के पास हाज़िर किए देता हूँ (बस इतने ही में आ गया) तो जब सुलेमान ने उसे अपने पास मौजूद पाया तो कहने लगे ये महज़ मेरे परवरदिगार का फज़ल व करम है ताकि वह मेरा इम्तेहान ले कि मै उसका शुक्र करता हूँ या नाशुक्री करता हूँ और जो कोई शुक्र करता है वह अपनी ही भलाई के लिए शुक्र करता है और जो शख्स ना शुक्री करता है तो (याद रखिए) मेरा परवरदिगार यक़ीनन बेपरवा और सख़ी है
41قَالَ نَكِّرُوا لَهَا عَرْشَهَا نَنظُرْ أَتَهْتَدِي أَمْ تَكُونُ مِنَ الَّذِينَ لَا يَهْتَدُونَ
(उसके बाद) सुलेमान ने कहा कि उसके तख्त में (उसकी अक्ल के इम्तिहान के लिए) तग़य्युर तबददुल कर दो ताकि हम देखें कि फिर भी वह समझ रखती है या उन लोगों में है जो कुछ समझ नहीं रखते
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अनुवाद — अन-नमल 39

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Tuesday, August 18, 2026

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